हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की खबर का असर — एलयूसीसी घोटाले पर सीबीआई की बड़ी कार्रवाई शुरू?मेहनत की कमाई लुटी, जीवनभर का जख्म मिला.. LUCC चिटफंड घोटाले के पीड़ितों का दर्द

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हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की खबर का असर — एलयूसीसी घोटाले पर सीबीआई की बड़ी कार्रवाई शुरू

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

उत्तराखंड में बीते छह वर्षों में नौ जिलों तक फैल चुके एलयूसीसी चिटफंड घोटाले ने हजारों निवेशकों की मेहनत की कमाई को निगल लिया। शुरू में मोटा मुनाफ़ा दिखाकर भरोसा जीतने वाली कंपनी ने गढ़वाल मंडल में सबसे ज्यादा नेटवर्क फैलाया। हालात ऐसे बने कि सैकड़ों लोग खुद एजेंट बन गए और लाखों रुपये झोंकते चले गए। लेकिन जब ठगी का सच सामने आया तो निवेशकों की उम्मीदें टूट गईं — जिलास्तर से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक हजारों लोग धरना और प्रदर्शन करते पहुंचे।

जनदबाव और मीडिया की लगातार आवाज़, खासकर हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की खोजी रिपोर्टिंग के बाद सरकार हरकत में आई।
नतीजतन, एसआईटी गठित हुई और अब मामला सीबीआई के सुपुर्द है।

हाईकोर्ट ने सरकार को सख्त निर्देश

सीबीआई या जांच में किसी भी तरह की बाधा न हो, इसके लिए हाईकोर्ट ने सीधे मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड तुरंत एजेंसी को सौंपे जाएं।

फिल्म अभिनेता भी जांच के दायरे में

सीबीआई की एफआईआर में 46 आरोपी नामजद हैं, जिनमें बॉलीवुड अभिनेता श्रेयस तलपड़े और आलोक नाथ भी शामिल हैं, जिन्होंने कंपनी के ब्रांड एंबेसडर के रूप में प्रचार किया था। कई लोगों ने इन्हीं पर भरोसा करके पैसे लगाए थे। दोनों कलाकारों को सीबीआई के सामने पेश होना पड़ सकता है।

मुख्य सरगना समीर अग्रवाल पर बड़ा सवाल

घोटाले का मास्टरमाइंड समीर अग्रवाल दो साल से ज्यादा समय से फरार है। उसके दुबई में होने की संभावना जताई जा रही है।
लुक आउट नोटिस और कई राज्यों में इनाम जारी किए जाने के बावजूद अब तक रेड कॉर्नर नोटिस जारी नहीं हुआ — यही सबसे बड़ा सवाल है।

जांच अजय मिश्रा के हाथ में

सीबीआई की देहरादून शाखा में केस दर्ज है और निरीक्षक अजय कुमार मिश्रा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। केवल एफआईआर ही 158 पेज की है — और राज्य की अब तक की सबसे लंबी केस फाइलों में शामिल हो चुकी है।


असर जारी रहेगा

एलयूसीसी घोटाले ने आर्थिक ही नहीं, सामाजिक विश्वास को भी चोट पहुंचाई है। हजारों परिवार न्याय की राह देख रहे हैं, जबकि मुख्य आरोपी विदेश में ऐश कर रहा है।
अब सभी की निगाहें सीबीआई पर हैं — क्या रेड कॉर्नर नोटिस जारी होगा? क्या निवेशकों की रकम वापस मिलेगी?
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स इस घोटाले की परतें खोलने और पीड़ितों की आवाज उठाने का सिलसिला जारी रखेगा।


किसी ने बेटी की शादी के लिए हर महीने किस्त जमा की, जबकि कुछ ने बुढ़ापे में आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए पैसे दिए। बाद में दिन-रात मेहनत करके जमा की गई रकम खोई और जीवनभर का जख्म मिल गया। कुछ ने अपने परिजन और रिश्तेदारों को भी जोड़ा। देखते ही देखते उनका निवेश हजारों से बढ़कर लाखों रुपये तक पहुंच गया। इस रकम से कोई घर बनाना चाहता था, कोई बच्चों की शादी करना चाहता था तो कोई जमीन खरीदना चाहता था। लेकिन किसी को क्या मालूम था कि उनकी गाढ़ी कमाई तरह डूब जाएगी। हालांकि, अब इस मामले में सीबीआई जांच से उनको इंसाफ की उम्मीद जगी है। एलयूसीसी में निवेश कर लाखों रुपये गंवाने के बाद लोगों के मायूसी है। पीड़ित लोगों को अब सीबीआई जांच से न्याय की उम्मीद जगी है। उनमें उम्मीद जगी है कि उनका पैसा उन्हें मिलेगा और दोषियों को सजा मिलेगी।

पड़ोसियों की देखा-देखी फंस गए मदन

ऋषिकेश के मदन लाल पड़ोसियों की देखादेखी एलयूसीसी के जाल में फंस गए। उन्होंने इस सोसायटी में 04 लाख रुपये निवेश किए थे। बाद में वो भी एजेंट बन गए। 05 सौ, 01 हजार रुपये, 05 हजार रुपये तक रुपये जमा करने के लिए लोगों के पास जाते थे। उनका कमीशन था। मदन लाल ने अपना कमीशन भी इस सोसायटी में जमा कराया था। पड़ोस के लोग निवेश कर रहे थे, तो वे भी बचत योजना में शामिल हो गए थे। आखिर में वे इस कंपनी से ठगे गए।

श्रेयस तलपड़े, आलोक नाथ आते थे सेमिनार में

ऋषिकेश निवासी रश्मि ने बताया कि वो 2018 में एलयूसीसी से जुड़ीं। तब से उन्होंने 24 लाख रुपये जमा कराए थे। बताया गया था कि यह सोसायटी कृषि मंत्रालय से संबद्ध है। इसके सेमिनार में फिल्म अभिनेता आलोक नाथ व श्रेयस तलपड़े आते थे। रश्मि ने बताया कि उन्होंने बच्चों के भविष्य के लिए रुपये जमा कराए थे। वो अपने चाचा की बहू के कहने पर एलयूसीसी से जुड़ीं। उन्होंने सवाल किया कि इस सोसायटी के ऑफिस मुख्य जगह थे तो सरकार, एलआईयू डिपार्टमेंट क्या कर रहा था।

पिता की मदद करना चाहती थी तृप्ति नेगी

शिवपुर कोटद्वार की तृप्ति नेगी ने एलयूसीसी के झांसे में आकर 8.47 लाख रुपये गंवाए। उनके पिता किसान हैं, जबकि मां आशा कार्यकर्ता। परिवार की स्थिति सुधारने के लिए वो तीन साल पहले एलयूसीसी में बतौर एजेंट काम करने लगीं। उन्होंने अपने कमीशन के रुपये भी कंपनी में जमा करा दिए। सोचा था कि बाद में एकमुश्त रुपये मिलेंगे तो परिवार की मदद हो जाएगी। उनकी शादी का खर्च भी निकल जाएगा। लेकिन, पता नहीं था रुपये और मेहनत दोनों डूब जाएंगे।

कमीशन मिला तो उसे भी फिक्स कर दिया

ऋषिकेश निवासी रंजना ने बताया कि उन्होंने एलयूसीसी में 25 लाख रुपये गंवाए हैं। इस सोसायटी के एजेंट होने के नाते वो लोगों से रुपये लेकर जमा कराती थीं। जो कमीशन मिलता था, वो भी उन्होंने सोसायटी में फिक्स करा दिया था। बताया गया था कि तीन साल में रुपये मिल जाएंगे। लेकिन, इसके बाद कंपनी बंद हो गई। अब लोग रात-दिन परेशान कर रहे हैं। उनको बताया गया था कि यह सोसायटी सहकारिता विभाग से संबद्ध है। लेकिन यह फर्जी निकली, रकम लेकर चंपत हो गई।

अपने साथ पिता और पत्नी के नाम पर भी लगाए रुपये

टिहरी निवासी देवराज ने एलयूसीसी में 12 लाख रुपये गंवाए। उन्होंने खुद के साथ पिता और पत्नी के नाम पर भी इस सोसायटी में रुपये जमा कराए थे। यहां तक वो अपनी प्राइवेट नौकरी छोड़कर एजेंट तक बन गए। उनको कई प्रकार के कागज दिखाए गए थे, तो भरोसा हो चला था। उन्होंने कई और लोगों को भी इस सोसायटी से जोड़ा। सोचा था कि इस बचत से बच्चों के लिए जमीन लेकर छोड़ दूंगा। लेकिन, रुपये भी गए, निजी कंपनी की नौकरी भी। अब देवराज दुकान चलाते हैं।

कई महिलाएं गुजर रही थीं तनाव से

सामाजिक कार्यकर्ता आशतोष ने कहा कि इस कंपनी में अधिकांश महिलाओं ने निवेश किया था। वह सेविंग को बढ़ाना चाहती थी। जब ठगी का पता लगा तो कई महिलाएं अंदर से बुरी तरह टूट चुकी थी। संभावना या अनहोनी वाला कदम उठाने तक थी। ऐसे में वह इस केस में जुड़े।

खुद के साथ दूसरों की रकम भी लगा बैठे

टिहरी निवासी मनीषा सजवाण वर्तमान में ऋषिकेश में रहती हैं। उन्होंने बताया कि वो एक परिचित के कारण एलयूसीसी से जुड़ी थीं। पहले उनकी मां और फिर उन्होंने निवेश करना शुरू किया। बाद में वो एक एजेंट के तौर पर काम करने लगीं। खुद के 50 लाख और कुल 1.37 करोड़ रुपये वो इस सोसायटी में जमा करा चुकी थीं। मनीषा ने बताया कि अब उनकी शादी हो चुकी। वो इस रकम से बिजनेस करना चाहती थीं। वर्तमान में वो बीडीसी मेंबर हैं।


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