अंकिता भंडारी हत्याकांड: सजा के बाद भी क्यों थम नहीं रहा जनआक्रोश?

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नैनीताल रुद्रपुर देहरादून वनंत्रा रिज़ॉर्ट में काम करने वाली युवती अंकिता भंडारी की हत्या को लेकर एक बार फिर उत्तराखंड का माहौल गरमा गया है। वर्ष 2022 में हुए इस जघन्य हत्याकांड में मई 2025 में अदालत द्वारा तीनों अभियुक्तों—पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता—को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। इसके बावजूद प्रदेश के कई हिस्सों में कैंडल मार्च, धरना-प्रदर्शन और सीबीआई जांच की मांग लगातार जारी है।
अदालत के फैसले के बाद राज्य सरकार ने इसे कानून के राज की जीत बताया, लेकिन जनता का एक बड़ा वर्ग इसे अधूरा न्याय मान रहा है। लोगों का कहना है कि सजा मिलना जरूरी था, परंतु हत्याकांड से जुड़े तथाकथित ‘VIP एंगल’ को लेकर जो सवाल उठे थे, उनका संतोषजनक जवाब आज तक नहीं मिल पाया है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड)
VIP एंगल को लेकर फिर तेज हुई बहस
अंकिता हत्याकांड की जांच के दौरान सामने आए कुछ वायरल ऑडियो, कॉल डिटेल्स और बयान शुरुआत से ही चर्चा में रहे। हालांकि एसआईटी जांच और ट्रायल के बाद दोष सिद्ध हुआ, लेकिन ‘VIP एंगल’ को लेकर उठी शंकाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकीं। हरिद्वार के एसपी (ग्रामीण) द्वारा हाल में दिए गए बयान, जिसमें VIP एंगल को सिरे से खारिज किया गया, के बाद विरोध और तेज हो गया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि वास्तव में जांच में कुछ भी छिपाया नहीं गया है, तो सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने में सरकार को आपत्ति क्यों है। उनका आरोप है कि सत्ता इस संवेदनशील मामले में पारदर्शिता दिखाने के बजाय सवाल उठाने वालों को राजनीतिक एजेंडा बताकर खारिज कर रही है।
सत्ता बनाम समाज की टकराहट
भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे आंदोलन को कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा प्रायोजित बताया है। वहीं, आंदोलनकारियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह किसी दल का नहीं, बल्कि एक बेटी को पूर्ण न्याय दिलाने का संघर्ष है। उनका तर्क है कि अंकिता भंडारी अब केवल एक नाम नहीं, बल्कि प्रदेश की बेटियों की सुरक्षा और सम्मान का प्रतीक बन चुकी है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच आम जनता का सवाल साफ है—क्या न्याय केवल अदालत के फैसले तक सीमित है, या फिर जनता के मन से संदेह दूर करना भी सरकार की जिम्मेदारी है?
महिला सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस मामले ने उत्तराखंड में कामकाजी महिलाओं, खासकर पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में कार्यरत युवतियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला सुरक्षा को लेकर सरकारी दावों पर भी विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने निशाना साधा है। उनका कहना है कि यदि एक हाई-प्रोफाइल केस में भी संदेह बना रहता है, तो आम महिलाओं के मामलों में न्याय की स्थिति क्या होगी?
जनता की मांग: पूरी सच्चाई सामने आए
प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग है कि मामले से जुड़े हर पहलू की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो, ताकि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका, यदि है, तो वह सामने आ सके। उनका कहना है कि जब तक संदेह के सभी सवालों का जवाब नहीं मिलता, तब तक यह मामला शांत नहीं होगा।
फिलहाल, अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक चेतना के केंद्र में है। सजा के बावजूद उठ रहे सवाल यह संकेत दे रहे हैं कि उत्तराखंड की जनता अब केवल फैसला नहीं, बल्कि पूरा सच जानना चाहती है।


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