रुद्रपुर में आस्था का केंद्र: गोलजू महाराज मंदिर

उत्तराखंड की पवित्र भूमि पर स्थित गोलजू महाराज का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल बन चुका है। विशेष रूप से रुद्रपुर नगर निगम क्षेत्र में शैल सांस्कृतिक समिति, शैल परिषद द्वारा नवनिर्मित गोलजू महाराज का मंदिर, आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। यह मंदिर पर्वतीय समुदाय के साथ-साथ तराई क्षेत्र के निवासियों के लिए भी अत्यधिक पूजनीय है।
गोलजू महाराज की महिमा एवं मान्यताएँ
गोलजू महाराज को न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है। उनकी उपासना करने वाले भक्तों का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति अन्याय का शिकार होता है या किसी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है, तो वे गोलजू महाराज के दरबार में अपनी अर्जी लगाते हैं। कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना का शीघ्र ही समाधान मिलता है।

गोलजू महाराज का वास्तविक मंदिर चम्पावत जिले के घोड़ाखाल में स्थित है, जो कि एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड में कई स्थानों पर गोलजू महाराज के मंदिर स्थापित हैं, जिनमें अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, नैनीताल और हल्द्वानी प्रमुख हैं। अब रुद्रपुर का नया मंदिर भी इस कड़ी में जुड़ चुका है, जो यहां के श्रद्धालुओं के लिए एक पावन स्थल बन गया है।
रुद्रपुर के गोलजू महाराज मंदिर की विशेषताएँ
शैल सांस्कृतिक समिति, शैल परिषद के नेतृत्व में वर्ष 2024-25 में इस मंदिर का निर्माण किया गया। समिति के पदाधिकारियों में अध्यक्ष गोपाल सिंह पटवार, महासचिव एडवोकेट दिवाकर पांडे, कोषाध्यक्ष डी. के. दनाई, एवं मुख्य भूमिका में दिनेश बम, राजेंद्र बोरा और जगदीश बिष्ट………………………… क्रमशः

मंदिर में प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को उच्च कुलीन ब्राह्मण शास्त्री जी की देखरेख में सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाता है। भक्तजन भारी संख्या में यहाँ एकत्र होकर अपने कष्टों का निवारण पाने के लिए पूजा-अर्चना करते हैं।
गोलजू महाराज का आध्यात्मिक प्रभाव
