देहरादून। वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून में युवा विद्यार्थियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार से जोड़ने के उद्देश्य से “विज्ञान सेतु–कनेक्टिंग स्टूडेंट्स” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “युवा शिक्षार्थियों में वैज्ञानिक सोच और STEM शिक्षा को बढ़ावा देना” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को वैज्ञानिक जिज्ञासा, तार्किक सोच, प्रयोगात्मक अधिगम, नवाचार और तकनीकी कौशल के महत्व से अवगत कराया गया।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण India Smart Grid Forum (ISGF) और वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मध्य हुआ समझौता ज्ञापन (MoU) रहा। समझौते का उद्देश्य प्रौद्योगिकी, नवाचार तथा भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं से जुड़े क्षेत्रों में दोनों संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करना है। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास से जोड़ने के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. शिव कुमार शर्मा, राष्ट्रीय संगठन सचिव, VIBHA, विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) तृप्ता ठाकुर, प्रो. दुर्गेश पंत, महानिदेशक, यूकॉस्ट, डॉ. के.डी. पुरोहित, अध्यक्ष, DBVS, VIBHA उत्तराखण्ड प्रान्त, डॉ. डी.पी. उनियाल, संयुक्त निदेशक, यूकॉस्ट एवं उपाध्यक्ष DBVS, VIBHA, डॉ. नरेंद्र सिंह, सचिव DBVS, VIBHA उत्तराखण्ड प्रान्त तथा डॉ. रेजी कुमार पिल्लई, चेयरमैन, India Smart Grid Forum सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ वंदेमातरम गीत और राष्ट्रगान से हुआ। इसके बाद अतिथियों एवं गणमान्य लोगों ने सरस्वती वंदना तथा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की।
जिज्ञासा को क्षमता में बदलने पर जोर
कार्यक्रम के प्रारंभिक सत्र में डॉ. लोकेश जोशी और डॉ. आशीष रतूड़ी, DBVS उत्तराखण्ड प्रान्त ने विद्यार्थी विज्ञान आंदोलन और विद्यार्थी विज्ञान मंथन की गतिविधियों और उद्देश्यों का परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा और तार्किक सोच विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वक्ताओं ने फिजिक्स ओलंपियाड और वैज्ञानिक अधिगम के महत्व को समझाते हुए कहा कि विज्ञान केवल पुस्तकों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसे प्रयोग, अनुभव और सवालों के माध्यम से समझने की आवश्यकता है। विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक एवं हैंड्स-ऑन लर्निंग से जोड़ने पर जोर दिया गया।
इस दौरान “Curiosity Becomes Capability” की अवधारणा को प्रमुखता से रखा गया। विद्यार्थियों से कहा गया कि उनकी जिज्ञासा ही भविष्य की क्षमता और नवाचार की आधारशिला बन सकती है। वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए सवाल पूछना, उनके उत्तर तलाशना और उपलब्ध ज्ञान को प्रयोग में लाना जरूरी है।
हिमालयी पारिस्थितिकी और विज्ञान में करियर की जानकारी
डॉ. डी.पी. उनियाल ने विद्यार्थियों को हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड जैसे हिमालयी राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, आपदा प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने विद्यार्थियों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े विभिन्न करियर विकल्पों की जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान समय में विज्ञान की शिक्षा केवल पारंपरिक रोजगार तक सीमित नहीं है। अनुसंधान, तकनीक, डेटा, पर्यावरण, ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी और अन्य उभरते क्षेत्रों में युवाओं के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।
मजबूत वैज्ञानिक बुनियाद पर जोर
डॉ. के.डी. पुरोहित ने मूलभूत विज्ञान और वैज्ञानिक प्रश्न पूछने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि किसी भी बड़ी तकनीकी उपलब्धि के पीछे मूलभूत विज्ञान की मजबूत नींव होती है।
उन्होंने विद्युत चुम्बकीय तरंगों और स्पेक्ट्रम जैसे वैज्ञानिक विषयों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अवधारणाओं को गहराई से समझने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भविष्य की तकनीकी प्रगति के लिए युवाओं में विज्ञान की मजबूत बुनियाद विकसित करना आवश्यक है।
विज्ञान और समाज के बीच बेहतर संपर्क की जरूरत
प्रो. दुर्गेश पंत, महानिदेशक, यूकॉस्ट ने उत्तराखण्ड और हिमालयी क्षेत्र में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने देहरादून और प्रदेश में कार्यरत विभिन्न वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों, विद्यार्थियों और समाज के बीच बेहतर समन्वय और संपर्क समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि “विज्ञान सेतु” जैसे प्रयास वैज्ञानिक संस्थानों और युवा विद्यार्थियों के बीच संवाद का माध्यम बन सकते हैं। ऐसे कार्यक्रमों से विद्यार्थियों को प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक गतिविधियों, अनुसंधान और नवाचार की वास्तविक दुनिया को समझने का अवसर मिलता है।
उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों और नवाचारों के कारण तेजी से बदल रहे तकनीकी परिदृश्य की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से बदलती तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का आह्वान किया।
विकसित भारत 2047 में युवाओं की भूमिका
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) तृप्ता ठाकुर ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कौशल विकास की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक, तकनीकी और कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने नशा मुक्त युवा को सशक्त और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण बताते हुए उपस्थित लोगों से नशा मुक्ति और विकसित भारत के संकल्प की शपथ लेने का आह्वान किया।
कुलपति ने विद्यार्थियों को भविष्य में वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से जुड़ने और उपलब्ध शैक्षणिक एवं तकनीकी अवसरों का लाभ उठाने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा को सही दिशा मिले तो वे प्रदेश और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विज्ञान, तकनीक और कौशल के साथ नैतिक मूल्यों का समन्वय युवा पीढ़ी को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा।
प्रश्न पूछने से विकसित होती है वैज्ञानिक सोच
डॉ. शिव कुमार शर्मा, राष्ट्रीय संगठन सचिव, VIBHA ने विज्ञान सीखने में जिज्ञासा, प्रश्न करने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल उत्तर याद कराने के बजाय उन्हें प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
उन्होंने वैज्ञानिक सोच के विकास में शिक्षकों और मार्गदर्शकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों में सार्थक प्रश्न पूछने की आदत विकसित करना आवश्यक है। पर्यावरणीय जागरूकता और वैज्ञानिक सोच को भी उन्होंने वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।
उन्होंने विज्ञान सेतु कार्यक्रम को विद्यार्थियों को विज्ञान से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बताते हुए युवाओं से वैज्ञानिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
तकनीक के माध्यम से विकसित भारत का संकल्प
डॉ. रेजी कुमार पिल्लई, चेयरमैन, India Smart Grid Forum ने विकसित भारत के निर्माण में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर विचार रखे। उन्होंने आधुनिक तकनीकी आवश्यकताओं और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप युवाओं में तकनीकी दक्षता विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड, डिजिटल तकनीक और आधुनिक तकनीकी प्रणालियों में आने वाले बदलावों को समझने के लिए युवाओं को लगातार नई जानकारी और कौशल से जुड़ना होगा।
विद्यार्थियों की अधिक भागीदारी का आह्वान
मुख्य अतिथि डॉ. धन सिंह रावत ने सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए विज्ञान सेतु कार्यक्रम में अधिक से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने विकसित भारत की परिकल्पना से जुड़े कार्यक्रमों में युवाओं की सक्रिय सहभागिता को आवश्यक बताया।
उन्होंने विभिन्न स्तरों पर आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं और कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को भाग लेने के लिए प्रेरित किया। विद्यालयों और महाविद्यालयों को निबंध लेखन, प्रदर्शनियों और अन्य विकासात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कैबिनेट मंत्री ने नशा मुक्त अभियान और युवा जागरूकता को भी विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश के विकास में युवाओं की भूमिका निर्णायक है। विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और कौशल के क्षेत्र में आगे बढ़कर युवा विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दे सकते हैं।
विश्वविद्यालय और ISGF के बीच MoU बना कार्यक्रम का प्रमुख पड़ाव
कार्यक्रम के दौरान India Smart Grid Forum (ISGF) और वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मध्य MoU पर हस्ताक्षर किया गया। इसे कार्यक्रम का महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया।
इस समझौते के माध्यम से प्रौद्योगिकी, नवाचार और भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। विश्वविद्यालय और तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञ संस्थान के बीच यह सहयोग विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी विकास की दिशा से जोड़ने में उपयोगी हो सकता है।
MoU के माध्यम से तकनीकी ज्ञान, नवाचार और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास के लिए सहयोग की संभावनाएं मजबूत होंगी। इससे विद्यार्थियों को बदलते तकनीकी परिवेश को समझने और अपनी क्षमताओं को विकसित करने के नए अवसर मिल सकते हैं।
विज्ञान सेतु बना संवाद का मंच
पूरे कार्यक्रम में एक बात प्रमुख रूप से उभरकर सामने आई कि विज्ञान और तकनीक को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों को उसके व्यावहारिक पक्ष से जोड़ना जरूरी है। विज्ञान सेतु इसी दिशा में विद्यार्थियों, वैज्ञानिक संस्थानों, शिक्षकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच संवाद का मंच बनकर सामने आया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति जिज्ञासु बनने, तार्किक सोच विकसित करने, प्रयोग करने, प्रश्न पूछने और नए विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही उन्हें विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में उपलब्ध करियर तथा कौशल विकास के अवसरों से भी अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. डी.पी. उनियाल, संयुक्त निदेशक, यूकॉस्ट एवं उपाध्यक्ष, DBVS, VIBHA ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
कुल मिलाकर, वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित विज्ञान सेतु कार्यक्रम ने युवा विद्यार्थियों के बीच विज्ञान, तकनीक और नवाचार को लेकर नई सोच विकसित करने का संदेश दिया। वहीं विश्वविद्यालय और India Smart Grid Forum के बीच हुआ MoU भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप सहयोग, नवाचार और कौशल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आया।
