उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य की ओर से अपने पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है। मंत्री ने अपने पति पर पहली शादी छिपाकर विवाह करने, मारपीट, कथित जातिसूचक अपमान, दस्तावेजों में जालसाजी और अपनी हत्या की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में उन्होंने अपने नाबालिग बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।
15 अक्टूबर 2026 की शाम देहरादून की कैंट कोतवाली में शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किए जाने की खबर है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, एफआईआर में लगाए गए आरोप अभी जांच का विषय हैं। इन्हें अदालत में सिद्ध हुआ अपराध नहीं माना जा सकता।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट उत्तराखंड | देश-दुनिया की खबरों पर नजर
पहाड़ की बेटी, हिम्मत मत हारना… तुम्हारे संघर्ष में पूरा उत्तराखंड तुम्हारे साथ है!
पहाड़ की बेटी रेखा आर्य जी, इस कठिन घड़ी में हमारी संवेदनाएं आपके साथ हैं। एक महिला का दर्द, उसका आत्मसम्मान और न्याय के लिए उसकी लड़ाई किसी पद या राजनीतिक पहचान की मोहताज नहीं होती। जब जीवन के सबसे करीबी रिश्तों से पीड़ा मिलने का आरोप सामने आए, तो उस दर्द को शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता।
आज हमारा संदेश साफ है—पहाड़ की बेटी, हिम्मत मत हारना! तुम्हारे सम्मान, सुरक्षा और न्याय की लड़ाई में पूरा उत्तराखंड तुम्हारे साथ खड़ा है।
यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष की नहीं, बल्कि एक महिला के सम्मान, उसके अधिकारों और न्याय की उम्मीद की लड़ाई है। अपराधी कोई भी हो, कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं होना चाहिए। हम सरकार, पुलिस और प्रशासन से अपेक्षा करते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, हर आरोप की सच्चाई सामने आए और न्याय सुनिश्चित किया जाए।
रेखा जी, पहाड़ की बेटियों ने हमेशा विपरीत परिस्थितियों में साहस और आत्मसम्मान की मिसाल पेश की है। यह कठिन समय भी आपके धैर्य की परीक्षा है। न्याय की राह पर सत्य और कानून का साथ बना रहे।
एक संकल्प, एक आवाज, एक उत्तराखंड—पहाड़ की बेटी के सम्मान और न्याय के लिए हम तुम्हारे साथ हैं, पूरा प्रदेश तुम्हारे साथ है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर
2004 में विवाह, पहली शादी छिपाने का आरोप
रेखा आर्य ने अपनी शिकायत में बताया कि उनका विवाह 6 जुलाई 2004 को उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी गिरधारी लाल साहू के साथ हुआ था। मंत्री का आरोप है कि विवाह के समय साहू ने खुद को अविवाहित बताया, जबकि उनकी पहले से शादी हो चुकी थी और पहली शादी से बच्चे भी थे।
शिकायत के मुताबिक, कुछ समय बाद उन्हें पति की पहली शादी और बच्चों के बारे में जानकारी मिली। रेखा आर्य का कहना है कि पारिवारिक परिस्थितियों और बच्चे के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने लंबे समय तक इस मामले को सार्वजनिक नहीं किया। अब उन्होंने पति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
इस आरोप की वास्तविकता का निर्धारण पुलिस की जांच, उपलब्ध दस्तावेजों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
कई महिलाओं से संबंध और प्रताड़ना का आरोप
मंत्री ने शिकायत में आरोप लगाया है कि उनके पति के अन्य महिलाओं के साथ संबंध रहे हैं। उनके मुताबिक, इस विषय पर आपत्ति जताने के बाद पति ने कथित तौर पर माफी भी मांगी, लेकिन व्यवहार में सुधार नहीं हुआ।
रेखा आर्य ने मारपीट, गाली-गलौज और मानसिक प्रताड़ना के आरोप भी लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, सरकारी आवास में कर्मचारियों की मौजूदगी में उनके लिए जातिसूचक अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया।
मंत्री की शिकायत में घरेलू हिंसा, मानसिक उत्पीड़न और कथित जातिगत दुर्व्यवहार के गंभीर पहलू सामने आए हैं। इनकी पुष्टि के लिए पुलिस को संबंधित व्यक्तियों के बयान, उपलब्ध साक्ष्य और अन्य परिस्थितियों की जांच करनी होगी। गिरधारी लाल साहू का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
ऑडियो रिकॉर्डिंग से हत्या की साजिश का आरोप
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू रेखा आर्य की ओर से लगाया गया हत्या की साजिश का आरोप है। मंत्री का दावा है कि उन्हें एक ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली, जिसमें उनके पति कथित तौर पर एक महिला से बातचीत के दौरान उन्हें जान से मारने की योजना पर चर्चा करते सुनाई देते हैं।
रेखा आर्य ने अपनी और अपने नाबालिग बच्चों की जान को खतरा बताते हुए पुलिस से सुरक्षा और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में अपनी पीड़ा भी व्यक्त की।
हालांकि, ऑडियो की प्रामाणिकता, बातचीत में शामिल व्यक्तियों की पहचान, संदर्भ और कथित साजिश की वास्तविकता की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। रिकॉर्डिंग को फिलहाल जांच के लिए महत्वपूर्ण बताया गया साक्ष्य माना जा सकता है, न कि हत्या की साजिश का अंतिम प्रमाण।
एफआईआर में कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?
उपलब्ध समाचार विवरण के अनुसार, मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की निम्नलिखित धाराओं का उल्लेख किया गया है:
धारा 120-B — आपराधिक षड्यंत्र।
धारा 323 — स्वेच्छा से चोट पहुंचाना।
धारा 420 — धोखाधड़ी।
धारा 467 — महत्वपूर्ण दस्तावेज या मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाजी।
धारा 468 — धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी।
धारा 471 — जाली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना।
धारा 495 — पूर्व विवाह छिपाकर दोबारा विवाह करने से संबंधित अपराध।
धारा 498-A — पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता।
धारा 504 — जानबूझकर अपमान, जिससे शांति भंग होने की आशंका हो।
धारा 506 — आपराधिक धमकी।
इसके अलावा, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधान भी लगाए जाने की खबर है।
महत्वपूर्ण: SC/ST एक्ट की धाराओं के उल्लेख में अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर दिखाई देता है। अंतिम प्रकाशन से पहले एफआईआर की प्रमाणित प्रति से धाराओं का मिलान करना जरूरी है। इसी प्रकार, लागू कानूनी प्रावधानों की पुष्टि पुलिस अभिलेख से की जानी चाहिए।
गिरधारी लाल साहू का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड: हाईकोर्ट के दस्तावेजों में क्या दर्ज है?
इस मामले के बाद गिरधारी लाल साहू के पुराने मामलों का विवरण भी चर्चा में आया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट के वर्ष 2016 के न्यायिक आदेशों में उनके खिलाफ पूर्व में दर्ज विभिन्न आपराधिक मामलों से संबंधित कार्यवाही का उल्लेख मिलता है।
हाईकोर्ट में गिरधारी लाल साहू ने किच्छा थाने में दर्ज अलग-अलग एफआईआर को चुनौती देते हुए आपराधिक रिट याचिकाएं दायर की थीं। इन मामलों में जमीन के सौदों से जुड़े कथित धोखाधड़ी, जालसाजी और धमकी के आरोप शामिल थे।
5 अगस्त 2016 के एक न्यायिक निर्णय में अदालत ने सरकारी पक्ष की ओर से प्रस्तुत आपराधिक मामलों की सूची का उल्लेख किया। उसमें विभिन्न वर्षों में दर्ज मामलों और अलग-अलग आरोपों का जिक्र था। इनमें मारपीट, गाली-गलौज, गुंडा एक्ट, हत्या के प्रयास, हत्या, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे विषय शामिल बताए गए।
पुराने रिकॉर्ड को समझने के लिए तीन बातें महत्वपूर्ण हैं।
पहली, मुकदमा दर्ज होना और दोषसिद्धि होना अलग-अलग बातें हैं। किसी एफआईआर या आरोप के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
दूसरी, वर्ष 2016 के न्यायिक आदेश में साहू के वकील की ओर से यह दलील दर्ज है कि एक मामले को छोड़कर अन्य मामलों में उन्हें बरी किया जा चुका था। वकील के अनुसार, भारतीय दंड संहिता की धारा 302 से संबंधित एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कार्यवाही पर रोक लगाई थी। यह उस समय अदालत में प्रस्तुत पक्ष की दलील थी। इससे सभी मामलों की वर्तमान स्थिति स्वतः प्रमाणित नहीं होती।
तीसरी, इन पुराने मामलों के अंतिम नतीजों, बरी होने के आदेशों और किसी लंबित मुकदमे की मौजूदा स्थिति का अलग-अलग सत्यापन जरूरी है।
इसलिए तथ्यात्मक रूप से यह कहना उचित होगा कि गिरधारी लाल साहू का नाम पूर्व में कई आपराधिक मामलों से संबंधित न्यायिक कार्यवाहियों में सामने आया था। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि उन सभी मामलों में उन्हें दोषी ठहराया गया था।
जैन दंपती हत्याकांड और जमीन विवादों से भी जुड़ा नाम
गिरधारी लाल साहू के कथित पुराने विवादित अतीत को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों में बरेली के चर्चित जैन दंपती हत्याकांड और जमीन के सौदों से जुड़े विवादों का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि, किसी हत्याकांड में नाम सामने आना, आरोपी बनाया जाना, मुकदमा चलना और अदालत से दोषी ठहराया जाना अलग-अलग कानूनी स्थितियां हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि जैन दंपती हत्याकांड में गिरधारी लाल साहू की दोषसिद्धि हुई थी। उनकी कथित भूमिका, संबंधित एफआईआर और अदालत के अंतिम फैसले की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
इसी तरह, जमीन संबंधी पुराने मामलों में हाईकोर्ट के आदेश महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं, लेकिन प्रत्येक मुकदमे का अंतिम परिणाम जानने के लिए संबंधित न्यायिक अभिलेख देखना जरूरी है।
अब पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
रेखा आर्य की शिकायत के बाद पुलिस के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। क्या विवाह के समय पहली शादी छिपाई गई थी? क्या कंपनी के निदेशक पद से हटाने के लिए कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेज तैयार किए गए? क्या मंत्री के साथ मारपीट और जातिसूचक अपमान हुआ? और सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या प्रस्तुत ऑडियो में वास्तव में किसी आपराधिक साजिश की बातचीत है?
इन सवालों के जवाब दस्तावेजों की जांच, ऑडियो की फॉरेंसिक पड़ताल, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों से सामने आ सकते हैं। पुलिस की जांच ही तय करेगी कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण हैं या नहीं।
फिलहाल, इस मामले में शिकायतकर्ता एक वरिष्ठ मंत्री हैं और आरोप उनके पति के खिलाफ हैं। इसलिए जांच की निष्पक्षता, शिकायतकर्ता तथा बच्चों की सुरक्षा और आरोपी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना—तीनों महत्वपूर्ण हैं।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की टिप्पणी
यह मामला केवल एक हाई-प्रोफाइल वैवाहिक विवाद नहीं है। इसमें कथित घरेलू हिंसा, वैवाहिक धोखे, दस्तावेजी जालसाजी, जातिगत अपमान और हत्या की साजिश जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
कानून के सामने पद, राजनीतिक प्रभाव और पारिवारिक संबंध किसी को विशेष छूट नहीं देते। लेकिन न्याय का मूल सिद्धांत यह भी है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और दोष का निर्धारण साक्ष्यों तथा अदालत की प्रक्रिया के आधार पर किया जाए।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर
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रिपोर्ट को संक्षिप्त समाचार बनाएं
आरोप और तथ्य अलग करें
