Breaking News

उत्तराखण्ड

View All

देश

View All

पंतनगर में 119वां अखिल भारतीय किसान मेला शुरू, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया उद्घाटन, प्रगतिशील किसानों को किया सम्मानित

रुद्रपुर/पंतनगर, 14 मार्च 2026।Pushkar Singh Dhami ने Govind Ballabh Pant University of Agriculture and Technology,…

डिजिटल इंडिया की हकीकत—रसोई गैस संकट में लौटते कदम 80 के दशक की ओर”

संपादकीय,उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले, विशेषकर रुद्रपुर में इन दिनों रसोई गैस को लेकर…

रुद्रपुर में 16 मार्च को शिवसेना का पैदल मार्च: UGC नियम और जातिगत आरक्षण पर उठे सवालसंपादकीय / विशेष रिपोर्ट – अवतार सिंह बिष्टरुद्रपुर।

रुद्रपुर।उधम सिंह नगर में एक बार फिर सामाजिक और शैक्षिक नीतियों को लेकर बहस तेज…

फूलदेई पर्व पर पंडित त्रिलोचन पनेरु की ज्योतिषीय व्याख्या, रामदत्त पंचांग का हवालाफूलदेई : उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, प्रकृति और मासूमियत का अनोखा उत्सव

उत्तराखंड की संस्कृति प्रकृति के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। यहाँ के पर्व केवल…

दुनिया

View All

Express News

View All

डिजिटल इंडिया की हकीकत: गैस बुकिंग के लिए फिर लाइन में खड़ी जनता”गैस का डर, साइबर ठगों का खेल — जब व्यवस्था की कमजोरी बन जाती है जनता की मुसीबत”

“गैस का डर, साइबर ठगों का खेल — जब व्यवस्था की कमजोरी बन जाती है जनता की मुसीबत”संपादकीय — अवतार…

Read More

जनसेवा का पर्याय बने संजय ठुकराल—रुद्रपुर के “108” को जन्मदिन की शुभकामनाएं

रुद्रपुर  जब भी सामाजिक सरोकारों, जनसेवा और मानवीय संवेदनाओं की चर्चा होती है, तो एक नाम स्वतः ही लोगों की…

Read More

अशोक गुलाटी बने पत्रकार प्रेस महासंघ के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में पैदा हुए गंभीर हालात और मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने गुरुवार को अपने पहले बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि होरमुज की खाड़ी बंद रहेगी। इसका अर्थ है कि किसी भी देश के जहाज को इस खाड़ी से गुजरने की अनुमति नहीं होगी।

गैस की किल्लत: हक़ीक़त, अफवाह या प्रशासनिक विफलता?

पंतनगर में 119वां अखिल भारतीय किसान मेला शुरू, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया उद्घाटन, प्रगतिशील किसानों को किया सम्मानित

रुद्रपुर/पंतनगर, 14 मार्च 2026।Pushkar Singh Dhami ने Govind Ballabh Pant University of Agriculture and Technology, पंतनगर में आयोजित 119वें अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का फीता काटकर…

Read More

डिजिटल इंडिया की हकीकत—रसोई गैस संकट में लौटते कदम 80 के दशक की ओर”

संपादकीय,उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले, विशेषकर रुद्रपुर में इन दिनों रसोई गैस को लेकर जो हालात दिखाई दे रहे हैं, वह केवल एक आपूर्ति संकट नहीं बल्कि व्यवस्था की…

Read More

रुद्रपुर में 16 मार्च को शिवसेना का पैदल मार्च: UGC नियम और जातिगत आरक्षण पर उठे सवालसंपादकीय / विशेष रिपोर्ट – अवतार सिंह बिष्टरुद्रपुर।

रुद्रपुर।उधम सिंह नगर में एक बार फिर सामाजिक और शैक्षिक नीतियों को लेकर बहस तेज होने जा रही है। शिवसेना (उधम सिंह नगर) ने 16 मार्च, सोमवार को सुबह 10…

Read More

फूलदेई पर्व पर पंडित त्रिलोचन पनेरु की ज्योतिषीय व्याख्या, रामदत्त पंचांग का हवालाफूलदेई : उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, प्रकृति और मासूमियत का अनोखा उत्सव

उत्तराखंड की संस्कृति प्रकृति के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। यहाँ के पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज, प्रकृति और मानवीय भावनाओं के सुंदर संगम का प्रतीक होते…

Read More

उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

Read More

हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

Read More

ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

Read More

कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

Read More

अयोध्या में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर भारत के प्रथम कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर में उत्तरांचल संगम ने भव्य कलश यात्रा,श्री राम दरबार झांकी एवं सुंदरकांड का आयोजन

भव्य राम दरबार झांकी से हर्ष एवं उल्लास से भावविभोर हुआ पंतनगर विश्वविद्यालय अयोध्या में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर भारत के प्रथम कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर में […]

छठ पूजा समिति के द्वारा विशाल दीप प्रचलित, अयोध्या में श्री राम, मंदिर निर्माण के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड पत्रकार यूनियन की घुसपैठ क्या है पूरा मामला आप भी पढ़िए

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स से अवतार सिंह बिष्ट की यह रिपोर्ट।उत्तराखंड पत्रकार यूनियन प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जिला अध्यक्ष के द्वारा। रुद्रपुर धोबी घाट में आयोजित छठ पूजा समिति के द्वारा अयोध्या […]

सबके राम और सबमें राम, इन शब्दों के साथ 22 जनवरी, 2024 की तारीख स्वर्णिम अक्षरों के साथ इतिहास के पन्नों में हमेशा-हमेशा के लिए एक नए अध्याय के साथ जुड़ गई है। क्योंकि, भारतवर्ष के लोगों को इस दिन का वर्षों से इंतजार था, जो कि अब पूरा हो गया है।Ram mandir Murti: अयोध्या राम मंदिर में श्रीराम की 5 वर्षीय बालस्वरूप ही मूर्ति क्यों, जानें

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में भगवान रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हो गई है, जिसके बाद देश के हर प्रदेश, जिले, शहर और कस्बे अयोध्या से जगमगा रहे हैं। […]

दिल्ली के लाल किले में 23 से 31 जनवरी तक मनाए जाने वाले भारत पर्व पर पहली बार विकसित उत्तराखंड की झांकी दिखेगी, जिसमें राज्य की विकास यात्रा को प्रदर्शित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा केदार की धरती से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया था। भारत पर्व पर पहली बार दिखेगी विकसित उत्तराखंड की झांकी, प्रदर्शित होगी राज्य की विकास यात्रा

इस दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार आगे बढ़ रही है। सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक व नोडल अधिकारी केएस चौहान ने बताया कि विकसित उत्तराखंड […]

मसूरी शुभम को पकड़ने गई टीम में दो दरोगा की लापरवाही सामने आई है। दोनों को पुलिस कप्तान ने निलंबित कर दिया है। दरोगा हथियारों से तो लैस थे लेकिन किसी ने अपनी कमरबंद से पिस्तौल को निकालने की जहमत नहीं उठाई। बेखौफ रहा शुभम…पुलिस के कमरबंद में घुसे रहे हथियार, चलाने की नहीं उठाई जहमत, दो दरोगा निलंबित

शुभम मिथुन कुमार को गोली मारकर हथियार लहराता हुआ भाग निकला लेकिन कोई उस पर पीछे से गोली चलाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। कुछ पुलिसकर्मी उसके पीछे जरूर भागे […]

Ram Mandir: उत्तराखंड में घर-घर अयोध्या जैसा उल्लास, सज गई देवभूमि; प्रदेशभर में निकाली जा रही है शोभा यात्रा। श्रीराम की शोभायात्राएं श्रीराम के अपने धाम में विराजने की खुशी में देवभूमि का कण-कण उल्लासित है। शहर और गांव रंग-विरंगी रोशनी से जगमग हैं। घर और मंदिर सज गए हैं। आज रामलला विग्रह के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के निमित्त घाटी से लेकर पहाड़ की चोटी और शहर से लेकर सीमांत तक दीपोत्सव मनाया जाएगा। रुद्रपुर में विधायक शिव अरोड़ा ने राम भक्तों के साथ भगवा झंडा लिए हुए पूरा शहर राम भक्ति में डूबा हुआ था। वहीं दूसरी ओर प्रमुख समाज सेवी संजय ठुकराल पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के साथ ट्रांजीट कैंप से विशाल जुलूस की शक्ल में में बाजार की ओर राम भक्तों का हुजूम लेकर जय श्री राम के नारे लगाते हुए पूरे शहर को राम मय बना दिया। प्रत्येक घर में दिए जलाए गए ।वही छोटा गुरुद्वारा स्थित आवास विकास जगतपुरा में लक्ष्मी डेरी के स्वामी अमन खेड़ा, पूरा परिवार अपने प्रतिष्ठान पर हलवे का प्रसाद वितरण कर रहे थे। शिव शक्ति मंदिर आवास विकास , पांच मंदिर रूद्रपुर, अटरिया मंदिर, मैं भक्तों का जमावड़ा। मेट्रोपोलिस सिटी में विशाल भंडारी का आयोजन। ओमेक्स सोसाइटी में भजन कीर्तन।

रुद्रपुर डीडी चौक पर भगवान श्री राम डिजिटल फोटो लगाई गई है रात के समय शहर वासियों का भगवान श्री राम को देखने के लिए ताता लगा रहता है। सोशल […]

मूल निवास, भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति की कचहरी स्थित शहीद स्मारक में आयोजित बैठक में निर्णय लिया गया कि 28 जनवरी को हल्द्वानी में आयोजित मूल निवास स्वाभिमान महारैली में सौ से अधिक संगठनों के पदाधिकारी हिस्सा लेंगे। 28 को हल्द्वानी में होगी महारैली, शामिल होंगे 100 से ज्यादा संगठन

बैठक में बताया गया कि हल्द्वानी में 28 जनवरी को सुबह दस बजे सभी लोग बुद्ध पार्क में एकत्रित होकर मूल निवास और सशक्त भू-कानून के लिए महारैली निकालेंगे। महारैली […]

Ram mandir: उत्तराखंड का रघुनाथ मंदिर, जानिए भगवान राम से क्या है खास संबंध, 108 सीढ़ियों की ये पौराणिक मान्यता

भगवान राम का उत्तराखंड के देवप्रयाग से भी खास संबंध रहा है। रघुनाथ मंदिर भगवान राम को समर्पित है। यह मंदिर उत्तराखंड के टिहरी जिले देवप्रयाग पर स्थित है। यह […]

पिता को भी उतारा था मौत के घाट, पत्नी जान गई राज तो ऐसे बनाया ठिकाने लगाने का प्लान सोनीपत का शातिर शुभम पत्नी पर जानलेवा हमला करने से करीब चार माह पहले अपने पिता की भी हत्या कर चुका था। यह राज पत्नी को पता चला तो उसे भी शुभम ने रास्ते से हटाने के लिए गोली मार दी।नीपत का शातिर शुभम पत्नी पर जानलेवा हमला करने से करीब चार माह पहले अपने पिता की भी हत्या कर चुका था। यह राज पत्नी को पता चला तो उसे भी शुभम ने रास्ते से हटाने के लिए गोली मार दी।

मरा जानकर उसे पुल के नीचे फेंक दिया। इस दौरान उसने पुलिस से बचने के लिए कई पैंतरे भी अपनाए। फर्जी नंबर प्लेट वाली गाड़ी चलाई। स्कूटर का इस्तेमाल किया। […]

उत्तराखंड की बेटी प्राची के रचित भजन ‘आ रहे भगवान हैं’ ने आजकल देशभर में धमाल मचा रखा है। इस भजन को उत्तराखंड के गायक जुबिन नौटियाल ने स्वर दिए हैं। रविवार को प्राची ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उनके आवास पर काव्य रचना की प्रति भेंट की।

मुख्यमंत्री ने लेखिका को शुभकामनाएं देते हुए कहा, उत्तराखंड में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। श्री राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक पल पर उत्तराखंड की बेटी प्राची द्वारा […]