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फूलदेई पर्व पर पंडित त्रिलोचन पनेरु की ज्योतिषीय व्याख्या, रामदत्त पंचांग का हवालाफूलदेई : उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, प्रकृति और मासूमियत का अनोखा उत्सव

उत्तराखंड की संस्कृति प्रकृति के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। यहाँ के पर्व केवल…

14 March 2026: 14 मार्च की सुबह ब्रह्मांड में एक बड़े बदलाव की गवाह बन रही है. चंद्रदेव का मकर राशि में प्रवेश हमें आलस्य त्यागकर कर्तव्यों की ओर बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है.

कुंभ राशि में सूर्य, मंगल, राहु और वक्री बुध की मौजूदगी सामाजिक और निजी जीवन…

नजूल की रजिस्ट्री का रास्ता: विधायक शिव अरोड़ा की पहल?नजूल की जमीन से सम्मान तक: रुद्रपुर के गरीबों को मालिकाना हक दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल,

रुद्रपुर शहर का इतिहास जितना विकास की कहानियों से जुड़ा है, उतना ही वह नजूल…

महिला आयोग आपके द्वार अभियान के तहत उधम सिंह नगर में जनसुनवाई, अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने सुनीं 12 शिकायतें

रुद्रपुर, 13 मार्च।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उत्तराखंड राज्य महिला आयोग द्वारा संचालित ‘महिला…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में पैदा हुए गंभीर हालात और मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।

प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान क्षेत्र में तेजी से बढ़ते तनाव, आम नागरिकों की मौत और सिटीजन इंफ्रास्ट्रक्चर को…

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ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने गुरुवार को अपने पहले बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि होरमुज की खाड़ी बंद रहेगी। इसका अर्थ है कि किसी भी देश के जहाज को इस खाड़ी से गुजरने की अनुमति नहीं होगी।

उन्होंने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे मध्य पूर्व में अपने सभी सैन्य ठिकानों को तुरंत बंद करना…

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गैस की किल्लत: हक़ीक़त, अफवाह या प्रशासनिक विफलता?

संपादकीय,मानव-वन्यजीव संघर्ष, आपदाएँ और पलायन : क्या केवल मुआवजा ही समाधान है?

Chaitra Navratri 2026 Lucky Zodiac Signs: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व मां दुर्गा की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त मां के अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं और घरों में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

मेष राशि नए अवसर दस्तक दे सकते हैं। सीनियर्स के साथ विचारों का आदान-प्रदान फायदेमंद रहेगा। पार्टनर के साथ कुछ अनबन हो सकती है, धैर्य रखें और बातों को तूल न दें।आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन अनावश्यक खर्चों से बचें।

फूलदेई पर्व पर पंडित त्रिलोचन पनेरु की ज्योतिषीय व्याख्या, रामदत्त पंचांग का हवालाफूलदेई : उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, प्रकृति और मासूमियत का अनोखा उत्सव

उत्तराखंड की संस्कृति प्रकृति के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। यहाँ के पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज, प्रकृति और मानवीय भावनाओं के सुंदर संगम का प्रतीक होते…

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14 March 2026: 14 मार्च की सुबह ब्रह्मांड में एक बड़े बदलाव की गवाह बन रही है. चंद्रदेव का मकर राशि में प्रवेश हमें आलस्य त्यागकर कर्तव्यों की ओर बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है.

कुंभ राशि में सूर्य, मंगल, राहु और वक्री बुध की मौजूदगी सामाजिक और निजी जीवन में कुछ उथल-पुथल या बड़े बदलाव ला सकती है. साथ ही, मीन राशि में शुक्र…

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नजूल की रजिस्ट्री का रास्ता: विधायक शिव अरोड़ा की पहल?नजूल की जमीन से सम्मान तक: रुद्रपुर के गरीबों को मालिकाना हक दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल,

रुद्रपुर शहर का इतिहास जितना विकास की कहानियों से जुड़ा है, उतना ही वह नजूल भूमि पर बसे हजारों परिवारों के संघर्ष से भी जुड़ा हुआ है। दशकों से रुद्रपुर…

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महिला आयोग आपके द्वार अभियान के तहत उधम सिंह नगर में जनसुनवाई, अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने सुनीं 12 शिकायतें

रुद्रपुर, 13 मार्च।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उत्तराखंड राज्य महिला आयोग द्वारा संचालित ‘महिला आयोग आपके द्वार’ अभियान के अंतर्गत जनपद उधम सिंह नगर में महिला जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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रुद्रपुर खेल सचिव अमित सिन्हा ने बृहस्पतिवार को विशेषज्ञों की टीम के साथ वेलोड्रम का स्थलीय निरीक्षण किया। खेल सचिव ने कहा कि वेलोड्रम अंतरराष्ट्रीय स्तर का ही बनेगा। इसके लिए जरूरी तकनीकी बदलाव किए जाएंगे।

रुद्रपुर में निर्माणाधीन खेल अवस्थापना सुविधाओं का निरीक्षण करने पहुंचे सिन्हा ने निर्माण कार्यों की प्रगति को संतोषजनक बताया। वेलोड्रम के निर्माण में आ रही कमियों पर सिन्हा ने बताया […]

रुद्रपुर में शक्ति वन्दन अभियान के अंतर्गत एनजीओ व स्वयं सहायता समहू की महिलाओं की कार्यशाला का आयोजन

रुद्रपुर। आज नगर निगम रुद्रपुर में शक्ति वन्दन अभियान के अंतर्गत एनजीओ व स्वयं सहायता समहू की महिलाओं की कार्यशाला का आयोजन हुआ, जिसमें भाजपा के प्रदेश महामंत्री राजेश बिष्ट […]

   बसंत पंचमी 2024वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणी विनायकौ॥सभी सनायनीय पाठकों, धर्मावलंबियों को सादर प्रणाम। अवगत कराना चाहूंगी दिनांक 14 फरवरी 2024 दिन बुधवार को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा।प्रतिवर्ष माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष बसंत पंचमी बुधवार को पड़ने से विद्यार्थी वर्ग को विशेष लाभ प्रदान करेगी। साथ ही बसंत पंचमी पर्व पर शुभ योग, गजकेशरी योग, लक्ष्मी नारायण योग तथा रोहिणी नक्षत्र पड़ने से इसका महत्व और भी बढ़ जाएगा। इस योग में शिक्षा तथा व्यापार से संबंधित कोई भी कार्य एवं शिशुओं के विद्यारंभ संस्कार हेतु अति शुभ दिन रहेगा।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां सरस्वती की उत्पत्ति हुई थी इसलिए बसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की पूजा अर्चना का विधान है। देवी सरस्वती को ज्ञान की देवी माना जाता है और बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा से ज्ञान की वृद्धि होती है। साथ ही बसंत पंचमी से बसंत ऋतु का आगमन होता है।बसंत पंचमी अबूझ मुहूर्तधार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी पर्व पर अबूझ मुहूर्त होता है। जिसमें सभी शुभ कार्य किए जा सकते हैं।मुहूर्तपंचमी तिथि प्रारंभ 13 फरवरी 2024 को अपराहन 2:44 से 14 फरवरी 2024 गुरुवार को प्रातः 12:11 तक।पूजा हेतु शुभ मुहूर्त प्रातः 7 बजे से 12:35 तक।

इस साल बसंत पंचमी का त्योहार 14 फरवरी दिन बुधवार यानी कल मनाया जाएगा। लेकिन इसी के साथ ही अगर बसंत पंचमी के दिन कुछ उपायों को किया जाए तो […]

उत्तराखंड के हलद्वानी में भड़की हिंसा के चार दिन बाद, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई और 60 लोग घायल हो गए, इस बीच 300 से अधिक मुस्लिम परिवार बनभूलपुरा क्षेत्र से फरार हो गए हैं

लगाए गए कर्फ्यू के बीच परिवहन बाधाओं के कारण, कई परिवारों को अपने सामान के साथ पैदल यात्रा करते देखा गया। 8 फरवरी को बनभूलपुरा में अतिक्रमण विरोधी अभियान के […]

टनकपुर। राज्य आंदोलन में सक्रिय रहीं तीलू रौतेली पुरस्कार विजेता व सामाजिक कार्यकर्ता रीता गहतोड़ी ने कर्मचारी कालौनी बाल्मीकि बस्ती में लोगों को शंख ध्वनि का अभ्यास कराया। साथ ही उन्हें शंख बजाने के फायदे बताए गए। बताया कि शंख बजाने से फेफड़े व हृदय मजबूत होगा। कहा कि शंख बजाने का अभ्यास करते रहना चाहिए। इस दौरान सफाई यूनियन के अध्यक्ष कमलेश वाल्मीकि, वाल्मीकि समाज के युवा अध्यक्ष उमेश वाल्मीकि, अभय वाल्मीकि, निशांत, राजेंदर विश्राम, सनी, अभिषेक, अमन, सुधीर, करन, संदीप, राज, आदर्श, राजेश, संजय, सीमा देवी, कुसमा देवी, गीता देवी, शकुंतला देवी आदि मौजूद रहीं। समाजसेवी रीता गहतोड़ी ने सभी को अपने अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही नशे से दूर रहने का संकल्प दिलाया। मालूम हो कि रीता गहतोड़ी पिछले कई वर्षों से वाल्मीकि समाज के हितों के लिए कार्य कर रही हैं।

टनकपुर। राज्य आंदोलन में सक्रिय रहीं तीलू रौतेली पुरस्कार विजेता व सामाजिक कार्यकर्ता रीता गहतोड़ी ने कर्मचारी कालौनी बाल्मीकि बस्ती में लोगों को शंख ध्वनि का अभ्यास कराया। साथ ही […]

उत्तराखंड के हलद्वानी में हाल ही में अचानक दंगा हो गया, जिसमें 5 लोगों की जान चली गई. बनभूलपुरा में अवैध रूप से बने मदरसे और मस्जिद को हटाने को लेकर हिंसा हुई थी.

अब बड़ा सवाल यह उठता है कि जिस जमीन पर अवैध मदरसा और मस्जिद स्थित है वह नजूल भूमि है. आइए जानते हैं क्या है नजूल भूमि। नजूल भूमि क्या […]

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से रविवार को कांग्रेस की राज्य इकाई के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की और हल्द्वानी हिंसा मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से बनभूलपुरा मामले में चर्चा की।

प्रतिनिधिमण्डल में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधायक प्रीतम सिंह, भुवन कापड़ी, फुरकान अहमद, आदेश चौहान, ममता राकेश एवं सुमित हृदयेश भी शामिल थे। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि राज्य […]

बनभूलपुरा हिंसा में नैनीताल पुलिस ने बड़ी कार्यवाही करते हुए 25 उपद्रवी गिरफ्तार किए हैं। आरोपियों के कब्जे से 07 तमन्चे, 54 जिन्दा कारतूस एवं थाने से लूटे गये 99 जिन्दा कारतूस भी बरामद किए गए हैं। बनभूलपुरा क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के दौरान उपद्रवियों द्वारा पुलिस, प्रशासन, नगर निगम व मीडिया कर्मियों पर पथराव, आगजनी व गोलीबारी की हिंसक घटना के सम्बन्ध में थाना-बनभूलपुरा में 03 अभियोग दर्ज किये गये हैं।हिंसक घटना में संलिप्त उपद्रवियों की गिरफ्तारी के लिये प्रहलाद नारायण मीणा एस0एस0पी0 नैनीताल द्वारा हरबन्स सिंह, एस.पी. सिटी हल्द्वानी के पर्यवेक्षण में वृहद स्तर पर विभिन्न टीमों का गठन किया गया है। पुलिस टीमों द्वारा घटनास्थलों के पास के सीसीटीवी कैमरों के अवलोकन एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटनास्थलों के आसपास स्थित घरों में दबिश दी गयी और मुकदमों में नामजद एवं प्रकाश में आये अभियुक्तों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से अवैध हथियार व कारतूस बरामद किये। पकड़े गए आरोपियों में जुनैद पुत्र असलम निवासी लाईन नं0-17 बनभूलपुरा के कब्जे से 1 तमन्चा, 12 कारतूस जिन्दा बरामद किए गए। मो० निजाम पुत्र असलम निवासी इन्द्रानगर के कब्जे से 1 तमन्चा, 08 कारतूस जिन्दा बरामद किये गये, महबूब उर्फ माकू पुत्र मुख्तार अहमद निवासी गफूर बस्ती बनभूलपुरा के कब्जे से 1 तमन्चा, 06 कारतूस जिन्दा, शहजाद उर्फ कनकडा पुत्र दिलशाद निवासी इन्द्रानगर के कब्जे से 1 तमन्चा, 10 कारतूस जिन्दा, अब्दुल माजिद पुत्र अब्दुल खालिद निवासी नई बस्ती ठोकर पुराने चील घर के पास, शाजिद पुत्र अब्दुल खालिद निवासी उपरोक्त उम्र 49 वर्ष, मो० नईम पुत्र मो० फईम निवासी उपरोक्त उम्र 25 वर्ष, शाहनवाज पुत्र जुम्मा निवासी नैनीताल पब्लिक स्कूल के सामने छोटी रोड बनभूलपुरा उम्र 28 वर्ष के कब्जे से 1 तमन्चा, 07 कारतूस जिन्दा, शकीर अहमद पुत्र शब्बीर अहमद निवासी मोहम्मदी चैक के पास, पप्पू का बगीचा, सकलानी वाली गली उम्र 38 वर्ष, इशरार अली पुत्र अजगर अली निवासी उपरोक्त उम्र 48 वर्ष, शानू उर्फ राजा पुत्र मो० याकूब निवासी गफूर बस्ती बनभूलपुरा, रईस उर्फ बिट्टू पुत्र अनीस अहमद निवासी स्प्रिंग फील्ड स्कूल के पास किदवई नगर बनभूलपुरा, इसके अतिरिक्त अभियुक्तगणों के कब्जे से मुकदमा उपरोक्त में थाना बनभूलपुरा से उपद्रवियों द्वारा लूटे गये कुल 99 कारतूस (7.62 उउ के 67 एवं 9 उउ के 32 कारतूस) बरामद किये गये हैं।

तांडव हिंसा’ के बाद पटरी पर लौटी जिंदगी बाजार खुले! बनभूलपुरा क्षेत्र में कर्फ्यू कर्फ्यू जारी@ सड़क और रेल यातायात हुआ सामान्य बनभूलपुरा क्षेत्र में कर्फ्यू जारी कर्फ्यू ग्रस्त क्षेत्र […]

उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद द्वारा देवभूमि पलायन एवं बेरोजगारी उन्मूलन समिति।विषय उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद द्वारा उत्तराखंड सरकार का धन्यवाद प्रस्ताव

आज दिनांक 11 फरवरी 2024 को नगर निगम रुद्रपुर उधम सिंह नगर सभागार में उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद के बैनर तले राज्य आंदोलनकारियो का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आहूत किया […]

देहरादून।हल्द्वानी हिंसा मामले की होगी जांचसरकार ने मजिस्ट्रेट जाँच कराने का लिया फैसला “आदेश जारी”

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने दिए जाँच के आदेश”कमिश्नर कुमाऊँ दीपक रावत को। बनाया गया जाँच अधिकारी। 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के दिए गए निर्देश।