रुद्रपुर और किच्छा (ऊधमसिंह नगर) के मुख्य भूमि विवाद
रुद्रपुर में प्रस्तावित अंतरराज्यीय बस टर्मिनस (ISBT) के नाम पर भू-माफियाओं द्वारा ₹500 करोड़ की सरकारी भूमि कब्जाने और उस पर निजी व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बनाने का मुद्दा इस समय उत्तराखंड में भारी चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष हिमांशु गाबा और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि शिवनगर के सामने की इस बेशकीमती जमीन को नियमों को ताक पर रखकर भू-माफियाओं को सौंप दिया गया। विपक्ष का दावा है कि विकास और जनसुविधाओं के नाम पर जनता की जमीनों को रसूखदारों को फायदा पहुंचाने के लिए लूटा जा रहा है, जिससे स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है।
- खुरपिया फार्म (किच्छा) घोटाला: कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि किच्छा के प्रसिद्ध खुरपिया फार्म की सरकारी लैंड बैंक (जो कि स्मार्ट सिटी और बड़े उद्योगों के लिए आरक्षित थी) को निजी रियल एस्टेट डेवलपर्स और भू-माफियाओं के हवाले कर वहां निजी कॉलोनियां काटने की साठगांठ की जा रही है।
पंतनगर सिडकुल (SIDCUL) भूमि विवाद: सिडकुल के औद्योगिक क्षेत्र की भूमि (जो केवल फैक्ट्री और रोजगार सृजन के लिए है) के एक बड़े हिस्से पर नियमों का उल्लंघन कर अवैध आवासीय प्लाटिंग और कॉलोनियां विकसित करने का आरोप लगाया गया।
पूरे उत्तराखंड के बड़े भूमि और भ्रष्टाचार घोटाले (जिनका प्रेस वार्ता में उल्लेख किया गया)
7,000 बीघा सरकारी लैंड बैंक घोटाला: कांग्रेस का सबसे बड़ा आरोप है कि धामी सरकार विभिन्न सरकारी विभागों की लगभग 7,000 बीघा बेशकीमती जमीन को 90 साल की लंबी अवधि के लिए बाहरी कॉरपोरेट घरानों और निजी निवेशकों को लीज पर सौंपने की तैयारी कर रही है
हरिद्वार का ₹54 करोड़ का जमीन घोटाला: हरिद्वार नगर निगम द्वारा एक कूड़े के ढेर (डंपिंग यार्ड) के पास स्थित ₹14 करोड़ की मूल्यहीन कृषि भूमि को भारी भ्रष्टाचार कर ₹54 करोड़ में खरीदा गयाl इस मामले में चौतरफा घिरने के बाद धामी सरकार को हरिद्वार के तत्कालीन जिला अधिकारी (DM), एसडीएम (SDM) और नगर आयुक्त समेत 12 बड़े अधिकारियों को सस्पेंड करना पड़ा था
अस्पताल भूमि आवंटन में धांधली (हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर घोटाला): कांग्रेस नेताओं (मनोज रावत व अन्य Garhwal Post) ने खुलासा किया कि स्वास्थ्य विभाग से बिना परामर्श किए एक बड़े अस्पताल प्रोजेक्ट के लिए आरक्षित 23,137 वर्ग मीटर सरकारी भूमि को नियमों का उल्लंघन कर एक ऐसी निजी कंपनी को अंतरिम तौर पर अलॉट कर दिया गया, जो अयोग्य और तकनीकी रूप से ब्लैकलिस्टेड कंपनियों से जुड़ी है
सीलिंग और नजूल भूमि घोटाला: rudrpur,देहरादून, बाजपुर और काशीपुर के मैदानी इलाकों में सीलिंग (अतिरिक्त सरकारी भूमि) और नजूल की जमीनों पर भू-माफियाओं द्वारा अवैध कब्जे कर बड़े-बड़े रिजॉर्ट्स और निजी फार्महाउस बना लिए गए हैं, जिस पर सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।
