सिरौलीकलां में चुनाव से पहले ही भाजपा ने टेके घुटने? प्रत्याशी न मिलना बना बड़ा राजनीतिक सवाल नगर पालिका चुनाव किच्छा विधानसभा क्षेत्र

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सिरौलीकलां में चुनाव से पहले ही भाजपा ने टेके घुटने?
अध्यक्ष पद पर प्रत्याशी तक नहीं उतार पाई पार्टी, कांग्रेस और निर्दलीय के बीच मुकाबला
सिरौलीकलां। नगर पालिका सिरौलीकलां के पहले चुनाव ने मतदान से पहले ही भाजपा की रणनीति पर बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा कर दिया। चुनावी मैदान में उतरने से पहले ही भाजपा अध्यक्ष पद के लिए अपना प्रत्याशी नहीं तलाश सकी। नामांकन की अंतिम तारीख तक भाजपा की ओर से अध्यक्ष पद पर कोई प्रत्याशी नामांकन दाखिल नहीं कर पाया। दूसरी ओर कांग्रेस ने राशिदा पत्नी सहीदुल रहमान को मैदान में उतारा, जबकि फरहीन जहां पुत्री नासिर हुसैन ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया।
यानी जिस नगर पालिका में भाजपा को अपने संगठन और राजनीतिक आधार के साथ चुनावी मुकाबले में उतरना था, वहां अध्यक्ष पद की दौड़ में पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी ही नजर नहीं आया। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर अब सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा ने चुनाव परिणाम आने से पहले ही सिरौलीकलां में घुटने टेक दिए थे?
मुस्लिम बहुल क्षेत्र की राजनीतिक वास्तविकता
सिरौलीकलां लंबे समय से मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता रहा है। हालांकि उपलब्ध 2011 जनगणना के सार्वजनिक स्रोत में सिरौलीकलां गांव की कुल आबादी 13,806 दर्ज है, लेकिन उसी स्रोत में धर्मवार आबादी का आधिकारिक प्रतिशत उपलब्ध नहीं है। इसलिए हिंदू-मुस्लिम आबादी का कोई अप्रमाणित प्रतिशत देना उचित नहीं होगा।
सिरौलीकलां नगरपालिका में 2026 के चुनाव के लिए 11,591 मतदाता हैं—इनमें 6,156 पुरुष और 5,435 महिलाएं शामिल हैं। यह इस क्षेत्र के पहले नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव के रूप में भी महत्वपूर्ण है।
भाजपा के सामने बड़ा सवाल
सवाल केवल यह नहीं है कि भाजपा का प्रत्याशी कौन होता। असली सवाल यह है कि क्या पार्टी ने क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए पहले ही चुनावी मुकाबले से दूरी बना ली?
भाजपा के पास संगठन, कार्यकर्ता और राजनीतिक नेतृत्व होने के बावजूद अध्यक्ष पद पर प्रत्याशी न उतरना स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। दूसरी ओर कांग्रेस ने राशिदा को मैदान में उतारकर चुनावी मुकाबले को सीधे अपने पक्ष में रखने की कोशिश की, जबकि फरहीन जहां के निर्दलीय मैदान में आने से मुकाबले का समीकरण अलग रूप ले गया।
अब राजनीतिक चर्चा यह है कि जिस सीट पर भाजपा का प्रत्याशी ही मैदान में नहीं था, वहां पार्टी के स्थानीय संगठन और समर्थक किस भूमिका में रहे और इसका भविष्य की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
पहली बार चेयरमैन चुनेगा सिरौलीकलां
सिरौलीकलां को किच्छा नगरपालिका से अलग कर नई नगरपालिका बनाया गया है। 2026 में यहां पहली बार अध्यक्ष का चुनाव हुआ। नगरपालिका में चार वार्ड बनाए गए हैं।
इस लिहाज से सिरौलीकलां का पहला चुनाव केवल एक नगरपालिका अध्यक्ष चुनने तक सीमित नहीं है। यह आने वाले वर्षों में क्षेत्र की स्थानीय राजनीति की दिशा तय करने वाला चुनाव भी माना जा रहा है।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की नजर में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या भाजपा ने सिरौलीकलां में चुनाव शुरू होने से पहले ही मैदान छोड़ दिया था, या प्रत्याशी न उतारने के पीछे कोई अलग राजनीतिक रणनीति थी? इसका जवाब आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम से मिलेगा।
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