25 वर्षीय बीरेश्वर की उत्कृष्ट सेवा को देखते हुए सात जून को उन्हें कैप्टन पद पदोन्नति मिलनी थी लेकिन सेना के विमान से घर पहुंचा उनका तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर। सैन्य सम्मान के साथ सैकड़ों नम आंखों ने अंतिम विदाई दी।

जम्मू में राजौरी के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में चल रहे घेराबंदी कर आतंकियों की तलाश के लिए चलाए जा रहे सर्च अभियान के दौरान पांच असम रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी चोटी से फिसल कर गहरी खाई में गिर गए।

रविवार दोपहर बाद बलिदानी का पार्थिव शरीर पंतनगर एयरपोर्ट तक सेना के विमान से और वहां से आर्मी हेलीपैड अल्मोड़ा हेलीकाप्टर से लाया गया। जहां सैन्य अधिकारियों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
वहां से पांडेखोला स्थित आवास पर बलिदानी की पार्थिव देह पहुंचते ही लोग जुटने लगे। बलिदानी की दादी नंदी देवी, माता सरस्वती व पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी बदहवास हो गए।

अंतिम यात्रा विश्वनाथ घाट के लिए निकली तो सैन्य अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, पूर्व सैनिकों व आमजन ने बलिदानी के जयकारे लगाए तो माहौल गमगीन हो गया। चाचा तारा नाथ गोस्वामी और भाई अमित गोस्वामी ने मुखाग्नि दी।

जून 2024 में मिला था कमीशन
बीरेश्वर वर्ष 2023 में संयुक्त रक्षा सेवा (सीडीएस) परीक्षा उत्तीर्ण कर सेना में भर्ती हुए थे। आइएमए देहरादून में प्रशिक्षण के बाद जून 2024 में कमीशन मिला और वह थल सेना की पांच असम रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट बने।
बीरेश्वर गोस्वामी मूल रूप से बग्वालीपोखर के बाड़ी गांव के निवासी थे। उनका परिवार वर्तमान में अल्मोड़ा नगर के पांडेखोला में निवास करता है। पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी भनोली तहसील में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी व माता सरस्वती देवी बल्सा, हवालबाग में शिक्षिका हैं। भाई अमित भी सरकारी सेवा में हैं।
आपके लिए 150 शब्दों का शोक संदेश:
Writing
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों ने सैन्यभूमि उत्तराखंड के वीर सपूत, अल्मोड़ा निवासी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी के आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान सर्वोच्च बलिदान पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि लेफ्टिनेंट गोस्वामी ने मातृभूमि की रक्षा और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग कर वीरता, साहस और कर्तव्यपरायणता का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनका बलिदान पूरे देश के लिए गौरव और प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
राज्य आंदोलनकारियों ने कहा कि उत्तराखंड की वीर भूमि सदैव ऐसे रणबांकुरों को जन्म देती रही है, जिन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का नाम देश के वीर शहीदों में सदैव सम्मान और श्रद्धा के साथ लिया जाएगा।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति और संबल दें।
