उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विजय रथ को रोकने के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच ‘इंडिया’ गठबंधन के तहत चुनावी तालमेल की कवायद तेज हो गई है।

हालांकि, औपचारिक बातचीत से पहले ही दोनों दलों के बीच सीटों की हिस्सेदारी को लेकर बयानबाजी और सियासी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। एक ओर कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने 200 सीटों पर दावेदारी ठोकते हुए बराबर सम्मान और बराबर हिस्सेदारी की मांग उठाई है, तो दूसरी ओर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दो टूक संदेश दिया है कि गठबंधन में मुद्दा सीटों की संख्या का नहीं, बल्कि भाजपा को हराने और जीत हासिल करने का है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

‘बराबर सम्मान और बराबर हिस्सेदारी मिले, 150 नहीं 200 सीटों की बात की’ सीट शेयरिंग को लेकर उठ रहे सवालों पर कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि 150 सीटों की मांग की बात बेबुनियाद है, क्योंकि उन्होंने असल में 200 सीटों की बात रखी थी। गौतम ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस देश की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी पार्टी है और गठबंधन में दोनों प्रमुख दलों के बीच बराबरी का सम्मान और प्रतिनिधित्व होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि कोई भी दल बिना चुनाव लड़े जीत दर्ज नहीं कर सकता, इसलिए मजबूत चुनावी उपस्थिति के लिए पर्याप्त सीटें मिलना बेहद जरूरी है।

‘संविधान की तरह लचीले हैं हम, थोड़ा झुकना भी पड़े तो झुकेंगे’ राजेंद्र पाल गौतम ने गठबंधन धर्म का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस बातचीत के दौरान किसी अड़ियल रुख के बजाय लचीलापन दिखाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में ‘इंडिया’ ब्लॉक की धुरी सपा और कांग्रेस ही हैं और दोनों दल एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। अगर गठबंधन को मजबूत रखने और भाजपा को हराने के लिए थोड़ा झुकना भी पड़ा, तो कांग्रेस भारतीय संविधान की तरह लचीला रुख अपनाएगी। इसके साथ ही उन्होंने दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व से आग्रह किया कि सीटों के बंटवारे का फैसला अक्टूबर के भीतर ही अंतिम रूप से सुलझा लिया जाए, ताकि चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों को अपने-अपने क्षेत्रों में तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

अखिलेश यादव का पलटवार: ‘मकसद साफ हो तो हाथ में हाथ होता है’ कांग्रेस प्रभारी के 200 सीटों के दावे के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए गठबंधन की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। अखिलेश ने स्पष्ट किया कि गठबंधन में यह गौण है कि किस दल को कितनी या कौन सी सीटें मिलती हैं; सबसे बड़ा और अहम लक्ष्य गठबंधन की ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित करना है। उन्होंने लिखा कि जब मकसद साफ होता है तो हाथ में हाथ होता है और निगाह मंजिल पर हो तो सफर आसान हो जाता है। सपा प्रमुख ने दोहराया कि यह लड़ाई केवल दलों के विस्तार की नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और आरक्षण को भाजपा के हमलों से बचाने तथा देश में सामाजिक सौहार्द और खुशहाली बहाल करने की एक संयुक्त कोशिश है।

2022 विधानसभा चुनाव के सियासी समीकरण गठबंधन में सीटों की रस्साकशी के बीच 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजों पर भी राजनीतिक जानकारों की नजर है। वर्ष 2022 में भाजपा ने 403 सदस्यीय विधानसभा में 41.29 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 255 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। वहीं, अखिलेश यादव की अगुवाई में समाजवादी पार्टी 32.06 प्रतिशत मतों के साथ 111 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल बनी थी। दूसरी तरफ, कांग्रेस और बसपा का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था। कांग्रेस को महज 2.33 प्रतिशत वोट और 2 सीटें मिली थीं, जबकि बसपा 12.88 प्रतिशत वोट पाकर सिर्फ 1 सीट पर सिमट गई थी। इसी चुनावी आंकड़े के आधार पर सपा जहां कांग्रेस को सीमित सीटों पर समेटना चाहती है, वहीं कांग्रेस लोकसभा चुनाव के नतीजों और अपने राष्ट्रीय जनाधार के बूते बराबरी की हिस्सेदारी पर अड़ी है।