सरकारी जमीनों की लीज पर ठुकराल का बड़ा सवाल, बोले—जनता की संपत्ति का हिसाब दे सरकार7000 बीघा सरकारी जमीन से जॉर्ज एवरेस्ट तक, ठुकराल ने सरकार से मांगा जवाब?सरकारी संपत्तियों की लीज पर कांग्रेस का हमला, ठुकराल बोले—पूरी प्रक्रिया हो सार्वजनिक!जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट से 25 निरीक्षण भवनों तक, सरकारी संपत्तियों पर उठे सवाल?सरकारी जमीन निजी हाथों में देने का आरोप, ठुकराल ने सरकार से मांगी पूरी जानकारी

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सरकारी जमीन और संपत्तियों को लीज पर देने के मुद्दे पर ठुकराल ने सरकार को घेरा
रुद्रपुर। प्रदेश सरकार पर सरकारी विभागों की बेशकीमती जमीन और संपत्तियों को लीज तथा पीपीपी मोड के माध्यम से निजी संस्थाओं को सौंपने का आरोप लगाते हुए पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता राजकुमार ठुकराल ने भाजपा सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की बहुमूल्य सरकारी संपत्तियां जनता की संपत्ति हैं और इनके उपयोग, लीज, संचालन तथा हस्तांतरण से जुड़े प्रत्येक निर्णय में पारदर्शिता आवश्यक है।
मीडिया से बातचीत में ठुकराल ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की बहुमूल्य सरकारी भूमि को विभिन्न माध्यमों से निजी हाथों में देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड के गठन को लेकर भी सवाल उठाए। ठुकराल का आरोप है कि बोर्ड के माध्यम से राज्य की महत्वपूर्ण जमीनों और संपत्तियों को बाहरी लोगों तथा निजी संस्थाओं को उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसी सभी योजनाओं और उनके पीछे की प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक की जाए।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट को लेकर उठाए सवाल
ठुकराल ने मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट का मामला प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 142 एकड़ सरकारी भूमि और वहां विकसित पर्यटन सुविधाओं को राजस एयरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड को 15 वर्ष के लिए लगभग एक करोड़ रुपये सालाना की दर से संचालन के लिए दिया गया।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट के संचालन के लिए उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड की निविदा प्रक्रिया में राजस एयरो स्पोर्ट्स को 15 वर्ष का संचालन अनुबंध मिला और वार्षिक शुल्क करीब एक करोड़ रुपये निर्धारित किया गया। इस व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। सरकार की ओर से आवंटन प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुरूप बताया गया है।
ठुकराल ने कहा कि जॉर्ज एवरेस्ट की जमीन और वहां विकसित पर्यटन सुविधाओं का वास्तविक मूल्य काफी अधिक है। ऐसे में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इतनी बड़ी सरकारी संपत्ति को निर्धारित अवधि के लिए दिए जाने से राज्य को कुल कितना आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने परियोजना पर पहले किए गए सरकारी खर्च का भी उल्लेख किया।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक जॉर्ज एवरेस्ट में पर्यटन सुविधाओं के विकास पर एशियाई विकास बैंक के ऋण से करीब 23 से 23.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। ठुकराल ने सवाल किया कि जब पर्यटन सुविधाओं के विकास में सार्वजनिक धन लगाया गया है तो उसके बाद संचालन अधिकार देने की आर्थिक शर्तों को जनता के सामने पूरी तरह रखा जाना चाहिए।
निविदा प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग
पूर्व विधायक ने जॉर्ज एवरेस्ट परियोजना की निविदा प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि निविदा में कितनी संस्थाओं ने भाग लिया, चयन के लिए क्या मानक तय किए गए और चयनित संस्था को किन शर्तों पर संचालन अधिकार दिए गए।
ठुकराल ने कांग्रेस की ओर से निविदा प्रक्रिया में शामिल कंपनियों के बीच संभावित संबंधों को लेकर उठाए गए सवालों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार को दस्तावेज सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। भाजपा की ओर से आवंटन प्रक्रिया को कानूनी और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप बताया गया है।
25 निरीक्षण भवनों समेत अन्य संपत्तियों का मुद्दा
ठुकराल ने दावा किया कि सरकार विभिन्न विभागों की अन्य बेशकीमती संपत्तियों को भी पीपीपी मोड अथवा लीज पर देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के करीब 25 निरीक्षण भवनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन संपत्तियों को लीज पर देने का सैद्धांतिक निर्णय लिए जाने की जानकारी सामने आई है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित सरकारी भवन और भूमि भविष्य में सरकार के लिए महत्वपूर्ण सार्वजनिक संसाधन हैं। ऐसे में इन्हें निजी संस्थाओं को देने से पहले उनकी बाजार कीमत, लीज अवधि, शर्तें, रखरखाव की जिम्मेदारी और सरकार को मिलने वाले राजस्व का विवरण सार्वजनिक होना चाहिए।
7000 बीघा सरकारी जमीन का भी उठाया मुद्दा
ठुकराल ने प्रदेश में करीब 7000 बीघा सरकारी जमीन को लीज पर दिए जाने की प्रक्रिया का आरोप लगाते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी भूमि से जुड़ा कोई भी निर्णय व्यापक सार्वजनिक चर्चा और पारदर्शी प्रक्रिया के साथ होना चाहिए।
उन्होंने रानीखेत, अल्मोड़ा, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, गुप्तकाशी और फाटा समेत विभिन्न क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन स्थानों की सरकारी जमीन और संपत्तियों को लेकर सामने आ रही सूचनाओं पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
ठुकराल ने पटवाडांगर, नगवा चकरोता, धनोल्टी, मागरा, माजरी, सलीमपुर, पाटकोट, मार्चुला, रानीबाग, विकासनगर, रामगढ़ और ऋषिकेश सहित कई स्थानों की सरकारी भूमि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज, प्रस्ताव, लीज की शर्तें और सरकारी निर्णय सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
सरकारी संपत्तियों को जनता की संपत्ति बताया
पूर्व विधायक ने कहा कि सरकारी जमीन और भवन किसी एक सरकार या राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं हैं। ये प्रदेश की जनता की संपत्तियां हैं। सरकारें बदलती रहती हैं, ऐसे में सार्वजनिक संपत्तियों के संबंध में लिए गए निर्णयों का प्रभाव लंबे समय तक रहता है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी सरकारी संपत्ति को लीज पर दिया जाता है तो उसकी अवधि, आर्थिक शर्तें, उपयोग का उद्देश्य, चयन प्रक्रिया और भविष्य में संपत्ति की स्थिति से जुड़े सभी बिंदुओं की जानकारी जनता के सामने होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि लीज अथवा पीपीपी व्यवस्था से राज्य को अल्पकाल और दीर्घकाल में कितना राजस्व प्राप्त होगा।
भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी सरकार को घेरा
ठुकराल ने भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सरकारी संपत्तियों से जुड़े मामलों में स्पष्ट जवाब देने की मांग की। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व में भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की थी।
ठुकराल ने सवाल उठाया कि वर्तमान दौर में भाजपा नेताओं और सरकार से जुड़े लोगों पर आरोप लगने की स्थिति में नैतिक जिम्मेदारी को लेकर क्या मानक निर्धारित हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच और तथ्यों को सार्वजनिक करना लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण है।
प्रदेशभर में प्रेस वार्ताओं का कार्यक्रम
कांग्रेस जिलाध्यक्ष हिमांशु गाबा ने बताया कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के निर्देश पर प्रदेशभर में सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार तथा सरकारी जमीन और संपत्तियों से जुड़े मामलों को लेकर प्रेस वार्ताएं आयोजित की जा रही हैं।
गाबा ने कहा कि कांग्रेस इन मुद्दों को जनता के सामने रखने के साथ सरकार से जवाब भी मांग रही है। उनका कहना है कि सरकारी संपत्तियों के संबंध में लिए जा रहे फैसलों की जानकारी सार्वजनिक होने से जनता के बीच स्थिति स्पष्ट होगी।
प्रेस वार्ता के दौरान महानगर अध्यक्ष ममता रानी, संदीप चीमा, डॉ. अजय कुमार सिंह, गोपाल भसीन, ज्योति टम्टा, सरोज शर्मा, बाबू खान, विजय शंकर शुक्ला, भूपेश सोनी, ममता हालदार, सतीश कुमार, केरू मंडल, योगेश चौहान और बाबू विश्वकर्मा सहित कांग्रेस के कई कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी मौजूद रहे।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकारी जमीन और संपत्तियों से जुड़े मामलों को आगे भी सार्वजनिक मंचों पर उठाया जाएगा। वहीं सरकार से इन मामलों में दस्तावेजों और आर्थिक शर्तों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई।


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