रुद्रपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना के 1872 आवास जल्द होंगे आवंटित, लेकिन स्थानीय लोगों की हिस्सेदारी पर उठे सवाल
रुद्रपुर। ऊधमसिंह नगर जिले के बागवाला क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत लगभग 156 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 1872 आवास शीघ्र ही लाभार्थियों को आवंटित किए जाएंगे। शुक्रवार को सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने रुद्रपुर पहुंचकर विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित विभिन्न निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया और अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड
निरीक्षण के दौरान सचिव ने बागवाला स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्मित आवासों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही इन आवासों का लोकार्पण कर लाभार्थियों को चाबियां सौंपी जाएंगी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लाभार्थियों से शेष धनराशि जल्द जमा कराई जाए ताकि आवंटन प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
जिला विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष जय किशन ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत प्रत्येक आवास के लिए लगभग 3 लाख रुपये सरकार द्वारा तथा 3 लाख रुपये लाभार्थी द्वारा जमा किए जाने हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 185 लाभार्थियों द्वारा पूरी धनराशि जमा कर दी गई है, जबकि 222 लाभार्थियों को पत्र एवं दूरभाष के माध्यम से भुगतान के लिए सूचित किया गया है।
सचिव जिला विकास प्राधिकरण पंकज उपाध्याय ने बताया कि आवासों की साफ-सफाई का कार्य अंतिम चरण में है तथा परिसर में पौधारोपण भी कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि परिसर में एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) का निर्माण कर उसकी टेस्टिंग भी पूरी कर ली गई है।
डॉ. आर. राजेश कुमार ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस परियोजना का लोकार्पण प्रधानमंत्री अथवा मुख्यमंत्री स्तर से कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 शीघ्र शुरू होने जा रही है, जिसके लिए भूमि चिन्हित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।
इसके बाद सचिव ने त्रिशूल चौक के पास लोक निर्माण विभाग की लगभग 6.5 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित “कुमाऊं कॉमर्शियल कुटीर” बहुमंजिला प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना में बहुमंजिला आवासीय एवं कॉमर्शियल भवन बनाए जाएंगे, जिसकी प्रारंभिक डीपीआर शासन को भेज दी गई है।
सचिव ने रामपुर रोड पर प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर परियोजना का भी निरीक्षण किया। बताया गया कि 48 एकड़ भूमि पर लगभग 72 करोड़ रुपये की लागत से ट्रांसपोर्ट नगर विकसित करने की योजना है, जिसकी डीपीआर शासन को भेजी जा चुकी है। सचिव ने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों को सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएंगी।
इसके अलावा त्रिशूल चौक से मेडिकल कॉलेज तक सड़क चौड़ीकरण कार्य तथा कलेक्ट्रेट परिसर में निर्माणाधीन विकास प्राधिकरण कार्यालय का भी निरीक्षण किया गया। अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
निरीक्षण के दौरान उपाध्यक्ष जिला विकास प्राधिकरण जय किशन, सीडीओ दिवेश शाशनी, सचिव जिला विकास प्राधिकरण पंकज उपाध्याय, नगर आयुक्त शिप्रा जोशी, अधिशासी अभियंता लोनिवि गजेंद्र सिंह सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
हालांकि इस पूरी परियोजना के बीच एक बड़ा सवाल स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना में स्थानीय उत्तराखंडवासियों की हिस्सेदारी बेहद कम दिखाई दे रही है। लोगों का दावा है कि लगभग 10 प्रतिशत के आसपास ही उत्तराखंड मूल के लोगों की उपस्थिति है, जबकि बड़ी संख्या में आवंटन उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान तथा अन्य राज्यों के लोगों को होने की चर्चा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उत्तराखंड में ही उत्तराखंडवासियों को आवासीय योजनाओं का पर्याप्त लाभ नहीं मिलेगा, तो फिर उन्हें कहां अवसर मिलेगा? यह सवाल लगातार उठ रहा है। साथ ही यह मांग भी की जा रही है कि जिन लोगों को आवास आवंटित किए जा रहे हैं, उनके स्थायी निवास, आय, पात्रता एवं अन्य दस्तावेजों का निष्पक्ष सत्यापन होना चाहिए।
क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि आवंटन प्रक्रिया के दौरान कार्यालयों में शॉर्टकट और अनियमितताओं की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। ऐसे में प्रत्येक लाभार्थी के दस्तावेजों की गहन जांच कराई जानी चाहिए ताकि वास्तविक जरूरतमंद और पात्र लोगों को ही योजना का लाभ मिल सके।
भूरा रानी क्षेत्र स्थित प्रधानमंत्री आवास परियोजना को लेकर पूर्व में रुद्रपुर विधायक शिव अरोड़ा द्वारा भी सवाल उठाए गए थे। अब जबकि आवंटन प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, तब भी बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को इसकी स्पष्ट जानकारी तक नहीं मिल पा रही है। ऐसे में पारदर्शिता और व्यापक सूचना प्रसार की मांग भी तेज होती दिखाई दे रही है।
फिलहाल, यह परियोजना शहर के विकास और गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि आवंटन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और स्थानीय जरूरतमंदों के हितों को ध्यान में रखकर की जाए।
