
रुद्रपुर में दुकानों के आवंटन पर भारी विवाद, मुख्यमंत्री के दौरे पर विरोध की आशंका
रुद्रपुर: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 24 मार्च 2025 को रुद्रपुर में दुकानों के आवंटन कार्यक्रम में शामिल होंगे, लेकिन यह कार्यक्रम जबरदस्त विरोध और आक्रोश के बीच घिरता नजर आ रहा है। उद्योग व्यापार मंडल रुद्रपुर समेत स्थानीय व्यापारियों और प्रभावित नागरिकों ने इस आवंटन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
विवाद की जड़:
नगर निगम द्वारा रोडवेज के सामने 50 से अधिक दुकानदारों को अतिक्रमणकारी घोषित कर दिया गया है, जबकि वे पिछले 45 वर्षों से वहां व्यवसाय कर रहे हैं। इसके विपरीत, नाले के ऊपर स्लैब डालकर नए वेंडिंग जोन बनाए गए हैं, जहां अपात्र प्रत्याशियों को मामूली दरों पर दुकानें आवंटित की जा रही हैं। खास बात यह है कि बीपीएल श्रेणी के असल हकदारों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है।
बुलडोजर की गूंज:
मुख्यमंत्री के आगमन से पहले प्रशासन ने रोडवेज इलाके में 40 साल से रह रहे पांच परिवारों के घरों को अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्त कर दिया। इससे प्रभावित लोग सड़क पर आ गए हैं और प्रशासन की नीतियों के खिलाफ रोष व्याप्त है।
व्यापार मंडल का विरोध:
उद्योग व्यापार मंडल रुद्रपुर ने इस मुद्दे को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। व्यापारियों का कहना है कि एक ओर वर्षों से कारोबार कर रहे दुकानदारों को उजाड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बिना किसी पारदर्शिता के दुकानें आवंटित की जा रही हैं।
कल हो सकता है विरोध प्रदर्शन:
मुख्यमंत्री कल गांधी पार्क में उधम सिंह नगर की जनता को संबोधित करेंगे, लेकिन प्रशासन को आशंका है कि प्रभावित परिवार और व्यापारी इस दौरान विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। यदि ऐसा हुआ, तो यह कार्यक्रम और राज्य सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या प्रशासन इस बढ़ते असंतोष को शांत करने में सफल हो पाएगा या नहीं।


प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/संपादक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड) के अनुसार यदि रुद्रपुर के वेंडिंग जोन में नियमों का उल्लंघन करके दुकानें बनाई गई हैं, तो कोई भी व्यक्ति उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सकता है। यदि उच्च न्यायालय यह पाता है कि ये दुकानें अवैध रूप से बनाई गई हैं, तो वह संबंधित अधिकारियों को इन दुकानों को हटाने या ध्वस्त करने का आदेश दे सकता है। उदाहरण के लिए, मेरठ में सेंट्रल मार्केट के अवैध निर्माण को सुप्रीम कोर्ट ने ध्वस्त करने का आदेश दिया था, जिसमें दुकानदारों को तीन महीने का समय दिया गया था । इसी प्रकार, दिल्ली हाईकोर्ट ने अवैध कब्जों के लिए नगर निगम और पुलिस को जिम्मेदार ठहराते हुए अधिकारियों को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था ।
यदि उच्च न्यायालय रुद्रपुर के वेंडिंग जोन में अवैध रूप से बनाई गई दुकानों के खिलाफ आदेश जारी करता है, तो संबंधित अधिकारियों को इन दुकानों को हटाना होगा, जिससे दुकानदारों को अपनी दुकानें खाली करनी पड़ सकती हैं। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि सभी निर्माण कार्य कानूनी नियमों और विनियमों के अनुसार ही किए जाएं, ताकि भविष्य में इस प्रकार की समस्याओं से बचा जा सके।
