देहरादून। एसटीएफ उत्तराखंड ने प्रतिबंधित दवा सप्लाई करने वाले गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है। आरोपित पूर्व में गिरफ्तार सचिन मनिहाल के लिए उत्तराखंड में रिसीवर एवं डिस्ट्रीब्यूटर का कार्य करता था।

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आरोपित की पहचान अंकित कुमार प्रजापति निवासी नियाजूपुरा माजरा, शहाबुद्दीनपुर, मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश वर्तमान निवासी प्रदीप बिहार कालोनी, रुड़की, जनपद हरिद्वार के रूप में हुई है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि बीती 11 मई को एसटीएफ की एएनटीएफ व थाना मंगलौर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 18 हजार प्रतिबंधित ट्रामाडोल कैप्सूल बरामद किए थे। इस संबंध में थाना मंगलौर जनपद हरिद्वार में मुकदमा दर्ज किया गया था।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण की विवेचना स्पेशल टास्क फोर्स देहरादून की ओर से की जा रही है।

विवेचना के दौरान पूर्व में गिरफ्तार सचिन मनिहाल से प्राप्त साक्ष्यों, बैंक खातों के विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्यों एवं तकनीकी जांच के आधार पर अंकित कुमार प्रजापति की भूमिका प्रकाश में आई।

जांच में सामने आया कि अंकित कुमार प्रजापति जनवरी 2026 से साथी सचिन मनिहाल से ट्रामाडोल प्राप्त कर हरिद्वार एवं आसपास के क्षेत्रों में अवैध रूप से सप्लाई करता था।

प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री से प्राप्त धनराशि में अपना कमीशन काटकर शेष राशि सचिन को नकद एवं बैंक खाते के माध्यम से उपलब्ध करता था।

पूछताछ व साक्ष्यों से यह भी स्पष्ट हुआ कि आरोपित को जनवरी 2026 से अब तक लगभग 77 पेटियां स्पासमोर कैप्सूल विभिन्न खेपों में प्राप्त हुई थीं।

उन्होंने बताया कि 27 अप्रैल को भेजी गई खेप के संबंध में आरोपित के बयान, बैंक लेन-देन एवं डिजिटल साक्ष्यों से पुष्टि हुई।

विवेचना में यह भी पाया गया कि आरोपित ने पुलिस कार्रवाई से बचने के उद्देश्य से सहयोगी सचिन के साथ की गई महत्वपूर्ण वाट्सएप चेट एवं काल रिकार्ड जानबूझकर डिलीट कर दी। अब डिजिटल साक्ष्यों से इसकी पुष्टि हुई है।

कड़ियां जोड़ते हुए आरोपित तक पहुंची एसटीएफ

एसएसपी ने बताया कि एसटीएफ टीम ने मुकदमे में कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए आरोपित अंकित कुमार प्रजापति को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से दो फोन बरामद कर सीज किए हैं। आरोपित अंकित के विरुद्ध पंजाब, दिल्ली व उत्तर प्रदेश में चार मुकदमे दर्ज हैं।

आरोपितों के लिंक, आर्थिक लाभ, बैंक खातों, डिजिटल साक्ष्यों तथा पूरे सप्लाई नेटवर्क की विस्तृत जांच की जा रही है। प्रकरण में अन्य संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध भी शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।


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