राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों का इतिहास हैरान कर देने वाला है। राम मंदिर से जुड़ने के बाद इन आरोपियों का मानों रहन-सहन, चाल-चलन सबकुछ बदल गया।

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जो कभी एक दिन का खर्च चलाने के भी दिनभर मशक्कत करते थे वह आज लाखों में खेल रहे थे। शाही-ठाठ और रुतबा भी किसी से कम नहीं था। राम मंदिर से जुड़ने के बाद मानों इन सभी आरोपियों की किस्मत ही बदल गई थी। दिन पर दिन आरोपी अमीर होते चले गए। महज कुछ ही दिनों में फर्श से अर्श पर कई नाम पहुंच गए।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

जिन्होंने कभी सपने में भी नोटों की गड्डियां नहीं देखी थीं वह लाखों में खेलने लगे थे। देखते ही देखते औकात से ज्यादा संपत्ति बना ली। इसके बाद तो मानों राम मंदिर के इन कर्मचारियों का हाव-भाव ही बदल गया। रहन-सहन किसी नवाबों से कम नहीं था। राम मंदिर परिसर में ठसक की चर्चा भी दूर-दूर तक फैल गई। सलाम ठोकने वालों की संख्या बढ़ गई। एकाएक बढ़ते रुतबे से सभी हैरान थे।

टिन्नू यादव हर दिन होता गया प्रभावशाली

राम मंदिर के पक्ष में फैसला आने के बाद से ही राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू का प्रभाव दिन प्रतिदिन बढ़ने लगा। स्थानीय स्तर पर शायद ही कोई प्रभावशाली व्यक्ति हो जो टिन्नू ने पहचान न बनाना चाहता रहा हो। क्योंकि परिसर में इन्हें कोई मुख्य दायित्व नहीं सौंपा गया था। इन्हें महासचिव चंपत राय की परछाई के रूप में लोग जानते थे। सूत्र बताते हैं कि टिन्नू के मोबाइल में देश के मानिंद लोगों के नंबर फीड हैं। वह समाज मे ऊंचे पद पर बैठे हुए लोगों से बात कर प्रदर्शन भी करता था।

प्रकरण का अनुकल्प मिश्रा रहा मास्टरमाइंड

राममंदिर में अनुकल्प मिश्र भी नोट गिनने वाले कमरे में कर्मचारी था। वह प्रकरण का मास्टरमाइंड है। सूत्र बताते हैं कि पहले सुरक्षा कर्मियों ने इसे ही पकड़ा। कौशल पुरी स्थित घर से 20 लाख रकम बरामद करने की बात आई थी। कुछ ही वर्षों के भीतर इसने कई प्रॉपर्टी खरीद ली। चढ़ावे वाले रुपये को गिनने के काम से लगभग दो साल से कर रहा था। मदद के लिए बने सुविधा सेंटर में तैनात था, उस पर चढ़ावा के वाउचर में गड़बड़ी करने का आरोप है।

लवकुश मिश्रा ने रिश्ते का जमकर लाभ उठाया

लवकुश मिश्र रिश्ते में अनुकल्प मिश्र का बहनोई है। पूरे गांव में बदली इसकी माली हैसियत की चर्चा महीनों से थी। बाहर भी प्रॉपर्टी में पैसा लगाया था। मंदिर का चढ़ावा, नकदी गणना टीम में लवकुश था। उसके घर से करीब 10 लाख रुपए बरामद होने का दावा है।

रिटायर बैंक कर्मी सुभाष को रखनी थी कर्मियों पर आंख

केनरा बैंक से रिटायर होने के बाद ट्रस्ट कर्मी बने सुभाष को गणना के पूरे कामकाज की मुख्य जिम्मेदारी थी। यह नोट गिनने वाले लोगों की निगरानी करते थे। कैश काउंटिंग सेंटर इंचार्ज बने सुभाष के खिलाफ पूछताछ में एसआईटी ने गंभीर आरोप लगाए हैं।

अविनाश शुक्ला पर नकदी ले जाने के आरोप

चढ़ावे की गिनती से अविनाश शुक्ला जुड़ा रहा। अयोध्या का यह आरोपी रोज मंदिर से कुछ ना कुछ नगदी लेकर जाता था। इसके लिए उसने ग्रुप बना रखा था। मंदिर से बाहर निकालने के बाद सभी रुपयों का बटवारा करते थे। राम मंदिर में चढ़ावे वाले पैसे और नकदी को दान पात्रों से निकालने और धनराशि को गणना कक्ष तक ले जाने का काम अविनाश शुक्ला करता था। वहां गिनती करने वाली टीम में शामिल था।

करुणेश ने गणना कक्ष के अंदर चढ़ावे में किया खेल

राम मंदिर में चंदा चोरी में गिरफ्तार करुणेश पांडेय का काम मंदिर में चढ़ाए जाने वाले चढ़ावों का गणना कक्ष तक पहुंचाने का रोल था। श्रीराम मंदिर में जो भी चढ़ाया जाया करता था, उस चढ़ावे को गणना कक्ष सिर्फ ले जाने का ही नहीं बल्कि गिनने का काम था। करुणेश पर आरोप है कि इन्होंने दानराशि चुराकर संपत्ति अर्जित की है। अनुकल्प ही इन्हें नौकरी पर रखवाए थे। जांच में कई लाख रुपए बरामद हुए हैं।

रमाशंकर मिश्रा के पास से बरामद हुए लाखों रुपये

रमाशंकर मिश्र भी राममंदिर में प्रमुख रूप से चढ़ावा की गिनती के लिए जिम्मेदारी दी गई थी। नगदी गणना कक्ष में कर्मचारी के पद पर थे। इनके पास से भी कई लाख रुपए बरामद हुए हैं।

टिन्नू का भतीजा मनीष कुमार यादव था बेलगाम

एक अन्य अभियुक्त मनीश यादव रिश्ते में टिन्नू का भतीजा बताया जाता है। यह भी राम जन्मभूमि परिसर में पांच महीने पहले ही ज्वाइन किया था। टिन्नू का भतीजा होने से परिसर में इसे भी कोई आवागमन में नहीं रोकना था। पास बनवाकर दर्शन करवाना और फिर नोट गिनने वाले कमरे में काम में सहयोग करना मुख्य कार्य था। दानपात्रों में चढ़ाए गए चढ़ावे में नकली नोट निकालने, गिनकर अलग रखने की जिम्मेदारी थी।


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