

रुद्रपुर,हरिद्वार (उत्तराखंड)।उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में बुधवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब पुलिस कस्टडी में कोर्ट पेशी के लिए ले जाए जा रहे कुख्यात हिस्ट्रीशीटर विनय त्यागी पर दिनदहाड़े अंधाधुंध फायरिंग कर दी गई। यह वारदात लक्सर क्षेत्र के फ्लाईओवर पर हुई, जहां दो बाइक पर सवार बदमाशों ने पुलिस वैन को घेरकर गोलियां बरसाईं। इस हमले में विनय त्यागी समेत दो पुलिस जवान घायल हो गए, जबकि हमलावर हथियार लहराते हुए मौके से फरार हो गए।

गैंगस्टर, भू-माफिया और नशे का घुमता चक्र
उत्तराखंड की ताज़ा आपराधिक घटनाएँ यह साफ कर देती हैं कि अपराध अब किसी एक गैंगस्टर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गैंगस्टर–भू-माफिया–नशा का एक घुमता हुआ चक्र बन चुका है। पुलिस कस्टडी में गैंगस्टर पर फायरिंग, शहरों में बढ़ता नशा, अवैध संपत्तियाँ और बाहरी अपराधियों की पैठ—ये सब एक ही नेटवर्क की कड़ियाँ हैं। सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि सिस्टम के भीतर बैठे कुछ लोग इस चक्र को गति दे रहे हैं, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। जब तक नशे की सप्लाई चेन, गैंगस्टर नेटवर्क और भू-माफियाओं पर एक साथ सख्त, निष्पक्ष और निर्भीक कार्रवाई नहीं होगी, देवभूमि में अपराध यूँ ही घूमता रहेगा—नाम बदलकर, चेहरे बदलकर, पर असर वही रहेगा।
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बदमाश बेखौफ होकर फायरिंग के बाद भागते नजर आ रहे हैं। दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने न केवल पुलिस सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि संगठित अपराध के नेटवर्क की गहरी जड़ों को भी उजागर किया है।
कौन है हिस्ट्रीशीटर विनय त्यागी?
गैंगस्टर विनय त्यागी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के पुरकाजी का रहने वाला है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, उसके खिलाफ 46 से अधिक संगीन मुकदमे दर्ज हैं। इनमें हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, डकैती, अपहरण, रंगदारी और अवैध हथियारों की सप्लाई जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।
विनय त्यागी पर करोड़ों रुपये की हाई-प्रोफाइल चोरी और जमीन हड़पने के भी आरोप हैं। उसने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में अपराध के जरिए भारी संपत्ति खड़ी की। मेरठ के जागृति विहार में उसका मकान है, जबकि देहरादून में भी उसका फ्लैट बताया जाता है। बीते करीब 30 वर्षों से उसका परिवार देहरादून में रह रहा है।
1985 से अपराध की दुनिया में सक्रिय
विनय त्यागी का आपराधिक इतिहास करीब 40 साल पुराना है। उस पर पहला मुकदमा वर्ष 1985 में मेरठ के सिविल लाइन थाने में दर्ज हुआ था। इसके बाद मुजफ्फरनगर, मेरठ, हरिद्वार, देहरादून और दिल्ली में उसके खिलाफ लगातार केस दर्ज होते गए। उस पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई हो चुकी है।
हाई-प्रोफाइल चोरी से आया था सुर्खियों में
विनय त्यागी उस समय खासा चर्चा में आया, जब उस पर गाजियाबाद के एक प्रॉपर्टी डीलर की गाड़ी से चोरी का आरोप लगा। देहरादून में खड़ी उस गाड़ी से कई किलो सोना, करोड़ों रुपये कैश और बेनामी प्रॉपर्टी के अहम दस्तावेज चोरी किए गए थे। पुलिस के अनुसार, कैश और सोना तो बरामद कर लिया गया, लेकिन करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्तियों के कागजात अब तक नहीं मिल पाए हैं।
पत्नी भी रह चुकी है जनप्रतिनिधि
गैंगस्टर विनय त्यागी की पत्नी निशि त्यागी मुजफ्फरनगर में ब्लॉक प्रमुख रह चुकी हैं। अपराध और राजनीति के इस गठजोड़ को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
लक्सर कोर्ट में थी पेशी, रास्ते में हमला
करीब डेढ़ महीने पहले देहरादून पुलिस ने चोरी के एक मामले में विनय त्यागी को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा, लक्सर थाने में विनय त्यागी और उसकी पत्नी के खिलाफ एक करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मुकदमा भी दर्ज है। इसी मामले में उसकी लक्सर स्थित ACJM कोर्ट में पेशी होनी थी।
बुधवार को रुड़की जेल से पुलिस उसे पेशी के लिए लेकर जा रही थी। जैसे ही पुलिस वैन लक्सर फ्लाईओवर पर पहुंची, पहले से घात लगाए बैठे बदमाशों ने हमला कर दिया।
जाम का उठाया फायदा, पूरी प्लानिंग से वारदात
हरिद्वार के SSP प्रमेंद्र सिंह डोबाल के अनुसार, यह हमला पूरी तरह सुनियोजित था। फ्लाईओवर पर ट्रैफिक जाम था, जिसका फायदा उठाकर बदमाशों ने पुलिस वैन को निशाना बनाया। अचानक हुई फायरिंग से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने के लिए लोग इधर-उधर भागते नजर आए।
पुलिस पर बड़ा सवाल
दिनदहाड़े पुलिस कस्टडी में गैंगस्टर पर फायरिंग और हमलावरों का फरार हो जाना, सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। SSP के मुताबिक, बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं। घायल विनय त्यागी और दोनों पुलिस जवानों को हायर सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
निष्कर्ष
यह घटना सिर्फ एक गैंगस्टर पर हमला नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था को दी गई खुली चुनौती है। सवाल यह है कि क्या संगठित अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे पुलिस कस्टडी तक सुरक्षित नहीं रहने देते? और क्या यह हमला किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क या साजिश की ओर इशारा करता है—जिसके तार उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड तक फैले हैं?
जांच के नतीजे ही बताएंगे कि लक्सर फ्लाईओवर पर बरसी गोलियों के पीछे कौन और क्यों था।




