उत्तराखंड/गंगटोक/सिक्किम, 19 अक्टूबर 2026।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यंत कुमार गौतम ने सोमवार को सिक्किम के 19वें राज्यपाल के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। गंगटोक स्थित लोक भवन में आयोजित समारोह में सिक्किम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए. मुहम्मद मुस्ताक ने उन्हें शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग सहित राज्य सरकार के मंत्री, विधायक, न्यायाधीश और कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
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राष्ट्रपति ने 12 अक्टूबर को की थी नियुक्ति
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर 2026 को दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल नियुक्त किया था। उन्होंने ओम प्रकाश माथुर का स्थान लिया है, जिन्हें केरलम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
नियुक्ति संबंधी आदेश के अनुसार, नए राज्यपाल की नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होनी थी। दुष्यंत कुमार गौतम के शपथ लेने के साथ ही उन्होंने सिक्किम के संवैधानिक प्रमुख का कार्यभार संभाल लिया।
शपथ ग्रहण समारोह में कौन-कौन रहा मौजूद?
लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग, राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य, विधानसभा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, विधायक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
समारोह के दौरान मुख्य सचिव आर. तेलंग ने राष्ट्रपति द्वारा जारी नियुक्ति आदेश पढ़कर सुनाया। शपथ ग्रहण के बाद राज्यपाल ने औपचारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद सिक्किम सशस्त्र पुलिस की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। मुख्यमंत्री ने भी उनका स्वागत किया और उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से परिचय कराया।
राज्यपाल ने जताया राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का आभार
पद की शपथ लेने के बाद दुष्यंत कुमार गौतम ने इस संवैधानिक जिम्मेदारी के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने सिक्किम की शांति, प्रगति और सतत विकास के लिए समर्पित भाव से काम करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने संविधान के मूल्यों की रक्षा करने और राज्य की जनता के हितों को प्राथमिकता देने का संकल्प भी व्यक्त किया।
राज्यपाल ने शपथ ग्रहण के अवसर पर शुभकामनाएं देने वाले सभी गणमान्य व्यक्तियों का धन्यवाद किया।
दुष्यंत कुमार गौतम का राजनीतिक सफर
दुष्यंत कुमार गौतम भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे हैं। वह भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा वह राज्यसभा सांसद तथा दिल्ली नगर निगम के पार्षद भी रह चुके हैं।
संगठनात्मक राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद अब उन्होंने सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नई संवैधानिक जिम्मेदारी संभाली है।
अंकिता भंडारी मामले को लेकर नियुक्ति पर विवाद
दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति के साथ ही उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया है। कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी नेताओं और अन्य संगठनों ने उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रपति से इस पर पुनर्विचार करने तथा मामले से जुड़े आरोपों की जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग की थी।
सिक्किम बार एसोसिएशन ने भी 18 अक्टूबर को राष्ट्रपति को पत्र भेजकर शपथ ग्रहण स्थगित करने का अनुरोध किया था। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया था कि उसका उद्देश्य किसी को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि मामले से जुड़े सवालों की जांच और संवैधानिक पद की गरिमा को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखना है।
इस मुद्दे पर दिल्ली और देहरादून में भी विरोध प्रदर्शन हुए। हालांकि, विरोध और विवाद के बीच 19 अक्टूबर को गंगटोक स्थित लोक भवन में शपथ ग्रहण समारोह निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संपन्न हुआ।
अब सिक्किम के विकास पर रहेंगी निगाहें
दुष्यंत कुमार गौतम के राज्यपाल पद संभालने के बाद सिक्किम में उनके कार्यकाल और संवैधानिक भूमिका पर ध्यान रहेगा। राज्यपाल का पद राज्य की संवैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में संविधान के अनुरूप कार्य करना, राज्य सरकार के साथ संवैधानिक मर्यादाओं के अंतर्गत समन्वय बनाए रखना तथा राज्य की जनता के हितों से जुड़े विषयों पर ध्यान देना उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा होगा।
अपने पहले संदेश में उन्होंने संविधान की रक्षा, शांति, प्रगति और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता जताई है। अब उनके कार्यकाल में इन प्राथमिकताओं को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है, इस पर सभी की निगाहें रहेंगी।
निष्कर्ष: दुष्यंत कुमार गौतम ने 19 अक्टूबर 2026 को सिक्किम के 19वें राज्यपाल के रूप में शपथ लेकर औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण कर लिया। उनकी नियुक्ति जहां राज्य में नई संवैधानिक जिम्मेदारी की शुरुआत है, वहीं अंकिता भंडारी मामले को लेकर उठे सवालों ने इस घटनाक्रम को राष्ट्रीय चर्चा का विषय भी बना दिया है।
