उत्तराखंड विधानसभा के आगामी सत्र से पहले कामकाज और कार्यसूची तय करने वाली कार्य मंत्रणा समिति की बैठक गैरसैंण के बजाए देहरादून में बुलाए जाने पर कांग्रेस ने बुधवार को राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।


गैरसैंण में दो दिवसीय विधानसभा सत्र पर यूकेडी का हमला, पुष्पेश त्रिपाठी ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
कार्य मंत्रणा समिति की बैठक देहरादून में कराने पर भी जताई आपत्ति, बेरोजगारी, पलायन और भ्रष्टाचार पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय देने की मांग
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा का दो दिवसीय सत्र 27 अक्टूबर से गैरसैंण में प्रस्तावित है। सत्र से पहले 24 अक्टूबर को कार्य मंत्रणा समिति की बैठक देहरादून में आयोजित किए जाने के फैसले पर कांग्रेस के साथ उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने भी सवाल उठाए हैं। उत्तराखंड क्रांति दल के नेता पुष्पेश त्रिपाठी ने गैरसैंण में सीमित अवधि का सत्र आयोजित करने और महत्वपूर्ण बैठक देहरादून में कराने के फैसले को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।
यूकेडी का कहना है कि जब विधानसभा का सत्र गैरसैंण में आयोजित किया जा रहा है, तो सत्र की कार्ययोजना तय करने वाली कार्य मंत्रणा समिति की बैठक भी वहीं होनी चाहिए। इससे गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में विकसित करने की सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती। पार्टी ने सवाल उठाया कि गैरसैंण को राजधानी के रूप में स्थापित करने की बात करने वाली सरकार वहां नियमित विधायी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कितनी गंभीर है।
दो दिन के सत्र में कैसे उठेंगे प्रदेश के बड़े सवाल?
पुष्पेश त्रिपाठी ने विधानसभा सत्र की अवधि को लेकर भी सवाल उठाए हैं। प्रदेश में बेरोजगारी, पलायन, भ्रष्टाचार, महंगाई, कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और आपदा प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं जैसे कई गंभीर मुद्दे हैं। ऐसे में केवल दो दिन के विधानसभा सत्र में इन विषयों पर पर्याप्त चर्चा और सरकार से जवाब मांगना चुनौतीपूर्ण होगा।
यूकेडी का मानना है कि विधानसभा सत्र केवल औपचारिकता पूरी करने का माध्यम नहीं होना चाहिए। सदन में जनसमस्याओं पर गंभीर बहस होनी चाहिए और सरकार को विपक्ष के सवालों का जवाब देने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। सत्र की अवधि सीमित होने से जनहित के अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा प्रभावित होने की आशंका है।
गैरसैंण को लेकर सरकार की गंभीरता पर सवाल
गैरसैंण उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी है और राज्य आंदोलन के दौरान इसे राजधानी के रूप में विकसित करने की मांग प्रमुख रही है। ऐसे में वहां विधानसभा सत्र आयोजित करना राज्य की भावनाओं और क्षेत्रीय संतुलन से जुड़ा विषय माना जाता है।
यूकेडी ने कार्य मंत्रणा समिति की बैठक देहरादून में आयोजित किए जाने के फैसले पर सवाल उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश की है। पार्टी का तर्क है कि गैरसैंण में विधानसभा की कार्यवाही के साथ-साथ उससे संबंधित महत्वपूर्ण गतिविधियों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
विपक्ष के सवालों पर सरकार के जवाब का इंतजार
गैरसैंण में प्रस्तावित दो दिवसीय सत्र को लेकर कांग्रेस और यूकेडी की आपत्तियों के बाद अब सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। विपक्ष की मांग है कि विधानसभा की कार्यवाही के लिए पर्याप्त समय निर्धारित किया जाए, ताकि प्रदेश की जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो सके।
अब देखना होगा कि सरकार विपक्ष के इन सवालों पर क्या रुख अपनाती है और विधानसभा के आगामी सत्र में बेरोजगारी, पलायन, भ्रष्टाचार तथा अन्य जनहित के मुद्दों को कितनी प्राथमिकता मिलती है।
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