रुद्रपुर में पहली बार पर्वतीय शैली में सजेगा श्रीराम कथा का दिव्य मंच, 22 से 26 अक्टूबर तक होगा पांच दिवसीय रामलीला महोत्सव
पर्वतीय समाज समिति की ऐतिहासिक पहल, स्थानीय पर्वतीय महिला एवं पुरुष कलाकारों के अभिनय में जीवंत होंगे भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंग; भूरारानी के हंस विहार में परिवार सहित पहुंचने का आह्वान
रुद्रपुर, ऊधम सिंह नगर।
।। ॐ श्री गणेशाय नमः ।। जय श्री राम ।। श्री महावीराय नमः ।।
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
“संभु प्रसाद सुमति हिय हुलसी। रामचरित मानस कवि तुलसी।।“
भगवान श्रीराम की पावन कथा केवल धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक संस्कारों, सामाजिक समरसता, त्याग, सेवा, कर्तव्य और मर्यादा का ऐसा अमूल्य खजाना है, जिसकी प्रासंगिकता प्रत्येक युग में बनी रहती है। श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए, माता-पिता के प्रति सम्मान, परिवार के प्रति जिम्मेदारी, समाज के प्रति समर्पण और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस ही मनुष्य के चरित्र की वास्तविक पहचान है। इसी आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से रुद्रपुर में पर्वतीय समाज समिति (पंजीकृत) की ओर से पहली बार पर्वतीय शैली में पांच दिवसीय भव्य श्रीरामलीला मंचन का आयोजन किया जा रहा है।
22 अक्टूबर से 26 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाला यह प्रथम वर्ष का श्रीरामलीला मंचन, संवत् 2083 पर्वतीय समाज की सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक आस्था और सामूहिक एकजुटता का विशेष उत्सव बनने जा रहा है। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित विभिन्न प्रसंगों का मंचन स्थानीय पर्वतीय महिला एवं पुरुष कलाकार अपनी कला, अभिनय और पारंपरिक शैली के माध्यम से करेंगे। इससे एक ओर क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को नया मंच मिलेगा, वहीं दूसरी ओर नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, लोकसंस्कृति और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों से जुड़ने का अवसर प्राप्त होगा।
पर्वतीय समाज की सर्वोच्च संस्था की प्रेरणादायी पहल
पर्वतीय समाज समिति (पंजीकृत), रुद्रपुर को पर्वतीय समाज की सर्वोच्च संस्था के रूप में अपनी सांस्कृतिक, सामाजिक और सामुदायिक जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए जाना जाता है। समाज को एक सूत्र में बांधने, पारंपरिक मूल्यों को संरक्षित रखने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की भावना के साथ समिति ने श्रीरामलीला मंचन की यह महत्वपूर्ण पहल की है।
आज के बदलते सामाजिक परिवेश में जहां नई पीढ़ी का पारंपरिक सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़ाव बढ़ाना आवश्यक है, वहीं श्रीरामलीला जैसे आयोजन परिवारों, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों को एक साथ बैठकर धर्म, संस्कार और आदर्श जीवन की शिक्षा ग्रहण करने का अवसर देते हैं। रामलीला का मंच केवल कलाकारों के अभिनय का स्थान नहीं होता, बल्कि यह समाज को आत्मचिंतन करने और अपने जीवन में सद्गुणों को अपनाने की प्रेरणा देने वाला सांस्कृतिक विद्यालय भी है।
समिति की यह पहल रुद्रपुर में पर्वतीय शैली की रामलीला को नई पहचान देने के साथ-साथ स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
तुलसीदास की रामकथा में छिपा है आदर्श जीवन का संदेश
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी पी.सी. शर्मा रुद्रपुर में आयोजित पर्वतीय समाज समिति की श्रीरामलीला में लंकापति रावण की भूमिका निभा रहे हैं। 22 से 26 अक्टूबर तक भूरारानी के हंस विहार में होने वाले इस पांच दिवसीय मंचन में उनका अभिनय रामलीला के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगा।
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस भारतीय जनमानस की आस्था का आधार रहा है। इस महाकाव्य में भगवान श्रीराम के चरित्र के माध्यम से जीवन के प्रत्येक पक्ष को स्पर्श किया गया है। श्रीराम का वनवास त्याग और कर्तव्य की शिक्षा देता है, भरत मिलाप भाईचारे और निःस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है, माता सीता का चरित्र धैर्य और आत्मसम्मान की प्रेरणा देता है, जबकि हनुमान जी की भक्ति सेवा, समर्पण और अटूट विश्वास का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है।
रावण वध हमें अहंकार, अन्याय और अधर्म के अंत का संदेश देता है। श्रीराम का राज्याभिषेक उस आदर्श व्यवस्था की कल्पना प्रस्तुत करता है, जिसमें जनता का कल्याण, न्याय, समानता और मानवीय मूल्यों को सर्वोच्च स्थान प्राप्त हो।
इसीलिए रामलीला का मंचन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा भी है। जब बच्चे और युवा इन प्रसंगों को अपनी आंखों के सामने जीवंत होते देखते हैं, तो उनके मन में आदर्शों के प्रति स्वाभाविक आकर्षण पैदा होता है।
पांच दिनों में जीवंत होंगे भगवान श्रीराम के जीवन के प्रमुख प्रसंग
पर्वतीय समाज समिति की ओर से आयोजित पांच दिवसीय श्रीरामलीला महोत्सव में रामकथा के प्रमुख प्रसंगों को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा।
प्रथम दिवस — 22 अक्टूबर, गुरुवार
महोत्सव का शुभारंभ भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव से होगा। इसके बाद रामकथा आगे बढ़ते हुए सीता स्वयंवर तक पहुंचेगी। भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग श्रद्धा और उल्लास का वातावरण बनाएगा, जबकि सीता स्वयंवर में भगवान श्रीराम द्वारा शिवधनुष भंग करने का दृश्य दर्शकों को धर्म, शक्ति और मर्यादा के अद्भुत समन्वय से परिचित कराएगा।
द्वितीय दिवस — 23 अक्टूबर, शुक्रवार
दूसरे दिन राम वनवास से लेकर भरत मिलाप तक की कथा का मंचन होगा। यह प्रसंग त्याग, पारिवारिक प्रेम, भ्रातृभाव और कर्तव्यपालन की अनुपम मिसाल है। राजगद्दी का अवसर मिलने के बावजूद भगवान श्रीराम का पिता के वचन का पालन करते हुए वन जाना और भरत का राजसुख त्यागकर श्रीराम की चरणपादुका को शासन का प्रतीक मानना भारतीय संस्कृति के उच्चतम आदर्शों को प्रदर्शित करता है।
तृतीय दिवस — 24 अक्टूबर, शनिवार
तीसरे दिन सूर्पनखा की नासिका भंग से लेकर लंका दहन तक के प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। माता सीता के हरण के बाद श्रीराम और लक्ष्मण की खोज यात्रा, हनुमान जी की भक्ति, लंका में प्रवेश और अपनी अद्भुत शक्ति से लंका दहन करने का दृश्य रामलीला के सबसे रोमांचक प्रसंगों में शामिल रहेगा। यह दिन भक्त हनुमान की निष्ठा, बुद्धिमत्ता और प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट समर्पण का संदेश देगा।
चतुर्थ दिवस — 25 अक्टूबर, रविवार
चौथे दिन रामसेना के लंका में प्रवेश से लेकर लक्ष्मण शक्ति तक की कथा का मंचन होगा। वानर सेना का संगठन, समुद्र पार कर लंका पहुंचना, धर्म की स्थापना के लिए संघर्ष और युद्धभूमि में लक्ष्मण जी के मूर्छित होने का प्रसंग दर्शकों को भावुक करेगा। यह प्रसंग संकट की घड़ी में धैर्य, सहयोग, साहस और विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
पंचम दिवस — 26 अक्टूबर, सोमवार
महोत्सव के अंतिम दिन रावण वध, लंका विजय और भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का भव्य मंचन किया जाएगा। अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अहंकार पर सदाचार की विजय का संदेश इस दिन रामलीला के माध्यम से जन-जन तक पहुंचेगा। श्रीराम राज्याभिषेक का प्रसंग न्यायपूर्ण शासन, लोककल्याण और आदर्श समाज की स्थापना का प्रतीक बनेगा।
27 अक्टूबर, मंगलवार को पारायण एवं प्रसाद वितरण का कार्यक्रम निर्धारित है, जिसके माध्यम से श्रद्धालु रामकथा के इस आध्यात्मिक आयोजन से जुड़कर पुण्य और प्रसन्नता का अनुभव कर सकेंगे।
स्थानीय कलाकारों को मिलेगा प्रतिभा दिखाने का अवसर
इस रामलीला की विशेष पहचान स्थानीय पर्वतीय महिला एवं पुरुष कलाकारों की सहभागिता है। अपने ही क्षेत्र के कलाकारों को भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, हनुमान और रावण सहित विभिन्न पात्रों को जीवंत करते देखना दर्शकों के लिए विशेष अनुभव होगा।
पर्वतीय शैली में मंचन होने से आयोजन में स्थानीय सांस्कृतिक रंग और सामाजिक आत्मीयता का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। यह पहल इस विश्वास को मजबूत करती है कि समाज की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देना और उन्हें सामूहिक सहयोग प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है।
समिति के पदाधिकारियों और आयोजक मंडल की महत्वपूर्ण भूमिका
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए पर्वतीय समाज समिति की कार्यकारिणी और श्रीरामलीला आयोजक समिति के पदाधिकारी समर्पित भाव से जुटे हैं।
पर्वतीय समाज समिति की कार्यकारिणी में संरक्षक कल्याण सिंह परिहार, अध्यक्ष गिरीश चन्द्र जोशी, उपाध्यक्ष इंदर सिंह रौतेला, महामंत्री हीरा बल्लभ पाण्डेय, कोषाध्यक्ष संजय अधिकारी और प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी संभाल रहे मनोज पालीवाल शामिल हैं। समिति से जुड़े निर्देशक कल्याण जी, पी.सी. शर्मा और लीलाधर पाण्डेय भी आयोजन की तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
श्रीरामलीला आयोजक समिति के अध्यक्ष रमेश चन्द्र ओली, उपाध्यक्ष किशन सिंह बिष्ट, सचिव रमेश चन्द्र जोशी, उपसचिव सुरेन्द्र कपकोटी, कोषाध्यक्ष हरी सिंह अधिकारी और स्वागत अध्यक्ष शिवपाल सिंह भाकुनी सहित आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों का उद्देश्य इस प्रथम वर्ष के मंचन को सफल, व्यवस्थित और यादगार बनाना है।
समिति की ओर से सभी श्रद्धालुओं, सामाजिक संगठनों, धर्मप्रेमियों और क्षेत्रवासियों से इस आयोजन में सहभागिता कर पर्वतीय समाज की सांस्कृतिक एकजुटता को मजबूत करने की अपील की गई है।
कहां पहुंचे श्रद्धालु?
पांच दिवसीय श्रीरामलीला मंचन का आयोजन हंस विहार, फेज-1, गली नंबर-2, भूरारानी, रुद्रपुर, जिला ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड में किया जाएगा। कार्यक्रम 22 अक्टूबर से 26 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन निर्धारित रामकथा प्रसंगों के अनुसार आयोजित होगा।
आइए, रामलीला में पहुंचकर संस्कारों की इस ज्योति को प्रज्वलित करें
पर्वतीय समाज समिति की ओर से समस्त धर्मप्रेमी जनता से विशेष आग्रह है कि वे अपने परिवार, बच्चों और मित्रों के साथ श्रीरामलीला मंचन में अवश्य पहुंचें। बच्चों को भगवान श्रीराम के आदर्शों से परिचित कराएं, युवाओं को भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा से जोड़ें और समाज में प्रेम, भाईचारे, सद्भाव तथा सेवा की भावना को मजबूत बनाएं।
यह आयोजन केवल पांच दिनों का सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी विरासत सौंपने का एक सार्थक प्रयास है। जब पूरा परिवार एक साथ बैठकर रामकथा का श्रवण और दर्शन करता है, तो धार्मिक आस्था के साथ-साथ आपसी रिश्तों में भी आत्मीयता बढ़ती है।
आइए, हम सब मिलकर इस प्रथम वर्ष के श्रीरामलीला मंचन को ऐतिहासिक बनाएं। भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें और पर्वतीय समाज की इस सांस्कृतिक पहल को भरपूर सहयोग प्रदान करें।
जय श्रीराम! जय बजरंगबली!
आयोजक: पर्वतीय समाज समिति (पंजीकृत) एवं श्रीरामलीला आयोजक समिति, रुद्रपुर।
