

बस्तर में नक्सल मोर्चे पर सबसे बड़ी सफलता?टॉप माओवादी कमांडर माड़वी हिड़मा एनकाउंटर में ढेर, पत्नी समेत 6 नक्सली मारे गए

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
आलुरी सिताराम राजू (आंध्र प्रदेश) / बस्तर, 18 नवम्बर।
छत्तीसगढ़-बस्तर के घने जंगलों में दशकों तक खूनी इतिहास रचने वाला और सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना पीएलजीए का शीर्ष कमांडर माड़वी हिड़मा मंगलवार को सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया। मुठभेड़ आंध्र-प्रदेश के मरेदुमिली जंगल (आलुरी सिताराम राजू जिला) में हुई। कार्रवाई में हिड़मा के साथ उसकी पत्नी राजक्का सहित कुल छह नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मुठभेड़ सुबह उस समय शुरू हुई जब माओवादी दस्ते की मौजूदगी पर स्पेशल ऑपरेशन टीम जंगल में पहुंची। माओवादियों ने फायरिंग शुरू की, जिस पर जवाबी कार्रवाई में हिड़मा और अन्य नक्सली मारे गए। घटनास्थल से भारी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद बरामद किया गया है।
एक करोड़ से अधिक इनामी, दर्जनों हमलों का था मास्टरमाइंड?माड़वी हिड़मा पर कई राज्यों में मिलाकर एक करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था। वह सीपीआई (माओवादी) की पीपुल्स लिबरेशन गेरिला आर्मी (PLGA) की बटालियन नं. 1 का कमांडर और केंद्रीय समिति का सदस्य था।
उसका नाम देश के सबसे खतरनाक नक्सल कमांडरों की सूची में शीर्ष पर रहा —
▪ 2010 ताड़मेटला हमला — 76 CRPF जवान शहीद
▪ 2013 जीरम घाटी हमला — कांग्रेस नेताओं सहित 31 लोगों की मौत
▪ 2017 बुरकापाल हमला — 25 CRPF जवानों की शहादत
इसके अलावा हिड़मा कई जिलों में अपहरण, हत्या, विस्फोट, पुलिस पार्टी पर हमला और सरकारी प्रोजेक्ट को उड़ाने जैसी घटनाओं का मास्टरमाइंड माना जाता था।
नक्सल लैबोरेटरी में पला-बढ़ा, बचपन से हथियारों के बीच
हिड़मा का जन्म सुकमा के दुर्गम पुवर्ति गांव में हुआ था — वही इलाका जहां वर्षों तक माओवादियों की खुद की “जनताना सरकार” संचालित होती थी।
10वीं तक पढ़ा हिड़मा अंग्रेजी साहित्य और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक सिद्धांतों का अध्ययन करता था। बरामद दस्तावेजों से पता चला था कि वह अक्सर अंग्रेजी में नोट्स बनाता और अपना रणनीति-डायरी रखता था।
उसकी शारीरिक पहचान का सबसे अहम निशान बाएं हाथ की एक अंगुली का कटा होना था।
मां ने की थी आत्मसमर्पण की अपील, लेकिन…कुछ महीने पहले प्रदेश के उप मुख्यमंत्री सह गृहमंत्री विजय शर्मा ने हिड़मा के गांव पहुंचकर उसकी मां से मुलाकात की थी। मां ने बताया था कि उन्होंने कई बार बेटे से हथियार छोड़ आत्मसमर्पण करने की अपील की, लेकिन उसने संगठन नहीं छोड़ा।
आज उसकी मौत की खबर के बाद गांव में सन्नाटा पसरा है।
नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका – ऑपरेशन आगे जारी रहेगा।सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह कार्रवाई माओवादी संगठन की हेडकमांड संरचना को सबसे बड़ा झटका है। विश्लेषकों के मुताबिक हिड़मा के मारे जाने के बाद PLGA में नेतृत्व-शून्यता पैदा हो सकती है और नक्सल मोर्चे का मनोबल भी टूटेगा।
सुरक्षा बलों की ओर से बताया गया है कि ऑपरेशन अभी समाप्त नहीं हुआ है और इलाके में सर्च व डोमिनेशन ऑपरेशन जारी रहेगा, ताकि बची हुई नक्सली टुकड़ियों को भी पकड़ा जा सके।




