

07 नवंबर 2024, रुद्रपुर।भाषा और संस्कृति के संरक्षण को समर्पित राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन का शुभारंभ आज रुद्रपुर में पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र, गोवा के पूर्व राज्यपाल माननीय भगत सिंह कोश्यारी जी ने दीप प्रज्वलन कर किया। उद्घाटन सत्र में उनके साथ प्रतिष्ठित साहित्यकार कौस्तुभानंद चंदोला, प्रो. बहादुर सिंह बिष्ट, प्रो. वीरेन्द्र सिंह बिष्ट, डॉ. एल. एम. उप्रेती,डॉ किशोर चंदोला, और दयानंद आर्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का स्वागत गीत विजडम पब्लिक स्कूल, रुद्रपुर के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसने पूरे समारोह में कुमाउनी संस्कृति की मधुर ध्वनि गूंजा दी।
पहले सत्र की अध्यक्षता कौस्तुभानंद चंदोला (सदस्य, उत्तराखंड भाषा संस्थान) ने की, जबकि संचालन ‘पहरू’ पत्रिका के संपादक नीरज पंत ने किया। इस सत्र में ‘पहरू’ के पूर्व संपादक एवं भाषा संस्थान के सदस्य डॉ. हयात सिंह रावत ने कहा कि 1728 ईस्वी में रामभद्र त्रिपाठी द्वारा कुमाउनी में ‘चाणक्य नीति’ का अनुवाद किया गया था। गुमानी पंत से लेकर आज तक कुमाउनी साहित्य की हर विधा में सृजन की निरंतरता बनी हुई है।
ब्रिगेडियर धीरेश जोशी ने कहा कि कुमाउनी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाना जरूरी है ताकि उसे आधिकारिक भाषा का दर्जा, सरकारी योजनाओं का लाभ और संवैधानिक संरक्षण प्राप्त हो सके। वक्ताओं ने यह भी कहा कि कुमाउनी को नई पीढ़ी तक पहुँचाना और इसे विद्यालयी पाठ्यक्रम में शामिल करना समय की मांग है।
दूसरे सत्र में ‘कुमाउनी भाषा, संस्कृति, कला, रंगमंच और फिल्म’ पर पैनल चर्चा हुई। संचालन ‘पहरू’ के उपसंपादक शशि शेखर जोशी ने किया। इस सत्र में चारु तिवारी (भाषा एवं संस्कृति), मीरा जोशी (ऐपण कला), घनश्याम भट्ट (अभिनय), मनोज चंदोला (फिल्म), के.एन. पांडे ‘खिमदा’ (कुमाउनी रंगमंच) और गोपाल चम्याल (संगीत) ने अपनी विशेषज्ञ राय रखी।
पुस्तक विमोचन सत्र में विनोद जोशी की ‘यादोंकि फांँचि’, ब्रिगेडियर धीरेश जोशी की ‘कथांजलि’, तथा डॉ. मोहन चंद्र पंत की ‘कुमाउनी लोककथाएं’ जैसी पुस्तकों का विमोचन हुआ।
सम्मान समारोह में मीरा जोशी को ‘वैद्य कल्याण सिंह बिष्ट कुमाउनी संस्कृति सेवी सम्मान’ से अलंकृत किया गया। इसके अलावा घनश्याम भट्ट, गोपाल चम्याल, ललित मोहन सिंह जीना, गिरीश चंद्र जोशी, कुबेर सिंह कड़ाकोटी सहित कई विशिष्ट हस्तियों को कुमाउनी भाषा, संस्कृति और साहित्य में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर दिल्ली से के.एन. पांडे ‘खिमदा’, चारु तिवारी, फरीदाबाद से रमेश सोनी, बागेश्वर से किशन मलड़ा, रमेश प्रकाश पर्वतीय, भास्कर नेगी, माया रावत (अल्मोड़ा), प्रवीण प्रकाश (मुनस्यारी), डॉ. दीपा कांडपाल, महेन्द्र ठकुराठी सहित उत्तराखंड व देशभर से आए अनेक भाषा और संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।
संपादकीय — हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स
राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति निष्ठा का प्रमाण है। जिस भाव से पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और भाषा-समाज के प्रख्यात विद्वानों ने कुमाउनी अस्मिता पर संवाद किया, वह भाषा के पुनर्जागरण का संकेत है।
अब समय है कि कुमाउनी को केवल बोलचाल की भाषा नहीं, बल्कि शिक्षा, प्रशासन और संविधान में प्रतिष्ठा मिले। इस सम्मेलन ने यह स्पष्ट संदेश दिया — भाषा ही हमारी पहचान है, और पहचान का सम्मान ही विकास का आधार है।




