राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में प्रशासनिक अव्यवस्थाओं की परतें उजागर, नियमों की खुलेआम अनदेखी

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हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में प्रशासनिक अक्षमता, नियमविरुद्ध नियुक्तियों और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन द्वारा शासन के स्पष्ट आदेशों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से कार्य किए जा रहे हैं, जिससे न केवल व्यवस्था प्रभावित हो रही है बल्कि सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग भी हो रहा है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

कॉलेज में एक फ्रंट डेस्क एक्जीक्यूटिव (रिसेप्शनिस्ट) को कार्मिक अनुभाग का प्रभारी बना दिया गया है, जबकि उसका मूल दायित्व अस्पताल में आने वाले मरीजों को उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी देना है। इसी तरह एक अटेंडेंट को भाई-भतीजावाद के तहत आउटसोर्सिंग में नियमविरुद्ध पदोन्नति देकर उसी कर्मचारी को कार्मिक अनुभाग जैसे संवेदनशील विभाग की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

आरोप है कि मेडिकल कॉलेज में अधिकांश कार्य ठेकेदारी के माध्यम से कराए जा रहे हैं, जिसका लाभ केवल दो-तीन चुनिंदा अधिकारियों और कर्मचारियों को मोटे कमीशन के रूप में मिल रहा है। वहीं लिपिकीय संवर्ग के कर्मचारियों को नियमों के विपरीत टाइप-4 आवास आवंटित कर दिए गए हैं, जबकि नियमानुसार यह सुविधा केवल फैकल्टी सदस्यों को दी जानी चाहिए।

कर्मचारियों का यह भी कहना है कि निर्धारित कर्मचारी ढांचे से इतर पदों पर कार्यरत लोगों को पदोन्नति देकर अनुचित वित्तीय लाभ पहुंचाया जा रहा है। ऐसे कर्मचारियों का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि प्राचार्य भी उन्हीं के इशारे पर निर्णय लेते प्रतीत होते हैं।

गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज को ट्रस्ट से राजकीयकरण हुए 15 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, बावजूद इसके आज भी ट्रस्टकालीन कार्यप्रणाली जारी है। शासन द्वारा बायोमेट्रिक उपस्थिति के कई आदेश जारी किए जाने के बावजूद उपनल कर्मचारियों का वेतन आज भी गेटों पर रखे रजिस्टरों में हस्ताक्षर के आधार पर जारी किया जा रहा है। इतना ही नहीं, हाल ही में सरकार द्वारा उपनल कर्मचारियों की हड़ताल अवधि को “नो वर्क नो पे” से मुक्त कर अवकाश में समायोजित करने के आदेश के बावजूद हड़ताल में शामिल कर्मचारियों का 8,000 से 10,000 रुपये तक वेतन काट लिया गया।

इन गंभीर आरोपों ने राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों और सामाजिक संगठनों ने शासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।


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