जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में चल रहा ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ अब निर्णायक चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। डोरीमल और गंभीर मुगलान के घने जंगलों में छिपे पाकिस्तानी आतंकी कमांडरों की तलाश में सुरक्षाबलों ने अपना घेरा और मजबूत कर दिया है।

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गुरुवार को पूरे इलाके में कई घंटों तक भारी गोलीबारी और धमाकों की आवाजें गूंजती रहीं, जिससे पहाड़ी क्षेत्र दहल उठा।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड

भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की संयुक्त टीम पिछले छह दिनों से लगातार इस बड़े आतंकवाद विरोधी अभियान को अंजाम दे रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जंगलों में छिपे आतंकी प्रशिक्षित और अच्छी तैयारी के साथ आए हैं, जिनका संबंध सीमा पार बैठे आतंकी नेटवर्क से हो सकता है।

अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षाबलों को खुफिया इनपुट मिले थे कि मंजाकोट सेक्टर के डोरीमल और गंभीर मुगलान क्षेत्र में कुछ पाकिस्तानी आतंकवादी कमांडर अपने सहयोगियों के साथ छिपे हुए हैं। इसके बाद पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर सर्च और कॉम्बिंग ऑपरेशन शुरू किया गया। शुरुआती तलाशी के दौरान संदिग्ध हलचल देखे जाने के बाद सुरक्षाबलों ने जंगल के कई हिस्सों को चारों तरफ से घेर लिया।

ऑपरेशन के दौरान आतंकियों की ओर से बीच-बीच में फायरिंग की गई, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी। गुरुवार को कई इलाकों में विस्फोट और भारी गोलीबारी की आवाजें सुनाई दीं। सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियात के तौर पर अतिरिक्त जवानों और आधुनिक हथियारों को मौके पर भेजा है ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

सूत्रों के मुताबिक, आतंकियों को जंगल से बाहर निकलने का कोई रास्ता न मिले, इसके लिए पूरे इलाके में बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया गया है। ड्रोन और निगरानी उपकरणों की मदद से जंगल के भीतर गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। पहाड़ी रास्तों, संकरे दर्रों और संभावित भागने वाले मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

कठिन हालात के बाद भी जवान लगातार आगे बढ़ रहे हैं

अधिकारियों का कहना है कि अभियान बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में चल रहा है। घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां और सीमित दृश्यता सुरक्षाबलों के लिए चुनौती पैदा कर रही हैं। इसके बावजूद जवान लगातार जंगल के भीतर आगे बढ़ रहे हैं और हर संदिग्ध स्थान की तलाशी ली जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जंगल में छिपे आतंकी लंबे समय तक टिके रहने की तैयारी के साथ आए थे। उनके पास पर्याप्त हथियार, गोला-बारूद और जरूरी सामान होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि लगातार बढ़ते दबाव और मजबूत घेराबंदी के कारण अब उनका बच निकलना मुश्किल माना जा रहा है।

स्थानीय प्रशासन ने भी इलाके में सतर्कता बढ़ा दी है। आसपास के गांवों में लोगों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है और ग्रामीणों को जंगल की ओर न जाने की सलाह दी गई है। सुरक्षा कारणों से कुछ संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राजौरी और पुंछ के पहाड़ी इलाके लंबे समय से आतंकियों के लिए छिपने का सुरक्षित ठिकाना रहे हैं। घने जंगल और दुर्गम रास्ते सुरक्षाबलों के लिए अभियान को जटिल बना देते हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने आधुनिक तकनीक और बेहतर समन्वय के जरिए ऐसे अभियानों में बड़ी सफलता हासिल की है।

ऑपरेशन शेरूवाली को जम्मू-कश्मीर में हाल के सबसे बड़े संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियानों में गिना जा रहा है। सुरक्षाबलों का कहना है कि जब तक जंगल में छिपे सभी आतंकियों को पूरी तरह निष्क्रिय नहीं कर दिया जाता, तब तक अभियान जारी रहेगा। फिलहाल पूरे इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और सुरक्षा एजेंसियां हर गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

: राजौरी में एलओसी पार करने की कोशिश कर रहे थे संदिग्ध आतंकवादी, सेना ने की गोलीबारी

भारतीय सेना ने राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार करने की कोशिश कर रहे संदिग्ध आतंकवादियों पर गोलीबारी की। यह घटना मंगलवार को हुई। सेना के अधिकारियों ने बताया कि संदिग्धों को तड़के करीब सवा चार बजे तुर्कंडी अग्रिम क्षेत्र से भारत की तरफ घुसपैठ करने की कोशिश करते देखा गया।


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