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12 March 2026: पढ़ें अपना दैनिक राशिफल (Dainik Rashifal) और जानें अपना आज का भविष्य। आज का राशिफल (Daily Horoscope), वैदिक ज्योतिष की गणना पर आधारित है। इस राशिफल (Dainik Rashifal) की मदद से आप यह जान सकते हैं कि आज का दिन आपके लिए कैसा बीतेगा।

गैस सिलेंडर को लेकर अफवाहों से बचें, आपूर्ति सामान्य – जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया की अपील

LPG Gas Cylinders: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण देश में लोगों के बीच LPG गैस सिलेंडर की किल्लत को लेकर डर बढ़ गया है. कई जगह लोग चिंतित हैं कि कहीं गैस सप्लाई प्रभावित न हो जाए और रसोई का काम ठप न पड़े.हालांकि केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि घरेलू एलपीजी सप्लाई को लेकर किसी तरह का संकट नहीं है और आम उपभोक्ताओं की जरूरत सबसे पहले पूरी की जाएगी.

राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान की दिशा में पहल, मेयर विकास शर्मा ने मुख्यमंत्री से की हाउस टैक्स माफी की मांग

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भारतीय किसान यूनियन की महिला जिला अध्यक्ष मीना गंगवार समेत दर्जनों महिलाओं ने ली भाईचारा एकता मंच की सदस्यता

रुद्रपुर।शहर में सामाजिक एकजुटता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण…

सोशल मीडिया की लड़ाई जब सड़क पर उतरी: हल्द्वानी की घटना से समाज को क्या सीख?”

हल्द्वानी के काठगोदाम क्षेत्र स्थित चौपाटी में 11 मार्च को हुई मारपीट की घटना ने…

शनि की साढ़े साती को लेकर लोगों के मन में एक अलग ही डर देखने को मिलता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसे हमेशा नकारात्मक प्रभाव देने वाली दशा माना जाता है। लेकिन ज्योतिष की मानें तो साढ़े साती हर किसी के लिए बुरी नहीं होती।

अगर किसी की कुंडली में शनि मजबूत स्थिति में विराजमान है तो शनि की ये…

modi Government Deputy PM: बैसाखियों पर टिकी केंद्र सरकार ने अपने को मज़बूत बनाने का फ़ैसला कर लिया है। इसके लिए पार्टी जल्द ही अटल बिहारी वाजपेयी की राह पर चलती नज़र आये तो कोई हैरत नहीं होना चाहिए।

पार्टी ने अगले कैबिनेट विस्तार या उलटफेर में उप प्रधानमंत्री बनाने का मन बना लिया…

दुनिया

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गैस सिलेंडर को लेकर अफवाहों से बचें, आपूर्ति सामान्य – जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया की अपील

LPG Gas Cylinders: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण देश में लोगों के बीच LPG गैस सिलेंडर की किल्लत को लेकर डर बढ़ गया है. कई जगह लोग चिंतित हैं कि कहीं गैस सप्लाई प्रभावित न हो जाए और रसोई का काम ठप न पड़े.हालांकि केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि घरेलू एलपीजी सप्लाई को लेकर किसी तरह का संकट नहीं है और आम उपभोक्ताओं की जरूरत सबसे पहले पूरी की जाएगी.

दुबई,तेहरान/वाशिंगटन: मिडिल ईस्ट में जारी महायुद्ध अब अपने सबसे खतरनाक दौर में पहुंच गया है। जंग के 12वें दिन ईरान ने दावा किया है कि उसने इजरायल और अमेरिका के खिलाफ अपना अब तक का सबसे बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

पहाड़ की आवाज़ खामोश — लोकगायक दीवान कनवाल का जाना लोकसंस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति

Express News

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दुबई,तेहरान/वाशिंगटन: मिडिल ईस्ट में जारी महायुद्ध अब अपने सबसे खतरनाक दौर में पहुंच गया है। जंग के 12वें दिन ईरान ने दावा किया है कि उसने इजरायल और अमेरिका के खिलाफ अपना अब तक का सबसे बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

रानी बैलिस्टिक मिसाइलों ने न केवल इजरायली शहरों बल्कि मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी दहला दिया…

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भोजन की पवित्रता और गु मूत मिलावट पदार्थ से मानसिक असंतुलन — सावधानी ही सुरक्षा

ब्रेकिंग न्यूज़ | आध्यात्मिक चेतावनी समाज में बढ़ती मानसिक असंतुलन, आक्रामकता और परिवारों में कलह को लेकर आध्यात्मिक चिंतन सामने…

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राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान की दिशा में पहल, मेयर विकास शर्मा ने मुख्यमंत्री से की हाउस टैक्स माफी की मांग

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लाल सलाम की आड़ में सिडकुल में घुसपैठ? कंपनियां रहें सतर्क

युद्ध की आंच और रसोई का धुआँ: क्या फिर लौटेगा 1991 जैसा ईंधन संकट?अवतार सिंह बिष्ट | संपादकीय | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स

भारतीय किसान यूनियन की महिला जिला अध्यक्ष मीना गंगवार समेत दर्जनों महिलाओं ने ली भाईचारा एकता मंच की सदस्यता

रुद्रपुर।शहर में सामाजिक एकजुटता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय किसान यूनियन (महात्मा टिकैत) की उधम सिंह नगर की महिला जिला…

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सोशल मीडिया की लड़ाई जब सड़क पर उतरी: हल्द्वानी की घटना से समाज को क्या सीख?”

हल्द्वानी के काठगोदाम क्षेत्र स्थित चौपाटी में 11 मार्च को हुई मारपीट की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सोशल मीडिया की लोकप्रियता…

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शनि की साढ़े साती को लेकर लोगों के मन में एक अलग ही डर देखने को मिलता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसे हमेशा नकारात्मक प्रभाव देने वाली दशा माना जाता है। लेकिन ज्योतिष की मानें तो साढ़े साती हर किसी के लिए बुरी नहीं होती।

अगर किसी की कुंडली में शनि मजबूत स्थिति में विराजमान है तो शनि की ये दशा शुभ फल भी देती है। चलिए जानते हैं 2026 में किन राशियों पर शनि…

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modi Government Deputy PM: बैसाखियों पर टिकी केंद्र सरकार ने अपने को मज़बूत बनाने का फ़ैसला कर लिया है। इसके लिए पार्टी जल्द ही अटल बिहारी वाजपेयी की राह पर चलती नज़र आये तो कोई हैरत नहीं होना चाहिए।

पार्टी ने अगले कैबिनेट विस्तार या उलटफेर में उप प्रधानमंत्री बनाने का मन बना लिया है। पर अभी इस विचार को अंतिम रूप महज़ इसलिए नहीं दिया जा सका है…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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23वें राज्य स्थापना दिवस पर तहसील किच्छा जिला उधम सिंह नगर में राज्य आंदोलनकारियों का सम्मान किया गया एव ऐसा सम्मान पहली बार हुआ है…..आज किच्छा के एसडीएम श्री कौस्तुभ मिश्र जी के द्वार बहुत ही बेहतर कार्यक्रम

आज उत्तराखंड के 23वें राज्य स्थापना दिवस पर तहसील किच्छा जिला उधम सिंह नगर में राज्य आंदोलनकारियों का सम्मान किया गया एव ऐसा सम्मान पहली बार हुआ है…..आज किच्छा के […]

Hindustan Global Times उत्तराखंड राज्य की२३वी वर्षगांठ उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद के अध्यक्ष अवतारा बिष्ट के द्वारा मुख्यमंत्री एवं जिला प्रशासन का जताया आभार, प्रत्येक राज आंदोलनकार्यो को ₹15000 पेंशन की करें मांग, 1 सितंबर 2021 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के द्वारा शहीद स्मारक खटीमा से गई घोषणाओं का हुआ निस्तारण,

गैरसैंण में बोले सीएम धामी-आंदोलनकारियों को आरक्षण के मुद्दे पर जल्द बुलाएंगे विस सत्र उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) मे राज्य स्थापना दिवस की 23वीं वर्षगांठ मनाई गई। मुख्यमंत्री […]

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht रामलीला, सुंदर अभिनय के साथ विजडम पब्लिक स्कूल के बच्चों में संयुक्त रूप से 3 घंटे में किया पूरी रामलीला का मंचन, उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर विजडम पब्लिक स्कूल की शानदार प्रस्तुति व पहल,

गंगापुर मार्ग स्थित विजडम पब्लिक स्कूल में राज्य स्थापना दिवस के उपलक्ष्य पर, सांस्कृतिक, धार्मिक और बच्चों द्वारा मनमोहक ‘प्रस्तुति प्रस्तुत की गई है। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्जवलन, (सरस्वती) […]

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, अवतार सिंह बिष्ट,अध्यक्ष उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद,उत्तराखंड राज्य की कल्पना एक स्वप्न था जिसमें जमीन, जल, जंगल और जन अग्रसर थे एक स्थायी सुखद भविष्य की ओर। वह एक ऐसी सामाजिक और भौगोलिक कल्पना थी जिसमें यहाँ के निवासियों के लिए सम्मान था, आजीविका के साधन थे और आधुनिक सुख सुविधाएँ थी – एक ऐसी कल्पना जिसके क्रियान्वयन की कीमत जमीन, जल या जंगल को न चुकानी पड़े उत्तराखंड स्थापना दिवस: ‘राज्य निर्माण की अवधारणा की बुनियाद भी नहीं रख पाए’, अवतार सिंह बिष्ट

राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र जुगरान मेरा अनुभव है कि 23 वर्ष बाद भी हम राज्य निर्माण की मूल अवधारणा की बुनियाद भी नहीं रख पाए। पहाड़ […]

news/hindustan- global-times- उत्तराखण्ड “देवभूमि” के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह समग्र क्षेत्र धर्ममय और दैवशक्तियों की क्रीड़ाभूमि तथा हिन्दू धर्म के उद्भव और महिमाओंं की सारगर्भित कुंजी व रहस्यमय है। 

09 नवंबर 2000 को भारत के 27 वें राज्य के रूप में उत्तराखंड का गठन हुआ, और इसे उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्से से अलग किया गया, तब इसे उत्तरांचल के […]

Hindustan Global Times उत्तराखंड के पूर्व मुख्‍यमंत्री हरीश रावत ने सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों को लेकर सत्ताधारी भाजपा को घेर लिया है। उन्‍होंने कहा कि सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई सही है, लेकिन इसकी शुरुआत देहरादून से होनी चाहिए, क्योंकि देहरादून में रोज अवैध निर्माण हो रहे हैं।

नदी-नाले सब घेर दिए गए हैं। इतना ही नहीं, सरकारी जमीनों पर 99 फीसदी अवैध कब्जा भाजपाइयों ने किया है। पूर्व मुख्‍यमंत्री के आरोप का जवाब देते हुए शहरी विकास […]

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht प्रदेश में भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस की भावना से भ्रष्टाचार मुक्त, उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना सहित उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारीयो के सपने के अनुरूप अग्रसर उत्तराखंड राज्य, ग्लेशियरों, नदियों, घने जंगलों और बर्फ से ढकी पर्वत चोटियों सहित प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री के चार सबसे पवित्र और प्रतिष्ठित हिंदू मंदिर, जिन्हें चार-बांध भी कहा जाता है, उत्तराखंड में स्थित हैं और इसलिए, उन्हें ‘देवताओं की भूमि’ के रूप में जाना जाता है। राज्य की राजधानी देहरादून है और उच्च न्यायालय नैनीताल में स्थित है।आज 23वीं वर्षगांठ पूरे कर पूर्ण युवा हो चुका है। इन २३वी वर्षगांठ में राज्य ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं तो कई ऐसे पहलू भी हैं जिनकी कसक आज भी दूर नहीं हो पाई है। जहां बुनियादी ढांचे के विकास, सड़क-रेल-एयर नेटवर्क के लिहाज से उत्तराखंड तेजी से छलांग लगा रहा है। पहाड़ी राज्य उत्तरांखड बनाने को लेकर प्रदेशवासियों को लंबे संघर्ष का एक दौर देखना पड़ा. कई आंदोलनों और शहादतों के बाद 9 नवंबर 2000 को आखिरकार उत्तर प्रदेश से पृथक होकर एक अलग पहाड़ी राज्य का गठन हुआ. इस पहाड़ी राज्य को बनाने में कई बड़े नेताओं और राज्य आंदोलनकारियों का अहम योगदान रहा है. जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता है. आखिर क्या है एक अलग राज्य बनने का इतिहास और कब क्या रहा खास, देखिए उत्तराखंड बनने के संघर्ष की कहानी.42 से अधिक लोगों ने दी थी शहादत:पहाड़ी राज्य बनाने को लेकर एक लंबा संघर्ष चला. जिसके लिए कई आंदोलन किये गये, कई मार्च निकाले गये. अलग पहाड़ी प्रदेश के लिए 42 आंदोलनकारियों को शहादत देनी पड़ी. अनगिनत आंदोलनकारी घायल हुए. पहाड़ी राज्य की मांग को लेकर उस समय इतना जुनून था कि महिलाएं, बुजुर्ग यहां तक की स्कूली बच्चों तक ने आंदोलन में भाग लिया

उपलब्धियां उत्तराखंड,राज्य सकल घरेलू उत्पाद और प्रति व्यक्ति आय में उत्तराखंड राष्ट्रीय औसत से कहीं आगे तो है ही, कई बड़े राज्यों को भी चुनौती दे रहा है। विशेष दर्जे […]

Hindustan Global Times, ऊधम सिंह नगर जिले के अंतर्गत पंतनगर एयरपोर्ट पर उत्तराखंड का सबसे बड़ा रनवे बनने जा रहा है। यहां 3000 मीटर लंबे रनवे का निर्माण प्रस्तावित है। इससे यहां बड़े हवाई जहाज उतर सकेंगे।

अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनने की राह भी प्रशस्त होगी। इसके लिए शासन ने 804 एकड़ भूमि का अधिग्रहण शुरू कर दिया है। जल्द ही इसकी डीपीआर तैयार करने की कार्यवाही की […]

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रिपोर्टर मार्केटिंग हेड उत्तराखंड, गिरीश सिंह तड़ियाल। उत्तराखंड में पलायन ,बेहतर रोजगार की संभावनाओं की तलाश में 3,83,000 से अधिक लोग पलायन कर चुके हैं। आरटीआई की सूक्ष्म जांच से पता चलता है कि प्रवासन के पीछे प्रमुख कारणों में से एक आकर्षक रोजगार के अवसरों की कमी है। आइए उत्तराखंड में पलायन के मुद्दे पर उपलब्ध कुछ और आंकड़ों पर विचार करें।इसके अलावा, बेहतर रोजगार की संभावनाओं की तलाश में 3,83,000 से अधिक लोग पलायन कर चुके हैं। आरटीआई की सूक्ष्म जांच से पता चलता है कि प्रवासन के पीछे प्रमुख कारणों में से एक आकर्षक रोजगार के अवसरों की कमी है। आइए उत्तराखंड में पलायन के मुद्दे पर उपलब्ध कुछ और आंकड़ों पर विचार करें।

उत्तराखंड में पलायन ऐसा विषय है, जिसे थामने की चुनौती अभी भी बरकरार है। यद्यपि, तस्वीर कुछ बदली है, लेकिन रास्ता लंबा है। गांवों से पलायन अब अन्य राज्यों की […]

Hindustan Global Times,आदर्श शिवाजी नगर रामलीला समिति ढंडेरा रुड़की द्वारा पर्वतीय परंपराओं से प्रेरित प्रभु राम की लीला के सजीव अभिनव के मंचन का दसवें दिन का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ रमेश पोखरियाल निशंक सांसद हरिद्वार पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड,

रुड़की दिनांक 07.11.,2023,प्रभु राम की रामलीला के मंचन का दसवां दिन रावण अंगद व मेघनाथ लक्ष्मण संवाद में दर्शकों को मन मोहाआदर्श शिवाजी नगर रामलीला समिति ढंडेरा रुड़की द्वारा पर्वतीय […]