🌧️ धन सिंह रावत का ‘इंद्रदेव’ मोबाइल ऐप!
कहानी की शुरुआत होती है सूबे के शिक्षा और उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के उस ऐतिहासिक और ‘वैज्ञानिक’ दावे से जिसमें उन्होंने सीधे कुदरत को ही चुनौती दे डाली थी। एक प्रेस वार्ता में मंत्री जी ने बड़ी गंभीरता से देश को बताया कि उत्तराखंड सरकार एक ऐसा मोबाइल ऐप तैयार करवा रही है, जिसके जरिए बारिश को जब चाहें आगे-पीछे या कम-ज्यादा किया जा सकता है।
जनता यह सोचकर हैरान थी कि अब तक तो लोग धूप और छांव के लिए ऐप पर वेदर रिपोर्ट देखते थे, लेकिन धन सिंह जी की बदौलत अब लोग मोबाइल की सेटिंग में जाकर ‘ब्राइटनेस’ की तरह ‘बारिश’ भी बढ़ा सकेंगे। सोशल मीडिया पर लोगों ने चुटकी लेते हुए कहा, “लगता है मंत्री जी सीधे इंद्रदेव के क्लाउड स्टोरेज (Cloud Storage) से डेटा हैक करने की तैयारी में हैं!”
🌐 महेंद्र भट्ट का खत्म हुआ ‘नेट’ (NEET)!
अभी जनता बारिश वाले ऐप की सेटिंग ढूंढ ही रही थी कि हाल ही में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने छात्रों की धड़कनें बढ़ा दीं। पूरे देश में जब NEET (नीट) परीक्षा के घोटाले को लेकर हाहाकार मचा हुआ था, तब महेंद्र भट्ट जी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और पूरे जोश में ‘NEET’ को एक या दो बार नहीं, बल्कि पूरे 10 से ज्यादा बार ‘NET’ (नेट) कह डाला!
प्रेस वार्ता में वो बार-बार बोलते रहे, “नेट का पेपर… नेट का पेपर…” बस फिर क्या था, मीमर्स और छात्रों को नया मसाला मिल गया। सोशल मीडिया पर यह मजाक तेजी से वायरल हो गया कि “लगता है सांसद जी के मोबाइल का रोज का 1.5 GB डेटा (Net) खत्म हो गया है, इसीलिए उनके मुंह से नीट की जगह सिर्फ नेट ही नेट निकल रहा है!” हालांकि बाद में ट्रोल होने के बाद उन्होंने इस जुबान फिसलने पर सफाई देते हुए माफी भी मांगी।
🧬 त्रिवेंद्र सिंह रावत का ‘कोरोना का जीने का अधिकार’
उत्तराखंड के सियासी इतिहास में हास्य का तड़का लगाने में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी पीछे नहीं रहे हैं। कोरोना महामारी के दौर में जब पूरी दुनिया वैक्सीन ढूंढ रही थी, तब त्रिवेंद्र जी ने एक गहरा दार्शनिक और मजाकिया बयान दे डाला था। उन्होंने कहा था कि “कोरोना भी एक जीवित प्राणी (Living Organism) है और उसे भी बाकी सब की तरह जीने का पूरा अधिकार है!”
जनता स्तब्ध रह गई कि इंसान तो अपनी जान बचाने के लिए मास्क लगा रहा है, और यहाँ वायरस के ‘मानवाधिकारों’ (या वायरस-अधिकारों) की पैरवी की जा रही है।
👖 तीरथ सिंह रावत का ‘फटी जींस’ (Ripped Jeans) ज्ञान
हास्य और विवादों की इस कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का नाम न आए, ऐसा कैसे हो सकता है? मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने महिलाओं के कपड़ों पर ऐसा बयान दिया जो महीनों तक मीम्स की दुनिया पर राज करता रहा। उन्होंने एक हवाई यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि एक महिला जो एनजीओ चलाती है, वो फटी हुई जींस (Ripped Jeans) पहनकर सफर कर रही थी, जिससे समाज में गलत संस्कार जा रहे हैं। इसके बाद पूरे देश की महिलाओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने फटी जींस में अपनी तस्वीरें पोस्ट कर तीरथ जी के इस ‘फैशन ज्ञान’ को जमकर ट्रोल किया था।
🎬 निष्कर्ष: ‘डिजिटल देवभूमि’ का नया रूप
अगर इन सभी कड़ियों को जोड़ा जाए तो ऐसा लगता है कि उत्तराखंड के नेता अब देवभूमि को ‘डिजिटल और हाई-टेक देवभूमि’ बनाने की ओर अग्रसर हैं। जहां:
धन सिंह रावत जी के ऐप से डिजिटल बारिश होगी,
लेकिन उस बारिश को चालू करने के लिए महेंद्र भट्ट जी का ‘नेट’ (NEET) ऑन होना जरूरी है,
इस बारिश में यदि कोई भीगेगा तो वो फटी जींस पहनकर नहीं जा सकता (तीरथ जी के आदेशानुसार),
और हां, इस डिजिटल मौसम का आनंद लेते समय कोरोना वायरस के जीने के अधिकार का भी पूरा ध्यान रखना होगा!
उत्तराखंड के नेताओं का ‘हाई-टेक’ और ‘हाई-डेटा’ दरबार: जब ऐप से बरसी बारिश और खत्म हो गया ‘नेट
