संपादकीय | उत्तरायणी कौतिक 2026 में संस्कृति का महाधमाल: साक्षी काला का रुद्रपुर आगमन

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उत्तराखंड की लोक–संस्कृति, लोक–संगीत और पारंपरिक नृत्य को नई पहचान देने वाली पहाड़ की बेटी साक्षी काला एक बार फिर सांस्कृतिक चेतना का शंखनाद करने रुद्रपुर आ रही हैं। 13 जनवरी 2026 को शैल परिषद द्वारा आयोजित उत्तरायणी (घुघुतिया त्यार) कौतिक में उनकी प्रस्तुति न केवल मनोरंजन होगी, बल्कि पहाड़ की आत्मा से साक्षात्कार भी कराएगी।
साक्षी काला कोई साधारण कलाकार नहीं हैं। कई गढ़वाली–कुमाऊँनी फिल्मों में अभिनय कर चुकीं साक्षी, गायकी और नृत्य—दोनों विधाओं में समान अधिकार रखती हैं। उनकी आवाज़ में ऐसा माधुर्य है कि जैसे पहाड़ों के भँवरे भी ठहरकर गुनगुनाने लगें। वहीं पार्वतीय परिधान में जब वे मंच पर थिरकती हैं, तो लगता है मानो स्वर्ग की अप्सराएँ धरती पर उतर आई हों।
सबसे बड़ी बात यह है कि साक्षी काला ने अपनी कला को बाजारू चमक से दूर रखते हुए केवल पर्वतीय सांस्कृतिक मंचों तक सीमित रखा है। यह प्रतिबद्धता ही उन्हें भीड़ से अलग करती है। वे केवल प्रस्तुति नहीं देतीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और लोक–विरासत को सहेजने का दायित्व निभाती हैं। यही कारण है कि उनकी कला का जादू न सिर्फ पूरे उत्तराखंड, बल्कि देश–विदेश तक फैल चुका है।

आज रुद्रपुर में आयोजित उत्तरायणी (घुघुतिया त्यार) कौतिक में पहाड़ की बेटी साक्षी काला ने ऐसी शानदार प्रस्तुति दी कि पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। लोक–संगीत और पारंपरिक नृत्य की उनकी जुगलबंदी ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। गढ़वाली–कुमाऊँनी सुरों में रची-बसी उनकी आवाज़ और मंच पर आत्मविश्वास से भरा नृत्य देखते ही बनता था। हर गीत के साथ दर्शकों का उत्साह बढ़ता गया और माहौल पूरी तरह सांस्कृतिक रंग में रंग गया। आज की प्रस्तुति के बाद साक्षी काला सिर्फ कलाकार नहीं रहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक सुपर स्टार बनकर उभरीं।


रुद्रपुर के लिए यह गर्व का विषय है कि उत्तरायणी कौतिक जैसे देने वाली पहाड़ की बेटी साक्षी काला एक बार फिर सांस्कृतिक चेतना का शंखनाद सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पहाड़ की अस्मिता, पहचान और आत्मसम्मान का उत्सव है। साक्षी काला जैसी कलाकारें हमें याद दिलाती हैं कि आधुनिकता की दौड़ में भी अपनी जड़ों से जुड़ा रहना कितना आवश्यक है।
रुद्रपुर वासियो, तैयार हो जाइए!
13 जनवरी 2026 को उत्तरायणी कौतिक में संस्कृति, सुर और सौंदर्य का संगम होने जा रहा है—जहाँ पहाड़ की बेटी साक्षी काला अपने नृत्य–गायन से संस्कृतियों का धमाल


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