अगस्त्यमुनि देवरा यात्रा विवाद: गेट तोड़ने के मामले में 52 लोगों पर मुकदमा, प्रशासन–श्रद्धालुओं में टकराव

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रुद्रप्रयाग।उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद अंतर्गत अगस्त्यमुनि में गुरुवार को महर्षि अगस्त्य महाराज की ऐतिहासिक देवरा यात्रा के दौरान उस समय भारी तनाव की स्थिति बन गई, जब पवित्र डोली को खेल मैदान स्थित गद्दीस्थल तक ले जाने को लेकर श्रद्धालुओं और प्रशासन के बीच टकराव हो गया। करीब साढ़े तीन घंटे तक चले हंगामे के बाद मैदान का लोहे का गेट तोड़ दिया गया, जिसके बाद हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में महर्षि अगस्त्य महाराज की पवित्र डोली मैदान में प्रवेश कर सकी।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


घटना के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए गेट तोड़ने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और कानून व्यवस्था भंग करने के आरोप में 52 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इसमें 12 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 40 अन्य अज्ञात आरोपियों की पहचान वीडियो फुटेज के आधार पर की जा रही है।


उत्तराखंड में रुद्रपुर और अगस्त्यमुनि की घटनाएँ एक ही सवाल को जन्म देती हैं—क्या विकास के नाम पर धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को लगातार संकुचित किया जा रहा है? रुद्रपुर में मोदी मैदान को स्टेडियम में बदलने का प्रस्ताव हो या अगस्त्यमुनि में महर्षि अगस्त्य महाराज की देवरा यात्रा के दौरान मैदान और गेट को लेकर हुआ टकराव, दोनों ही मामलों में प्रशासनिक सोच और जनभावनाओं के बीच गहरी खाई दिखाई देती है।
रुद्रपुर जैसे लाखों की आबादी वाले शहर में गांधी पार्क और मोदी मैदान ही बचे हुए प्रमुख सार्वजनिक मैदान हैं। गांधी पार्क पहले ही मूर्तियों और निर्माण से सिमट चुका है और अब मोदी मैदान—जो धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक आयोजनों का केंद्र रहा है—उस पर भी स्थायी निर्माण की तैयारी है, जबकि शहर में पहले से अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम और फुटबॉल मैदान मौजूद हैं।
वहीं अगस्त्यमुनि में देव डोली की सदियों पुरानी परंपरा को गेट और कंक्रीट संरचनाओं से टकराना पड़ा, जिससे तनाव और मुकदमों की स्थिति बनी। दोनों घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि विकास योजनाओं में स्थानीय परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक जरूरतों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। यह समय है जब सरकार को विकास और विरासत के बीच संतुलन बनाना होगा, अन्यथा ऐसे विवाद भविष्य में और


डोली के आगमन से पहले ही बना तनाव
गौरतलब है कि अगस्त्यमुनि बाजार में भगवान अगस्त्य ऋषि का प्राचीन मंदिर स्थित है, जिसे केदारघाटी के लगभग 380 गांवों का आराध्य देव माना जाता है। मंदिर से सटे विशाल मैदान को भी भगवान अगस्त्य से जुड़ा पवित्र स्थल माना जाता है। मान्यता है कि देवरा यात्रा के दौरान पवित्र डोली का इस मैदान में जाना अनिवार्य होता है और पहाड़ों में कई देव डोलियाँ गेट या पुल के नीचे से नहीं गुजरतीं।
बुधवार को जब भगवान अगस्त्य की पवित्र डोली मंदिर से उठकर मैदान की ओर रवाना हुई, तो मैदान में प्रवेश के लिए बने लोहे के गेट के नीचे से गुजरने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। श्रद्धालुओं का कहना था कि परंपरा के अनुसार डोली गेट के नीचे से नहीं जाएगी, जबकि प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था का हवाला देते हुए गेट हटाने से इनकार कर दिया। इसी बात को लेकर बुधवार दिन से लेकर रात तक मंदिर परिसर और बाजार क्षेत्र में तनाव बना रहा।
गुरुवार को भड़का आक्रोश, गेट तोड़ा
गुरुवार सुबह करीब 11 बजे डोली दोबारा मैदान की ओर रवाना हुई। जब गेट नहीं हटाया गया तो श्रद्धालुओं का आक्रोश बढ़ गया। दोपहर करीब 12 बजे से गेट हटाने के प्रयास शुरू हो गए। लगभग साढ़े तीन घंटे की मशक्कत और लगातार नोकझोंक के बाद शाम करीब 4 बजे श्रद्धालुओं ने गेट का ऊपरी हिस्सा तोड़ दिया। इसके बाद डोली मैदान में प्रवेश कर सकी।
इस दौरान पुलिस और श्रद्धालुओं के बीच कई बार तीखी बहस हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा। हंगामे के चलते केदारनाथ हाईवे पर कई घंटों तक लंबा जाम लगा रहा, जिससे तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्टेडियम निर्माण बना विवाद की बड़ी वजह
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे विवाद के पीछे खेल मैदान में बन रहा मिनी स्टेडियम भी एक बड़ी वजह है। सामाजिक कार्यकर्ता त्रिभुवन चौहान और अन्य ग्रामीण पिछले एक महीने से इस निर्माण का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह मैदान भगवान अगस्त्य की संपत्ति माना जाता है और यहां कंक्रीट निर्माण से धार्मिक परंपराओं और खेल गतिविधियों दोनों पर असर पड़ेगा।
वहीं प्रशासन का तर्क है कि विकास कार्यों को जानबूझकर बाधित करने के लिए धार्मिक यात्रा की आड़ ली जा रही है। प्रशासन का कहना है कि देवरा यात्रा के पारंपरिक मार्ग को लेकर मंदिर समिति से पूर्व में सहमति बन चुकी थी और उसी मार्ग पर व्यवस्थाएं की गई थीं।
जिलाधिकारी का सख्त रुख
घटना को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने सेक्टर मजिस्ट्रेट और पुलिस प्रशासन को ऐसे अराजक तत्वों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा जबरन डोली को खेल भवन के मुख्य गेट से ले जाने का दबाव बनाया गया और इसी उद्देश्य से सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।
उन्होंने बताया कि मामले में सरकारी कार्य में बाधा डालने, लोक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, शासकीय सेवकों के साथ अभद्र व्यवहार और आपराधिक षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि धर्म की आड़ में किसी भी प्रकार की अराजकता, हिंसा या कानून व्यवस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही वीडियो फुटेज के आधार पर दोषियों की पहचान कर सरकारी संपत्ति के नुकसान की रिकवरी भी की जाएगी।
इन लोगों पर दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस द्वारा जिन लोगों को नामजद किया गया है, उनमें त्रिभुवन चौहान पुत्र कुलदीप सिंह (निवासी देवर, थाना गुप्तकाशी), अनिल बैजवाल, राजेश बैजवाल, योगेश बैजवाल (सभी निवासी नाकोट, अगस्त्यमुनि), शेखर नौटियाल (सिल्ला बामण गांव), भानु चमोला (तिलवाड़ा), मिथुन सब्जी वाला (अगस्त्यमुनि), मकर लाल (फलई), हैप्पी असवाल (तिलवाड़ा), विपिन रावत और केशव अग्रवाल (जखन्याल गांव), प्रियाशु मोहन (तिलवाड़ा) सहित 40 अन्य लोग शामिल हैं।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
मुकदमे दर्ज होने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि प्रशासन ने धार्मिक आस्था और स्थानीय परंपराओं को नजरअंदाज किया है। वहीं दूसरी ओर प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बता रहा है।
फिलहाल अगस्त्यमुनि क्षेत्र में स्थिति सामान्य है, लेकिन यह घटना एक बार फिर उत्तराखंड में विकास परियोजनाओं और धार्मिक–सांस्कृतिक परंपराओं के बीच संतुलन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर गई है।


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