अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में उबाल: दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाए जाने पर कांग्रेस और यूकेडी का विरोध, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

उत्तराखंड। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। भाजपा के पूर्व उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद कांग्रेस और उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने भाजपा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश में इस नियुक्ति को लेकर राजनीतिक विरोध के स्वर तेज हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े आरोपों और उठ रहे सवालों का निष्पक्ष तरीके से समाधान होना चाहिए, ताकि पीड़िता और उसके परिवार को न्याय मिल सके।

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट उत्तराखंड | देश-दुनिया की खबरों पर नजर


बुधवार को युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष गोकुल परिहार के नेतृत्व में कार्यकर्ता एसबीआई तिराहे पर एकत्र हुए। यहां उन्होंने केंद्र सरकार और दुष्यंत गौतम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुतला दहन किया। कार्यकर्ताओं ने मांग की कि दुष्यंत गौतम को राज्यपाल पद से हटाया जाए और अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सभी सवालों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध और उनकी अस्मिता से जुड़े मामलों में न्याय सर्वोपरि होना चाहिए। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सामने आने वाले आरोपों की जांच निष्पक्षता से होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा।
भाजपा की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति को लेकर कांग्रेस और यूकेडी के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं ने भाजपा की राजनीतिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड की भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील मामला है। ऐसे में इस प्रकरण से संबंधित सवालों का स्पष्ट और निष्पक्ष जवाब सामने आना चाहिए।
उत्तराखंड में यह मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था और सत्ता में बैठे लोगों की जवाबदेही से भी जुड़ा है। हालांकि, दुष्यंत गौतम के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों और उनकी कथित भूमिका से जुड़े दावों की पुष्टि निष्पक्ष जांच तथा उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर ही की जानी चाहिए।
जनता के सवालों का जवाब कौन देगा?
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में समय-समय पर वीआईपी की कथित भूमिका के सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में राज्यपाल पद पर नियुक्ति के बाद राजनीतिक विरोधियों ने सवाल किया है कि इस संवेदनशील मामले से जुड़े संदेहों और आरोपों का समाधान कब होगा? क्या सरकार जनता की आशंकाओं को दूर करने के लिए पारदर्शी जांच सुनिश्चित करेगी? क्या अंकिता को न्याय दिलाने की मांग को राजनीतिक बयानबाजी से आगे ले जाकर ठोस कार्रवाई तक पहुंचाया जाएगा?
फिलहाल, दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को लेकर विपक्ष का विरोध और अंकिता भंडारी हत्याकांड में निष्पक्ष जांच की मांग उत्तराखंड की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर