आरब्ध’ पत्रिका का लोकार्पण, कुसुम भट्ट को मिला साहित्य का प्रतिष्ठित सम्मानसाहित्य की साधना को सम्मान, कुसुम भट्ट बनीं पहली ‘आरब्ध’ सम्मानित साहित्यकार

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देहरादून में आयोजित भव्य साहित्यिक समारोह में वरिष्ठ कहानीकार कुसुम भट्ट ‘आरब्ध’ को सम्मानित किया गया। समारोह में ‘आरब्ध’ पत्रिका का लोकार्पण भी हुआ। पत्रिका की संकल्पना वरिष्ठ कवि-साहित्यकार एवं विश्व बैंक में कार्यरत ऊर्जा वैज्ञानिक डॉ. ईशान पुरोहित की है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


वरिष्ठ साहित्यकार कुसुम भट्ट ‘आरब्ध’ सम्मान से सम्मानित
‘आरब्ध’ पत्रिका हिंदी और आंचलिक भाषाओं के साहित्य को देगी नया मंच
देहरादून। रिस्पना पुल के निकट स्थित एक होटल में आयोजित भव्य एवं गरिमामय साहित्यिक समारोह में हिंदी की वरिष्ठ कहानीकार कुसुम भट्ट को ‘आरब्ध’ सम्मान से सम्मानित किया गया। इसी अवसर पर साहित्यिक पत्रिका ‘आरब्ध’ का लोकार्पण भी किया गया। पत्रिका की संकल्पना वरिष्ठ कवि-साहित्यकार एवं विश्व बैंक में कार्यरत ऊर्जा वैज्ञानिक डॉ. ईशान पुरोहित की है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड की लोक संस्कृति के पुरोधा, प्रख्यात रंगकर्मी, शिक्षक एवं चिंतक प्रो. डी.आर. पुरोहित ने की। उन्होंने कहा कि ‘आरब्ध’ साहित्यकारों को सृजन के लिए बेहतरीन मंच उपलब्ध करा रही है। इससे नवलेखन को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने डॉ. ईशान पुरोहित के साहित्यिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण कार्य करना सभी के लिए सहज संभव कार्य नहीं है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. नंदकिशोर हटवाल ने कहा कि डॉ. ईशान पुरोहित मूल रूप से ऊर्जा वैज्ञानिक हैं, साथ ही वे अत्यंत संवेदनशील कवि और साहित्यप्रेमी हैं। उन्होंने कहा कि साहित्यकार के रचनाकर्म का मूल्यांकन अक्सर लंबे समय बाद होता है। उन्होंने कबीर का उदाहरण देते हुए साहित्य के दीर्घकालिक प्रभाव को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एच.एन.बी. गढ़वाल विश्वविद्यालय के लोक कला और संस्कृति निष्पादन केंद्र के निदेशक गणेश खुगशाल ‘गणि’ ने कहा कि ‘आरब्ध’ का प्रकाशन हिंदी और आंचलिक भाषाओं को एक साथ समझने और उनके साहित्यिक सरोकारों को सामने लाने का महत्वपूर्ण अवसर है।
सम्मान से अभिभूत कुसुम भट्ट ने कहा कि उन्होंने अपने लेखन की शुरुआत कविता से की थी, लेकिन कविता को साध न सकने के बाद उन्होंने लेखन को विस्तार देने के लिए कहानियों का रुख किया। उन्होंने कहा कि लेखक को अच्छे लेखन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, मूल्यांकन समाज स्वयं करता है।
‘आरब्ध’ के प्रबंध संपादक कैलाश गोदियाल ने कहा कि यह आयोजन कॉरपोरेट और क्रिएटिविटी के संगम का प्रतीक है। ‘आरब्ध’ को उत्तराखंड के साहित्य का विशिष्ट मंच बनाने के उद्देश्य से कार्य किया जा रहा है।
कार्यक्रम की शुरुआत में कान्ता घिल्डियाल ने कुसुम भट्ट के साहित्यिक व्यक्तित्व एवं कृतित्व का परिचय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन ज्योत्स्ना जोशी ने किया।
सम्मान समारोह के बाद वरिष्ठ कवयित्री बीना बेंजवाल की अध्यक्षता में कवि गोष्ठी आयोजित हुई। इसमें मदन मोहन डुकलान, कान्ता घिल्डियाल, मधुरवादिनी तिवारी, नंदन राणा नवल, कविता भट्ट, बेलीराम कंसवाल और निक्की पुष्कर ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।
समारोह में डॉ. योगेश धस्माना, डॉ. ओम प्रकाश जमलोकी, प्रो. गुंजन पुरोहित, सत्यानंद बडोनी, गिरीश सुंदरियाल, अनिल नेगी और रमाकांत बेंजवाल सहित अनेक साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


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