पीएम मोदी की अपील से बढ़ी हलचल, तेल कंपनियों को भारी घाटा, सोना खरीदने पर भी संयम की सलाह

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नई दिल्ली। देश में बढ़ते वैश्विक आर्थिक संकट और ऊर्जा अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi की पेट्रोल-डीजल बचाने और सोना खरीदने में संयम बरतने की अपील ने राजनीतिक और आर्थिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने खुलासा किया कि सरकारी तेल कंपनियां इस समय प्रतिदिन लगभग 1000 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं। वहीं इस तिमाही में कुल घाटा 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान जताया जा रहा है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


हरदीप पुरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, गैस और एलपीजी की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। तेल कंपनियां महंगे दामों पर कच्चा तेल खरीद रही हैं, लेकिन आम जनता को राहत देने के लिए पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की जा रही है। इससे कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में देशवासियों से अपील करते हुए कहा था कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा संरक्षण बेहद जरूरी है। उन्होंने लोगों से अनावश्यक यात्रा कम करने, वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने और पेट्रोल-डीजल की बचत करने की सलाह दी थी। इसके साथ ही सोने की अत्यधिक खरीद पर भी अप्रत्यक्ष रूप से चिंता जताई गई, क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातक देशों में शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इसके अलावा हर वर्ष भारी मात्रा में सोने का आयात भी विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ाता है। ऐसे में यदि वैश्विक स्तर पर युद्ध और आर्थिक अस्थिरता बढ़ती है तो भारत के सामने गंभीर आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
गृहमंत्री Amit Shah ने प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन करते हुए कहा कि यह भारत को आत्मनिर्भर और ऊर्जा सुरक्षित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल के संयमित उपयोग, प्राकृतिक खेती और आत्मनिर्भरता के जरिए भारत वैश्विक संकटों का मजबूती से सामना कर सकता है।
वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने कहा कि दुनिया में चल रहे युद्धों और तनाव के कारण तेल और गैस संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने लोगों से प्रधानमंत्री की अपील का पालन करने की बात कही।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सरकार फिलहाल सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी नहीं करना चाहती, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ सकती है। इसलिए सरकार जनता से स्वेच्छा से खपत कम करने की अपील कर रही है। माना जा रहा है कि यदि हालात और बिगड़े तो आने वाले समय में सरकार को कड़े आर्थिक फैसले लेने पड़ सकते हैं।
वाराणसी सहित कई शहरों में प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन देखने को मिला है। लोगों का कहना है कि देशहित में यदि ईंधन और सोने की खरीद में संयम बरतना पड़े तो जनता इसके लिए तैयार है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक सामान्य सरकारी अपील नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक आर्थिक हालात के बीच भारत को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।


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