केरलम विधानसभा चुनाव के शुरुआती नतीजों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने शानदार बढ़त बना रखी है. 140 सीटों वाली विधानसभा के आए रुझानों में फिलहाल UDF ने 100 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया है.

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जबकि CPI(M) के नेतृत्व वाले गठबंधन LDF को 41 सीटों पर बढ़ मिली हुई है. अब लगभग यह तय हो गया है कि कांग्रेस केरलम के अंदर सरकार बनाने जा रहा है. ऐसे में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर भी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है. इसमें एक बड़ा नाम शशि थरूर का है, जबकि दूसरा नाम केसी वेणुगोपाल का भी चल रहा है.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

चुनाव से पहले तो कांग्रेस ने CM चेहरे का ऐलान नहीं किया था, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में शशि थरूर का नाम भी सामने चल रहा है. थरूर काउंटिंग से एक दिन पहले ही तिरुवनंतपुरम पहुंच गए, इस दौरान जब उनसे CM को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,’मैं अच्छी तरह जानता हूं कि आप मुझसे क्या कहलवाना चाह रहे हैं. मैं इनमें से कुछ भी नहीं कहूंगा.’

थरूर ने बताया कैसे चुना जाएगा CM

थरूर ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी में हमारी एक मानक प्रक्रिया है. चुनाव परिणाम आने के बाद, विजयी विधायकों से पार्टी अध्यक्ष का एक दूत या प्रतिनिधि मुलाकात करेगा. उस व्यक्ति को विधायकों की इच्छाओं का अंदाजा हो जाएगा और हाई कमान इसे ध्यान में रखते हुए आखिरी फैसला लेगा. इसके बाद वे किसी भी नियम या सीमा से बंधे नहीं होंगे. वे अपनी इच्छानुसार कुछ भी चुन सकते हैं.’

वेणुगोपाल ने कैसे बढ़ाई टेंशन?

हालांकि दूसरी तरफ केसी वेणुगोपाल की तस्वीरें भी सामने

  • हालांकि इस लिस्ट में वीडी सतीशन भी शामिल हैं. जो फिलहाल राज्य की विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष होने के साथ-साथ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं.
  • एक और बड़ा नाम रमेश हन्निथला का भी है, जो इससे पहले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का रोल अदा कर चुके हैं.

विपक्षी नेता भी दे रहे हैं प्रतिक्रिया

कांग्रेस के मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर विपक्षी नेताओं की तरफ से भी बयानबाजी हो रही है. इस संबंध में जब CPI(M) के महासचिव एमए बेबी से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा,’जैसे ही वोटिंग खत्म हुई, वैसे ही, जिसे केरलम के लोग और मीडिया भी देख रहे हैं, कांग्रेस नेतृत्व के अंदर तीखी लॉबिंग शुरू हो गई है. नेताओं के बीच आपसी आरोप-प्रत्यारोप और हमले भी तेज हो गए हैं. अब इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे सहयोगी दल भी यह संकेत देने लगे हैं कि अगर बहुमत मिलता है, तो वे कांग्रेस के किस नेता को अगला मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं.’

10 साल बाद केरलम में कांग्रेस की वापसी

कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF लगभग 10 साल बाद सत्ता में वापसी के करीब है, इससे पहले वह आखिरी बार 2016 में सत्ता में थी. उस समय मुख्यमंत्री ओमन चांडी थे, जिनका कार्यकाल 2011 से 2016 तक चला. 2016 में सत्ता LDF के पास चली गई और पिनरई विजयन मुख्यमंत्री बने, जिन्होंने 2021 में दोबारा जीत हासिल कर केरलम की पारंपरिक सत्ता-परिवर्तन की राजनीति (हर 5 साल में बदलाव) को तोड़ दिया. ऐसे में अगर UDF अब जीतती है, तो यह सिर्फ सरकार बदलने का मामला नहीं होगा, बल्कि एक दशक बाद सत्ता में वापसी और राजनीतिक ट्रेंड के फिर से बदलने का संकेत भी माना जाएगा.


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