

रुद्रपुर की पवित्र भूमि पर जब-जब आस्था का दीप प्रज्वलित होता है, तब-तब यह नगर अपने सांस्कृतिक स्वरूप में एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है। ऐसी ही एक स्नेहिल और श्रद्धामयी परंपरा है टुबड़ी पूजा, जो पंजाबी समाज की आस्था, नारी-संस्कार और पारिवारिक एकता का प्रतीक है। इस पर्व में महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि और समाज की शांति के लिए व्रत रखती हैं और संध्या बेला में नदी-नहर के घाटों पर दीपदान कर मातृशक्ति का अद्वितीय भाव प्रकट करती हैं।

इस वर्ष 5 अक्टूबर को जब टुबड़ी ब्रत और गंगा स्नान पर्व एक साथ मनाए जाएंगे, तब रुद्रपुर का वातावरण भक्ति और उल्लास से परिपूर्ण होगा। इसी पावन अवसर को देखते हुए नगर निगम रुद्रपुर ने अपनी तैयारियों को गति दी है।
महापौर विकास शर्मा ने नगर आयुक्त शिप्रा जोशी पांडे के साथ कल्याणी नदी और फुलसुंगी क्षेत्र स्थित घाटों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निगम की टीम को स्पष्ट निर्देश दिए कि पूजा से पूर्व घाटों की सफाई, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आवश्यक तैयारियों को पूर्ण किया जाए।
महापौर ने इस मौके पर घोषणा की —
“टुबड़ी पूजा पंजाबी समाज की आस्था और पारिवारिक एकता से जुड़ा पर्व है। नगर निगम सभी समुदायों के धार्मिक आयोजनों का सम्मान करता है और अगले वर्ष से इस पर्व के लिए स्थायी घाटों का निर्माण कराया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को भविष्य में किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।”
यह घोषणा न केवल प्रशासनिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है, बल्कि एक सांस्कृतिक संवेदना का भी दर्पण है — जिसमें हर धर्म, हर परंपरा और हर समुदाय के सम्मान की गूंज सुनाई देती है।
इससे पहले खत्री अरोड़ा फाउंडेशन और पंजाबी खत्री समाज के प्रतिनिधि मंडल ने महापौर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था। प्रतिनिधियों ने बताया कि टुबड़ी ब्रत न केवल नारी शक्ति की भक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह पारिवारिक सामंजस्य और सांस्कृतिक एकता का संदेश भी देता है। उन्होंने मांग की कि कल्याणी नदी और फुलसुंगी के घाटों की विशेष सफाई कर वहां प्रकाश और सुरक्षा की व्यवस्था की जाए।
महापौर ने मांग को गंभीरता से लेते हुए तत्काल नगर आयुक्त और अधिकारियों के साथ दोनों घाटों का निरीक्षण किया। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जहां छठ पूजा के लिए तैयारियां होती हैं, वहीं फिलहाल टुबड़ी पूजा के लिए भी समान सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं — जिनमें सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पूजा सामग्री के लिए समुचित स्थान और सुरक्षा व्यवस्था प्रमुख हैं।
निरीक्षण के दौरान पार्षद चिराग कालरा, पार्षद पवन राणा, जगदीश सुखीजा, पारस चुघ, सचिन गुम्बर सहित नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। इन सभी ने महापौर की भावना का समर्थन करते हुए कहा कि टुबड़ी पूजा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह भक्ति और संस्कृति के संगम का पर्व है।
रुद्रपुर का यह संकल्प — “हर आस्था का सम्मान, हर संस्कृति का उत्थान” — नगर निगम की कार्यसंस्कृति को एक नई दिशा दे रहा है। जब कोई नगर अपने घाटों को साफ करता है, तो वह केवल मिट्टी नहीं धोता — वह अपनी आत्मा को निर्मल करता है। जब किसी महापौर की घोषणा आस्था के सम्मान में होती है, तो वह केवल प्रशासन नहीं करता — वह संस्कृति की रक्षा करता है।
टुबड़ी पूजा हमें यह सिखाती है कि सच्चा पर्व वही है जिसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी हो, हर हृदय में श्रद्धा की ज्योति जले, और हर नदी अपने किनारे पर दीपों से जगमगाती रहे।
(लेखक: अवतार सिंह बिष्ट, संपादक – हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, उत्तराखंड)
(लेखक: अवतार सिंह बिष्ट, संपादक – हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, उत्तराखंड)




