उत्तराखंड में मानसून की चाल भले ही थोड़ी धीमी पड़ी हो, लेकिन पहाड़ों पर आफत का दौर पूरी तरह थमा नहीं है. देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र ने 27 अगस्त के लिए राज्य के तीन प्रमुख जिलों देहरादून, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के लिए तेज बारिश और आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया है.

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साथ ही, पर्वतीय इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश के तीव्र से अति तीव्र दौर देखने को मिल सकते हैं. वहीं मैदानी जिलों में छिटपुट बारिश और बादलों की आवाजाही से उमस और गर्मी से हल्की राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन संवेदनशील पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन का जोखिम लगातार बना हुआ है.

दूसरी तरफ, लगातार हो रही बारिश से पर्वतीय जिलों में आम जनजीवन अस्त-व्यस्तहो चुका है. खासकर चमोली में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. यहां निजमुला-बिरही मोटर मार्ग पर भारी-भरकम बोल्डर और मलबा गिरने से सड़क पूरी तरह बंद हो गई है, जिससे घाटी के 12 से अधिक गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय गोपेश्वर से कट गया है. इसके अलावा, चमोली के सुदूरवर्ती सुतोल गांव में भू-धंसावऔर लैंडस्लाइड की मार से 15 परिवार सीधे खतरे की जद में आ गए हैं. ग्रामीणों के मकानों में चौड़ी दरारें आ गई हैं, जिससे लोग दहशत के साए में रातें काटने को मजबूर हैं. स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव कार्यों के लिए जुट गया है, लेकिन मौसम की मार राह में रोड़ा बन रही है.


उत्तराखंड में 27 अगस्त को मौसम का मिजाज और 3 जिलों में अलर्ट

  1. देहरादून और मसूरी में गरज-चमक के साथ तेज बौछारें
    राजधानी देहरादून और आसपास के पहाड़ी इलाकों जैसे मसूरी, ऋषिकेश व विकासनगर में आज मौसम का मिजाज बदला रहेगा. देहरादून के कुछ हिस्सों में बादलों की तेज गड़गड़ाहट के साथ रुक-रुक कर भारी बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं. मौसम विभाग के अनुसार, राजधानी के कुछ इलाकों में अचानक होने वाली तेज बारिश से शहर के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है. वहीं मसूरी और सहस्रधारा मार्ग पर सफर करने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. तापमान में हल्की गिरावट आने से मौसम तो सुहावना रहेगा, लेकिन आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है.
  2. पिथौरागढ़ और बागेश्वर: संवेदनशील घाटियों में सतर्कता जरूरी
    पिथौरागढ़ और कुमाऊं मंडल के बागेश्वर जिले में मौसम केंद्र ने विशेष सतर्कता बरतने को कहा है. इन दोनों जिलों के ऊंचाई वाले और नदी-नालों के किनारे बसे गांवों में कहीं-कहीं अत्यंत तीव्र बारिश हो सकती है. पिथौरागढ़ के धारचूला, मुनस्यारी और बागेश्वर के कपकोट व गरुड़ क्षेत्रों में नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका है. पहाड़ी मार्गों पर बोल्डर गिरने और मलबा आने से यात्रा में व्यवधान आ सकता है. प्रशासन ने स्थानीय निवासियों और यात्रियों को संवेदनशील इलाकों में गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है.
  3. चमोली और रुद्रप्रयाग: भू-धंसाव से बढ़ा संकट, मार्ग अवरुद्ध
    चमोली और रुद्रप्रयाग जनपदों में बारिश के कारण लगातार भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं. चमोली के निजमुला घाटी में मार्ग बाधित होने से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर असर पड़ रहा है. सुतोल गांव में जमीन धंसने से कई परिवार बेघर होने की कगार पर हैं और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की प्रक्रिया जारी है. रुद्रप्रयाग में केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भी संवेदनशील स्थानों पर पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं. यहां दोपहर बाद या देर शाम गरज के साथ बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है, जिससे यात्रा मार्गों पर मलबा साफ करने के काम में बाधा आ सकती है.
  4. हरिद्वार और उधम सिंह नगर: मैदानी इलाकों में हल्की बारिश और उमस
    हरिद्वार और उधम सिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में 27 और 28 अगस्त को मौसम अपेक्षाकृत हल्का रहेगा. इन जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं. हालांकि, बारिश न होने के दौरान तेज धूप और उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है. उधम सिंह नगर में 29 अगस्त से मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, जहां तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है.
  5. नैनीताल, अल्मोड़ा और पौड़ी गढ़वाल: पहाड़ियों पर बादलों का डेरा
    नैनीताल, अल्मोड़ा और पौड़ी गढ़वाल जनपदों में अधिकांश स्थानों पर बादल छाए रहेंगे और रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है. नैनीताल की झील और आसपास के पर्यटक स्थलों में हल्की फुहारों से ठंडक बढ़ेगी, लेकिन काठगोदाम-नैनीताल हाईवे पर मलबा गिरने की आशंका के चलते वाहन चालकों को सतर्क रहने को कहा गया है. अल्मोड़ा और पौड़ी के ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली कड़कने के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है, जिससे ग्रामीण मार्गों पर फिसलन बढ़ सकती है.

एसडीआरएफ की टनकपुर चौकी को हाई अलर्ट पर रखा गया है और लोगों से शारदा नदी के तटों से दूर रहने की अपील की गई है।

उत्तराखंड के तीन जिले नेपाल की सीमा को टच करते हैं। इनमें पिथौरागढ़, चंपावत और उधम सिंह नगर शामिल है। नेपाल में आई बाढ़ के मद्देनजर चंपावत जिला अधिक संवेदनशील माना गया है, इसलिए प्रशासन ने यहां लोगों को सावधान रहने को कहा है।

एसडीआरएफ टीम लगातार पेट्रोलिंग कर रही है

अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल में आई आपदा को देखते हुए एसडीआरएफ के सेनानायक (कमांडेंट) अर्पण यदुवंशी के निर्देश पर चंपावत जिले की टनकपुर चौकी को हाई अलर्ट पर रखा गया है। एसडीआरएफ की टनकपुर टीम शारदा नदी के संवेदनशील तटीय क्षेत्रों, शारदा घाट, शारदा बैराज और आसपास के इलाकों में लगातार निगरानी एवं गश्त कर रही है। टीम नदी के जलस्तर और संभावित खतरे पर लगातार नजर रख रही है तथा स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाए हुए है।

मछुआरों को नदी से दूर रहने के लिए कहा गया

अधिकारियों ने बताया कि एसडीआरएफ की टीम ने शारदा घाट और निचले इलाकों में पहुंचकर स्थानीय निवासियों, यात्रियों और मछुआरों को नदी के जलस्तर में संभावित वृद्धि के प्रति जागरूक किया। लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी स्थिति में अनावश्यक रूप से नदी के तटीय क्षेत्रों के पास न जाएं और प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

तत्काल राहत बचाव के लिए तैयार है SDRF

उन्होंने बताया कि एसडीआरएफ की टीम आवश्यक जीवनरक्षक और बचाव उपकरणों के साथ 24 घंटे पूरी तरह मुस्तैद है, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके। चंपावत जिला प्रशासन ने भी सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रहने और आपसी समन्वय बनाए रखते हुए शारदा नदी के जलस्तर तथा संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।


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