अंतरिक्ष में दोबारा भारत का परचम लहराने के लिए 41 साल से इंतजार कर रहे 140 करोड़ भारतीयों को कुछ घंटे और इंतजार करना पड़ेगा। भारतीय अंतरिक्षयात्री शुभांशु को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आइएसएस) ले जाने वाले एक्सिओम स्पेस के मिशन एक्सिओम-4 को खराब मौसम के कारण तीसरी बार टाल दिया गया है।

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गगनयात्री शुभांशु मंगलवार के बजाय अब बुधवार को अंतरिक्ष की उड़ान भरेंगे। वह आइएसएस की उड़ान भरने वाले पहले भारतीय होंगे। वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और भारत के स्वदेशी अतंरिक्ष मिशन गगनयान के लिए चुने गए शुभांशु अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय होंगे। राकेश शर्मा 1984 में सोवियत संघ के सोयूज अंतरिक्षयान से अंतरिक्ष स्टेशन सैल्यूट 7 पर गए थे। राकेश शर्मा भारत के पहले अंतरिक्षयात्री हैं।

संवाददाता,शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स /उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट

इसरो ने दी जानकारी

इसरो ने सोमवार को बताया कि खराब मौसम के कारण शुभांशु और तीन अन्य अंतरिक्षयात्रियों को आइएसएस पर ले जाने वाले एक्सिओम-4 मिशन का प्रक्षेपण 11 जून तक स्थगित किया गया है। इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा, एक्सिओम-4 मिशन को अब भारतीय समय अनुसार शाम 5:30 बजे लांच किया जाएगा। स्पेसएक्स का फाल्कन-9 राकेट मंगलवार शाम फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से रवाना होने वाला था, लेकिन अब अंतरिक्षयात्री बुधवार को आइएसएस के सफर पर रवाना होंगे।

शुभांशु के साथ जाने वाले अंतरिक्षयात्रियों में पोलैंड से स्लावोस्ज उजनांस्की-विस्नीवस्की, हंगरी से टिबोर कापू और मिशन की कमांडर अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन शामिल हैं। शुभांशु मिशन के पायलट होंगे। एक्सिओम-4 मिशन को पहले भी दो बार टालना पड़ा था। अंतरिक्षयात्रियों को 29 मई को रवाना होना था, लेकिन इसे आठ जून तक टाला गया। इसके बाद इसे 10 जून तक टाला गया।

पीएम मोदी कर सकते हैं चालक दल के साथ संवाद

चालक दल के सदस्य आइएसएस में 14 दिन रहकर कई प्रयोग करेंगे। इस दौरान पीएम नरेन्द्र मोदी भी उनसे बात कर सकते हैं। शुभांशु ने कहा था कि चालक दल स्कूली छात्रों, शिक्षकों और भारतीय अंतरिक्ष उद्योग के सदस्यों के साथ भी संवाद करेगा।उन्होंने कहा था, मैं भारत से अनुरोध करता हूं कि वह इस मिशन की सफलता के लिए प्रार्थना करे। जय ¨हद। शुभांशु अंतरिक्ष उड़ान पर अपने साथ आम का रस, मूंग दाल का हलवा और गाजर का हलवा जैसे भारतीय व्यंजन ले जाएंगे।

आइएसएस में फसल उगाएंगे, टार्डिग्रेड्स पर भी करेंगे शोध शुभांशु

आइएसएस में फसल उगाने और अंतरिक्ष में वाटर बियर या टार्डिग्रेड्स पर भी शोध करेंगे। इसरो, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के सहयोग से सात प्रयोग करेगा। नासा और बायोसर्व स्पेस टेक्नोलाजीज के सहयोग से इसरो के अंतरिक्ष में सलाद के बीजों को अंकुरण प्रयोग का उद्देश्य सूक्ष्मगुरुत्व या माइक्रोग्रैविटी में फसल के बीजों के अंकुरण और वृद्धि का परीक्षण करना है। इस परियोजना का उद्देश्य अंतरिक्षयात्रियों के लिए विश्वसनीय खाद्य स्त्रोत सुनिश्चित करना है।

अंतरिक्षयात्री टार्डिग्रेड्स या वाटर बियर पर भी शोध करेंगे। वाटर बियर छोटे जीव हैं और चरम स्थितियों में जीवित रहने की अपनी क्षमता के लिए जाने जाते हैं। टार्डिग्रेड्स लगभग 60 करोड़ वर्षों से पृथ्वी पर मौजूद हैं।अंतरिक्षयात्री माइक्रोग्रैविटी में इलेक्ट्रानिक डिस्प्ले का भी परीक्षण करेंगे। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष में कंप्यूटर स्क्रीन के उपयोग के प्रभावों को समझना है।

इससे पता चलेगा कि माइक्रोग्रैविटी में इशारा करना, टकटकी लगाना और तेजी से आंखों की हरकतें कैसे प्रभावित होती हैं।मिशन के दौरान खाद्य माइक्रोएल्गी की तीन प्रजातियों की वृद्धि, आनुवंशिक गतिविधि पर माइक्रोग्रैविटी के प्रभाव का भी अध्ययन किया जाएगा। सायनोबैक्टीरिया और अंतरिक्ष में मांसपेशियों पर माइक्रोग्रैविटी के प्रभाव का भी अध्ययन किया जाएगा।

गगनयान मिशन के लिए भी हुआ है शुभांशु का चयन

लखनऊ में जन्मे शुभांशु को इसरो के मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान के लिए भी शार्टलिस्ट किया गया है। गगनयान अभियान में पृथ्वी की 400 किलोमीटर पर स्थित निचली कक्षा में अंतरिक्षयात्रियों को भेजा जाएगा। इसके बाद पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी भी कराई जाएगी। उनकी इस यात्रा से उन्हें अंतरिक्ष उड़ान संचालन आपातकालीन तैयारियों के लिए व्यावहारिक अनुभव मिलेगा जो भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं के लिए आवश्यक है। इसरो एक्सिओम-4 मिशन पर 550 करोड़ रुपये खर्च करेगा।


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