

देहरादून।शिक्षा विभाग में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के पद पर एक वर्ष पूर्व नियुक्त 80 से अधिक शिक्षक जल्द बर्खास्त किए जा सकते हैं। इन शिक्षकों पर आरोप है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश से डीएलएड करने की बात छिपाकर उत्तराखंड में नियुक्ति प्राप्त की। विभाग ने सभी संदिग्ध शिक्षकों को नोटिस जारी कर सुनवाई का मौका दे दिया है और अब उनके जवाब आने के बाद अंतिम कार्रवाई शुरू होगी।
2906 पदों पर भर्ती, लेकिन फर्जीवाड़े के आरोप
वर्ष 2024–25 में सहायक अध्यापक के 2906 पदों पर भर्ती हुई थी। इसी दौरान कुछ अभ्यर्थियों पर दस्तावेज़ों में हेरफेर कर नियुक्ति पाने का संदेह था, जिसकी शिकायत शिक्षा विभाग तक पहुंची। इसके बाद विभाग ने मामला गंभीर मानते हुए जांच के आदेश दिए।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
फर्जीवाड़े की जड़ — एक समय में दो राज्यों का “स्थायी निवासी”!
जांच में सामने आया कि —
- उत्तर प्रदेश में डीएलएड केवल उसी राज्य के स्थायी निवासी कर सकते थे।
- उत्तराखंड में शिक्षक नियुक्ति के लिए उत्तराखंड मूल/स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।
यानी आरोपी शिक्षकों ने दस्तावेज़ों के आधार पर एक समय में दो राज्यों की स्थायी निवासिता दिखाई, जो कानूनी रूप से असंभव है। यदि एक राज्य की निवासिता सही मानी जाए तो दूसरी को अवैध माना जाएगा।
5 जिलों से सामने आए मामले
जांच रिपोर्ट में गलत तथ्यों के आधार पर डीएलएड करने वाले मामले इन जिलों में पाए गए —
- टिहरी
- पौड़ी
- ऊधम सिंह नगर
- हरिद्वार
- नैनीताल
इन सभी शिक्षकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया, तथा व्यक्तिगत सुनवाई भी पूरी हो चुकी है।
विभाग का बयान
“विभाग में गलत तथ्यों के आधार पर भर्ती होने वाले शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की जाएंगी। यूपी में पहले व्यवस्था थी कि डीएलएड उस राज्य के स्थायी निवासी ही कर सकते थे।”
— अजय कुमार नौडियाल, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा
अब आगे क्या?
सूत्रों के अनुसार —
- नोटिस पर मिले जवाबों की कानूनी जांच अंतिम चरण में है
- मुकदमेबाजी की संभावना को भी ध्यान में रखा जा रहा है
- निर्णय आते ही 80 से अधिक शिक्षकों की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी हो सकता है
शिक्षक संगठनों में हलचल
भर्ती रद्द होने की आशंका के बीच शिक्षक संगठनों में भी चिंता और असंतोष देखा जा रहा है। कुछ संगठन इस मामले को सरकारी लापरवाही और दस्तावेज़ सत्यापन की कमी का परिणाम बता रहे हैं, जबकि विभाग इसे “शून्य सहिष्णुता नीति” के तहत निर्णायक कार्रवाई मान रहा है।
यदि विभाग की कार्रवाई अमल में आती है, तो यह शिक्षा भर्ती इतिहास की सबसे बड़ी बर्खास्तगी होगी। साथ ही इससे आने वाली भर्तियों में दस्तावेज़ और निवासिता जांच की प्रक्रिया और कड़ी होने की पूरी संभावना है।




