बिहार में सीएमनीतीश कुमार ने नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है. सीएम के साथ 26 अन्य मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली. इनमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम रहा राष्ट्रीय लोक मोर्चा कोटे से मंत्री बने दीपक प्रकाश का.

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दीपक प्रकाश राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं. बड़ी बात यह की दीपक प्रकाश न तो बिहार विधानसभा की सदस्य हैं और न ही बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

दीपक प्रकाश ने बिहार विधानसभा चुनाव में सासाराम सीट से चुनाव लड़ रही अपनी मां स्नेह लता कुशवाहा की चुनाव प्रचार की कमान को भी संभाला था. 22 अक्टूबर 1989 को जन्मे दीपक प्रकाश ने कंप्यूटर साइंस से बैचलरआफ इंजीनियरिंग की है.

कहां से पूरी की है पढ़ाई?

दीपक प्रकाश ने एमआईटीमणिपाल से डिग्री को हासिल

सरल और मृदु भाषी दीपक प्रकाश ने प्रेम विवाह किया है. उनकी पत्नी का नाम स्मृति मिश्रा है. बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान स्मृति मिश्रा ने भी दीपक प्रकाश के साथ चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया था. स्नेहलता, जिन्होंने सासाराम सीट से बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा था, 25,000 से ज़्यादा वोटों से जीतीं. उन्हें अपने करीबी विरोधी, RJD उम्मीदवार सत्येंद्रसाहा के मुकाबले 1,05,006 वोट मिले. वहीं उन्हें साहा को 79,563 वोट मिले थे.

नीतीश कुमार को 20 नवंबरको विधानसभा के सेंट्रल हॉल में NDA के 202 विधायकों की मीटिंग में विधयाक दल का नेता चुना गया था. JD(U) ने एक अलग मीटिंग में नीतीश को अपने विधायक दल का नेता चुना था. नेशनल डेमोक्रेटिकअलायंस (NDA) पिछले हफ़्ते बिहार में विधानसभा चुनाव में 243 में से 202 सीटों के साथ भारी बहुमत हासिल करके सत्ता में वापसी की है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार के चुनाव में BJP को 89, JD(U) को 85, LJP(RV) को 19, HAM को 5 और RLM को 4 सीटें मिलीं.

भाजपा कोटे से कितने मंत्री

बीजेपी की ओर से जिन नेताओं को मंत्री बनाया गया है, उनमें सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, दिलीप जायसवाल, नितिन नवीन, सुरेंद्र मेहता, संजय टाइगर, रामकृपाल यादव, रमा निषाद, लखेंद्र पासवान, मंगल पांडे, श्रेयसी सिंह, अरुण शंकर प्रसाद, नारायण शाह और प्रमोद कुमार चंद्रवंशी शामिल हैं.

जदयू कोटे से कितने मंत्री

जेडीयू कोटे से मुख्यमंत्री नीतीश के साथ जिन नेताओं को जगह मिली है, उनमें अशोक चौधरी, सुनील कुमार, विजेंद्र यादव, लेसी सिंह, श्रवण कुमार, मदन सहनी, विजय चौधरी और जमां खान का नाम शामिल है. इसके अलावा एलजेपी से दो और जीतन राम मांझी व उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से एक-एक मंत्री बनाए गए हैं. इस पूरी सूची में जमां खान एकमात्र मुस्लिम मंत्री हैं.

चैनपुर सीट से विधायक चुने गए

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जमां खान ने कैमूर की चैनपुर सीट से जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ा था. उन्हें लगभग 70 हजार से अधिक वोट मिले. उन्होंने आरजेडी उम्मीदवार बृज किशोर बिंद को हराया था. इससे पहले नीतीश सरकार में वह अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री भी रह चुके हैं.

लगातार 3 हार के बाद मिली जीत

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में उन्होंने बीएसपी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया था. उस समय जमां खान पूरे बिहार राज्य में बीएसपी के इकलौते विधायक चुने गए थे. जीत के तीन महीने बाद यानी जनवरी 2021 में उन्होंने बीएसपी छोड़कर जेडीयू का दामन थाम लिया. जेडीयू में शामिल होते ही नीतीश कुमार ने उन्हें अपने कैबिनेट में शामिल कर लिया और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी. वक्फ बोर्ड संशोधन जैसे कई मुद्दों पर वह लगातार सरकार और पार्टी लाइन का समर्थन करते रहे.

जमां खान के पूर्वज हिंदू राजपूत थे

जमां खान का जन्म कैमूर के चैनपुर स्थित नौघरा गांव में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था. उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई बनारस में की. रिपोर्ट के अनुसार, जमां खान ने यहा दावा किया था कि उनके पूर्वज कभी हिंदू राजपूत थे, जिन्होंने बाद में इस्लाम धर्म अपना लिया. आज भी उनके परिवार के कई हिंदू रिश्तेदार हैं.

नीतीश कैबिनेट में जगह

जमां खान ने पहली बार 2005 में बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा. साल 2010 में जमां खान को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया, लेकिन इस बार भी उन्हें हार मिली. साल 2015 में भी जमां खान को हार नसीब हुई. लगातार तीन हार के बाद साल 2020 में आखिरकार जमां खान ने जीत का स्वाद चखा. उसके बाद जेडीयू से जुड़कर वह नीतीश कैबिनेट का अहम हिस्सा बन गए. आज की नीतीश सरकार में जमां खान न सिर्फ जेडीयू का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि कैबिनेट में अल्पसंख्यक समुदाय की एकमात्र आवाज भी हैं.


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