

अल्मोड़ा। देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र वादियों में स्थित चितई गोलू देवता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, न्याय और लोकविश्वास का ऐसा अद्भुत केंद्र है, जिसकी ख्याति देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक फैली हुई है। अल्मोड़ा मुख्यालय से लगभग आठ किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ मार्ग पर स्थित यह मंदिर कुमाऊं के आराध्य देव गोलू महाराज को समर्पित है, जिन्हें न्याय का देवता माना जाता है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
स्थानीय लोककथाओं के अनुसार गोलू देवता भगवान शिव के गण गौर भैरव के अवतार माने जाते हैं। कहा जाता है कि जब पृथ्वी पर अन्याय बढ़ने लगा और पीड़ितों को कहीं न्याय नहीं मिला, तब गोलू देवता ने न्याय की स्थापना के लिए अवतार लिया। यही कारण है कि आज भी जिन लोगों को प्रशासन, समाज या अदालतों से न्याय नहीं मिलता, वे चितई मंदिर पहुंचकर गोलू देवता के दरबार में अपनी अर्जी लगाते हैं।
इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा है स्टाम्प पेपर पर लिखी जाने वाली फरियाद। श्रद्धालु अपनी समस्याएं, मुकदमे, पारिवारिक विवाद, नौकरी, विवाह या अन्य मनोकामनाओं को लिखकर मंदिर में टांग देते हैं। मंदिर परिसर में हजारों नहीं बल्कि लाखों पत्र लटकते दिखाई देते हैं, जो इस बात के साक्षी हैं कि लोगों का विश्वास आज भी अटूट है।
मान्यता है कि जब भक्तों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है तो वे मंदिर में आकर घंटी चढ़ाते हैं। यही वजह है कि मंदिर के चारों ओर छोटी-बड़ी असंख्य घंटियां लटकी हुई हैं। जब पर्वतीय हवाएं इन घंटियों को स्पर्श करती हैं तो पूरा वातावरण दिव्य ध्वनि से गूंज उठता है, मानो स्वयं देवता अपने भक्तों की पुकार सुन रहे हों।
मंदिर का इतिहास चंद राजाओं के समय से जुड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी के आसपास हुआ था। सफेद घोड़े पर विराजमान गोलू देवता सत्य, न्याय और धर्म के प्रतीक माने जाते हैं।
आध्यात्मिक दृष्टि से चितई मंदिर यह संदेश देता है कि सत्य कभी पराजित नहीं होता। यहां पहुंचने वाला हर श्रद्धालु केवल अपनी समस्या लेकर नहीं आता, बल्कि एक अदृश्य शक्ति पर विश्वास लेकर लौटता है।
देवदार और चीड़ के वृक्षों के बीच स्थित यह मंदिर आज भी यह एहसास कराता है कि देवभूमि की आस्था केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि न्याय और सत्य की जीवंत परंपरा है। चितई गोलू देवता मंदिर वास्तव में वह दिव्य दरबार है, जहां हर घंटी एक कहानी कहती है और हर अर्जी विश्वास का प्रतीक बन जाती है।




