रुद्रपुर। प्रधानमंत्री सूर्या घर मुफ्त बिजली योजना के तहत लगाए गए सोलर सिस्टम को लेकर दिनेशपुर की एक महिला उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, रुद्रपुर में शिकायत दाखिल की है। शिकायत में सोलर निर्माता कंपनी और स्थानीय विक्रेता पर सेवा में गंभीर कमी तथा अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाते हुए कुल ₹46,274 की राहत सहित अन्य आदेश जारी करने की मांग की गई है।
उत्तराखंड में सोलर सिस्टम लगवाने वाले उपभोक्ताओं को लूम सोलर और ट्रियाम्बी इंडिया की कार्यप्रणाली को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
शिकायतकर्ता श्रीमती सुलता अधिकारी, निवासी नेताजी नगर, वार्ड नंबर-7, दिनेशपुर ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि अजय कुमार अधिकारी के माध्यम से आयोग में याचिका प्रस्तुत की है। शिकायत के मुताबिक उनका UPCL उपभोक्ता नंबर 41800449683 है और स्वीकृत बिजली लोड 1 किलोवाट है।
शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्या घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 3 किलोवाट सोलर सिस्टम लगाने के लिए 16 अप्रैल 2026 को आवेदन किया था। इसके बाद लूम सोलर प्राइवेट लिमिटेड और स्थानीय विक्रेता ट्रियाम्बी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा उनके परिसर में सोलर सिस्टम स्थापित किया गया। शिकायत में सिस्टम की लागत करीब ₹1.80 लाख बताई गई है, जिसके लिए बैंक ऋण लिया गया है और हर महीने ₹1,976 की EMI जमा की जा रही है।
लोड बढ़ाने की जानकारी दिए बिना प्लांट पंजीकृत करने का आरोप।
कंपनी की गलती का बोझ उपभोक्ता क्यों उठाए?प्रधानमंत्री सूर्या घर मुफ्त बिजली योजना आम परिवारों को सस्ती और राहतभरी ऊर्जा उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे में इस योजना के तहत सोलर सिस्टम लगवाने वाले उपभोक्ता को ही प्रक्रिया की कथित गलती का आर्थिक बोझ उठाना पड़े, तो यह गंभीर सवाल खड़ा करता है।
दिनेशपुर की उपभोक्ता श्रीमती सुलता अधिकारी ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दाखिल कर आरोप लगाया है कि उनका स्वीकृत बिजली लोड 1 किलोवाट था, जबकि संबंधित सोलर कंपनी और स्थानीय विक्रेता द्वारा 3.3 किलोवाट का सिस्टम पंजीकृत किया गया। इसके बाद ₹5,674 का अतिरिक्त बिजली बिल और ₹600 लोड एन्हांसमेंट शुल्क चुकाना पड़ा। उपभोक्ता ने सोलर सिस्टम के लिए ₹1.80 लाख का ऋण लिया है और हर महीने ₹1,976 की EMI भी चुका रही हैं।
सवाल यह है कि यदि कंपनी ने लोड संबंधी प्रक्रिया में लापरवाही की है तो उसकी कीमत उपभोक्ता क्यों चुकाए? उपभोक्ता ने कंपनी पर भरोसा करके योजना का लाभ लिया था। शिकायत में कानूनी नोटिस के बाद भी समाधान से दूरी बनाए रखने का आरोप भी लगाया गया है।
यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो जिम्मेदार कंपनी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उपभोक्ता को आर्थिक नुकसान, मानसिक परेशानी और अनावश्यक कार्यालयी चक्कर की भरपाई मिलना न्यायसंगत होगा। योजना जनता की सुविधा के लिए है, जनता को परेशान करने के लिए नहीं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि उपभोक्ता का स्वीकृत लोड 1 किलोवाट था, जबकि सोलर सिस्टम को करीब 3.3 किलोवाट क्षमता के रूप में पोर्टल पर पंजीकृत/चालू कर दिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि लोड एन्हांसमेंट की प्रक्रिया और उसके संभावित वित्तीय प्रभाव की जानकारी पहले से दी जानी चाहिए थी।
शिकायत के अनुसार इस प्रक्रिया के कारण UPCL की ओर से ₹5,674 का अतिरिक्त बिजली बिल/शुल्क लगा। बाद में लोड एन्हांसमेंट के लिए उपभोक्ता को ₹600 ऑनलाइन शुल्क भी जमा करना पड़ा। शिकायतकर्ता ने इन दोनों रकम को अपनी आर्थिक क्षति का हिस्सा बताया है।
कानूनी नोटिस के बाद भी समाधान का दावा
शिकायत में कहा गया है कि समस्या सामने आने के बाद अधिकृत प्रतिनिधि ने संबंधित कंपनी के कस्टमर केयर से संपर्क किया। इसके बाद 11 अगस्त 2026 को दोनों विपक्षी पक्षों को स्पीड पोस्ट, ई-मेल और व्हाट्सएप के माध्यम से 15 दिन का कानूनी नोटिस भेजा गया। शिकायतकर्ता के अनुसार डिलीवरी रिकॉर्ड से नोटिस प्राप्त होने की पुष्टि हुई, पर 27 अगस्त तक समस्या का समाधान अथवा लिखित जवाब प्राप्त नहीं हुआ।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि समस्या के समाधान के लिए प्रतिनिधि को UPCL कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़े, जिससे कामकाज प्रभावित हुआ और परिवार को मानसिक एवं आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
₹30 हजार मुआवजा और ₹10 हजार वाद व्यय की मांग
शिकायतकर्ता ने आयोग से ₹5,674 अतिरिक्त बिजली बिल और ₹600 लोड एन्हांसमेंट फीस, कुल ₹6,274 की राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस दिलाने की मांग की है। इसके अलावा मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न तथा कामकाज के नुकसान के लिए ₹30,000 मुआवजा और कानूनी कार्यवाही व नोटिस आदि पर हुए खर्च के लिए ₹10,000 वाद व्यय दिलाने की मांग की गई है।
शिकायत में सोलर सिस्टम की वारंटी अवधि के दौरान तकनीकी खराबी, मेंटेनेंस और आफ्टर-सेल्स सर्विस सुचारु रूप से उपलब्ध कराने का आदेश देने की भी मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने आयोग के समक्ष प्राधिकरण पत्र, नोटरीकृत शपथ पत्र, UPCL बिल व भुगतान रसीद, नेट मीटर रसीद, प्रधानमंत्री सूर्या घर योजना का आवेदन स्टेटस, DCR प्रमाणपत्र, लोड एन्हांसमेंट भुगतान रसीद, बैंक स्टेटमेंट, कानूनी नोटिस, स्पीड पोस्ट एवं डिलीवरी ट्रैकिंग रिपोर्ट, ई-मेल डिलीवरी प्रूफ, व्हाट्सएप चैट तथा पहचान पत्र सहित 12 प्रकार के दस्तावेज बतौर साक्ष्य संलग्न किए हैं।
मामला अब जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के समक्ष है और आयोग द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों एवं दोनों पक्षों के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
