कालीमठ की माँ कालीमाई की पदयात्रा खांखरा पहुंची, भक्तों को दिया आशीर्वाद13 को देवप्रयाग संगम स्नान के बाद होगी वापसी, 15 वर्ष बाद हो रहा विशिष्ट आयोजन

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श्रीनगर।सिद्धपीठ कालीमठ की माँ कालीमाई की पावन डोली देवप्रयाग संगम स्नान के लिए निकली ऐतिहासिक पदयात्रा के तहत शनिवार को खांखरा पहुंची। यहां श्रद्धालुओं ने परंपरागत विधि से देवडोली का भव्य अर्घ्य पूजन कर मनौतियां मांगीं। माँ कालीमाई ने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान किया। डोली रविवार को श्रीनगर पहुंचेगी, जबकि 13 जनवरी को देवप्रयाग संगम में स्नान के पश्चात यात्रा की वापसी होगी।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


कालीमठ पंचगांई देवरा यात्रा समिति के अध्यक्ष लखपत सिंह राणा ने बताया कि यह विशिष्ट धार्मिक आयोजन लगभग पंद्रह वर्ष बाद हो रहा है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आस्था देखने को मिल रही है। उन्होंने आगामी कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता करने का आह्वान किया।
भगवती कालीमाई कालीमठ वाली की ऐतिहासिक देवरा पदयात्रा विगत 7 दिसंबर से प्रारंभ हुई थी। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति एवं ऊखीमठ के मार्गदर्शन में कालीमाई पंचगांई समिति, कालीमठ द्वारा आयोजित इस यात्रा का मार्ग में आने वाले गांवों, कस्बों और नगरों में पारंपरिक अर्घ्य, वाद्यध्वनि और भक्तिगीतों के साथ भव्य स्वागत किया गया।
यात्रा के दौरान कालीमठ, कविल्ठा, कोटमा, खोनू, चिल्लोंड, जाल मल्ला, चौमासी, जाल तल्ला, रूच्छ महादेव, स्यांसूगढ़, ब्यूंखी, कुणजेठी और बेडुला सहित अनेक गांवों में घर-घर माता के दर्शन कराए गए। इसके पश्चात मनसूना, गैड-गडगू, चुन्नी, मंगोली, ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ, चन्द्रापुरी, अगस्त्यमुनि और तिलवाड़ा होते हुए रुद्रप्रयाग से खांखरा तक यात्रा पहुंची।
रविवार को पदयात्रा धारीदेवी होते हुए श्रीकोट-श्रीनगर पहुंचेगी। मार्ग में श्रद्धालु जौ, तिल, चावल, अन्न, मौसमी फल और पारंपरिक वाद्यों की धुनों के साथ माता की आराधना कर रहे हैं।
समिति के अध्यक्ष लखपत सिंह राणा ने कहा कि यह दिव्य यात्रा केवल कालीमठ या पंचगांई तक सीमित नहीं है, बल्कि समस्त देवभूमि के श्रद्धालुओं की आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। वहीं महामंत्री सुरेशानंद गौड़ ने कहा कि इस पदयात्रा ने आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में सामाजिक संवाद और सामुदायिक एकजुटता को भी सुदृढ़ किया है। यात्रा में बड़ी संख्या में हक-हकूकधारी और भक्तजन सहभागिता कर रहे हैं।


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