21 नवंबर 2004 की सुबह इनर मंगोलिया की ठंडी हवा अभी भी जमीन पर जमी बर्फ को कड़क बनाए हुए थी. बाओतो एरलीबान एयरपोर्ट पर रोज की तरह हलचल थी, लेकिन किसी को अंदाज़ा नहीं था कि कुछ ही मिनट बाद आसमान में एक ऐसा मंजर दिखने वाला है, जिसे देखकर वक्त थम जाएगा.

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चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस की फ्लाइट 5210 सुबह करीब 08:21 बजे 47 पैसेंजर्स और 6 क्रू मेंबर्स के साथ रनवे से टेकऑफ हुआ था.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

इस फ्लाइट के कॉकपिट में 33 वर्षीय कप्तान वांग पिन और उनके अनुभवी सहयोगी बैठे थे. अभी सिर्फ 15 मिनट का समय बीता था और प्‍लेन ने अपनी ऊंचाई पकड़ना शुरू किया था. लेकिन तभी, प्‍लेन को एक तेज झटका लगा. दस सेकेंड के अंतराल में प्‍लेन को दूसरा झटका लगा और वह किसी बिन जल मछली की तरह हवा में फड़फड़ाने लगा. जैसे ही ग्राउंड पर मौजूद स्टाफ और एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम में बैठे एयरपोर्ट स्‍टाफ ने यह नजारा देखा तो उनके चेहरे सफेद पड़ गए.

कुछ ही सेकंड बाद आसमान में एक तेज धमाका सुनाई दिया। देखते ही देखते आग की लपटों में घिरा यह प्‍लेन दो टुकड़ों में बंट गया. कोई कुछ समझ पाता इससे पहले यह प्‍लेन तेजी से जमीन की तरफ बढ़ने लगा. इस प्‍लेन ने पहले पहले एक घर से टकराया, फिर एक पार्क के टिकटिंग बूथ को चीरता हुआ गुजर गया और सीधा नानहाई पार्क की बर्फीली झील में जा गिरा. जलते हुए प्‍लेन के मलवे ने आसपास खड़ी यॉट्स को भी अपनी चपेट में ले लिया था.

बर्फ तोड़कर निकाले गए पैसेंजर्स के शव
प्‍लेन क्रैश के कुछ समय ही समय बाद रेस्‍क्‍यू टीम क्रैश साइट पर पहुंच की थी. इस रेस्‍क्‍यू टी में दमकल की 100 से ज्यादा गाड़ियां, 250 पुलिसकर्मी, 50 पार्क स्टाफ और 20 गोताखोर शामिल थे. रेस्‍क्‍यू टीम ने बर्फ तोड़कर मलबा निकालना शुरू किया. रात होते-होते 36 शव बरामद कर लिए गए. रिपोर्ट्स बताती हैं कि हादसा इतना भयंकर था कि पूरा प्‍लन टुकड़ों में बिखर गया था. प्‍लेन में मौजूद कई पैसेंजर्स के केवल अवशेष या अंग ही मिले पाए थे.

सीएएसी ने क्रैश को लेकर कही थी यह बड़ी बात
अगले दिन तक लगभग पूरा विमान झील से बाहर निकाल लिया गया. 24 नवंबर को बर्फ से ढके मलबे के बीच एयरपोर्ट की टीम ने ब्लैक बॉक्स को खोज निकाला. चाइना सिविल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (CAAC) की जांच के बाद उन सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया, जिसमें
विस्फोट, आतंकी हमले या तकनीकी खराबी की आशंका जाहिर की गई थी. लेकिन असल सच इन तमाम अफवाहों और आशंकाओं से कहीं बड़ा था.

जांच में सामने आई यह चौंकाने वाली बात
चाइना सिविल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन की जांच में सामने आया कि हादसे के समय तापमान शून्य से नीचे था. जिसकी वजह से प्‍लेन के विंग्‍स में भारी बर्फ जमा हो गई थी. टेकऑफ से पहले प्‍लेन के विंग्‍स में जमा बर्फ को ना ही हटाया गया और ना ही डी-आइसिंग का प्रॉसेस पूरा किया गया. टेकऑफ के बाद बर्फ की वजह से प्‍लेन की लिफ्ट खत्‍म हो गई और वह हवाई में टिक नहीं पाया. नतीजतन, महज दस सेकेंड में प्‍लेन क्रैश होकर जमीन पर गिर गया.

प्‍लेन में मौजूद सभी पैसेंजर्स की गई जान
क्रैश हुए इस प्‍लेन में 46 चीनी नागरिकों के साथ इंडोनेशिया मूल का एक पैसेंजर था. इस क्रैश में हादसे में फ्लाइट के कप्‍तान वांग पिन (33), सह-कप्तान यांग गुआंग (37), फर्स्ट ऑफिसर यी चिनवेई (27), दो फ्लाइट अटेंडेंट्स, एक सिक्योरिटी ऑफिसर सहित सभी 46 पैसेंजर्स की जान चली गई थी. 2006 में जांच पूरी होने के बाद चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस) के 12 कर्मचारियों को दोषी पाया गया और एडमिनिस्ट्रेटिव पनिशमेंट दी गई.


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