राज्य संघर्ष की दो ज्योतियाँ बुझीं, आदर्श अमर — दिवाकर भट्ट व कॉमरेड राजा बहुगुणा को कृतज्ञ उत्तराखंड की श्रद्धांजलि

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उत्तराखंड क्रांति दल नैनीताल इकाई की अगुवाई में राज्य अतिथि गृह में राज्य आंदोलनकारी यूकेडी के पूर्व विधायक दिवाकर भट्ट एवं CPI नेता कॉमरेड राजा बहुगुणा के सम्मान में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। श्रद्धांजलि सभा में नैनीताल शहर के प्रबुद्धजन, अधिवक्ता, शिक्षक, कर्मचारी नेता व रंगकर्मी सम्मिलित हुए। सभा की अध्यक्षता नैनीताल नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष श्याम नारायण द्वारा की गई। सभागार में कार्यक्रम की शुरुआत दिवाकर भट्ट एवं राजा बहुगुणा के चित्रों पर पुष्पांजलि कर की गई।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

सभा में अपने विचार व्यक्त करते हुए पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल ने कहा कि दिवाकर भट्ट जी में आंदोलनकारी का मजबूत जज़्बा था। वे जीवन पर्यंत राज्यवासियों की पीड़ा की लड़ाई लड़ते रहे, प्रशासन के जुल्म सहे व व्यक्तिगत तकलीफ़ें झेली। भट्ट जी ने आख़िरी दम तक युवाओं का आह्वान किया — “राज्य तो बन गया, अब राज्य को बनाने की लड़ाई लड़नी है।”
डॉ. जंतवाल ने दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि जिन मुद्दों के लिए राज्य की लड़ाई लड़ी गई वो आज भी हल नहीं हुए। दिल्ली की हाईकमान संचालित सरकारों को उत्तराखंडवासियों की पीड़ा से कोई लेना–देना नहीं है। यह खेदजनक है कि राज्य स्वायत्त होते हुए भी जनता आज भी आंदोलन के लिए मजबूर है। राजधानी, मूल निवास, भू- कानून जैसे अहम मुद्दे अब तक अधूरे हैं।

प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. डी. डी. पंत ने कहा था कि पहाड़ परस्त नीतियां बनानी होंगी अन्यथा पूरा देश प्रभावित होगा। उत्तराखंड क्रांति दल का मानना है कि यह सीमांत राज्य है — यदि सीमा के गाँवों में मूलभूत सुविधाएँ होंगी तभी सीमाएँ सुरक्षित रहेंगी। सुविधाओं के अभाव में पलायन हो रहा है और चीन लगातार आगे बढ़ रहा है, जो चिंताजनक है।

राज्य को अनेक प्रतिबंधों के साथ सौंपा गया, अपने ही संसाधनों पर राज्यवासियों का अधिकार नहीं है। राजनीतिक बदलाव के लिए जनता को आगे आना होगा। जंतवाल ने कहा कि कॉमरेड राजा बहुगुणा ने जीवन पर्यंत शोषित–पीड़ित–श्रमिक और आम जनता की लड़ाई लड़ी। उनका दृष्टिकोण साफ था। “जब नशा नहीं, रोजगार दो” आंदोलन के दौरान जंतवाल और बहुगुणा को एक साथ हथकड़ी लगी थी। वह उत्तराखंड की बुलंद आवाज़ थे।

सभा को पूर्व जीएम टूरिज्म डी. के. शर्मा, एडवोकेट कैलाश तिवारी, पान सिंह सीज़वाली, राज्य आंदोलनकारी जिला अध्यक्ष गणेश सिंह बिष्ट, रंगकर्मी विनोद कुमार, महेश जोशी, पंकज भट्ट, मनोज बिष्ट, खुर्शीद हुसैन, लीला बोरा, हेम चंद्र वारियल, कंचन चंदोला, शाकिर अली आदि ने संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने कहा कि जनता की बात करने वाले दो महान वक्ताओं को हमने खो दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व पालिका अध्यक्ष श्याम नारायण ने कहा कि यह दुःखद है कि तन–मन से बेहतर समाज निर्माण के लिए जुल्म सहते हुए दो रत्नों को उत्तराखंड ने खो दिया है। हम सभी का दायित्व है कि जिन आदर्शों के लिए भट्ट जी व कॉमरेड बहुगुणा ने त्याग किया, उन आदर्शों व मूल्यों के लिए कार्य करें।

सभा में डॉ. मनोज बिष्ट, मनोज साह, पार्वती मेहरा, संध्या शर्मा, मदन सिंह, के. सी. उपाध्याय, पी. सी. पंत, भावना जोशी, रायरा, विरेंद्र जोशी, प्रताप बिष्ट, इंद्रजीत बिष्ट, डी. के. शर्मा, धीरेन्द्र बिष्ट, नवीन जोशी, आनंद बिष्ट आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कमलेश चंद्र पांडे ने किया।


अवतार सिंह बिष्ट — राज्य आंदोलनकारी द्वारा श्रद्धांजलि दिवाकर भट्ट जी सिर्फ एक नेता नहीं थे, वे उत्तराखंड आंदोलन की आत्मा थे। मुझे गर्व है कि राज्य निर्माण के स्वर्णिम संघर्षकाल में उन्होंने मुझ पर विश्वास जताते हुए उधम सिंह नगर का जिला अध्यक्ष मनोनीत किया। वह क्षण आज भी मेरे लिए सम्मान, प्रेरणा और जिम्मेदारी का प्रतीक है। भट्ट जी ने सदा कहा — “पद नहीं, उद्देश्य बड़ा होता है। राज्य हमारा है, इसकी रक्षा भी हमें ही करनी है।”
उनके भीतर अटूट साहस था — जेलें, लाठीचार्ज, दमन और तकलीफ़ें भी उनकी मुस्कान व संकल्प को नहीं तोड़ पाईं। वे हर आंदोलनकारी में अपना प्रतिबिंब देखते थे और हर युवा में उत्तराखंड का भविष्य।
आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सीख, संघर्ष और आंदोलन की अग्नि हमारे भीतर जलती रहे यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

दिवाकर भट्ट जी व कॉमरेड राजा बहुगुणा जी को शत–शत नमन।
श्रद्धासुमन — अवतार सिंह बिष्ट,


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