नई दिल्ली। शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को नई दिल्ली में पार्टी प्रमुख एवं महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता माननीय एकनाथ शिंदे के आवास पर आयोजित की गई। बैठक का आयोजन शिवसेना के राष्ट्रीय सचिव अभिजीत अडसूल द्वारा किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से पार्टी के राज्य प्रमुखों, प्रभारियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता स्वयं शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने की।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड
बैठक में देशभर में शिवसेना के संगठनात्मक विस्तार, राज्यों में पार्टी की स्थिति, आगामी राजनीतिक रणनीति तथा कार्यकर्ताओं की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन के विस्तार के दौरान आने वाली चुनौतियों और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों से नेतृत्व को अवगत कराया। इस दौरान एकनाथ शिंदे ने सभी राज्य प्रमुखों की बातों को गंभीरता से सुना और उन्हें संगठन को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।
बैठक के दौरान यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि शिवसेना केवल महाराष्ट्र तक सीमित राजनीतिक दल नहीं रहना चाहती, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करने की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। पार्टी नेतृत्व ने संगठन विस्तार को प्राथमिकता देते हुए राज्य इकाइयों को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने पर बल दिया।
कार्यकर्ताओं की समस्याओं के समाधान का आश्वासन
राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के दौरान राज्य प्रमुखों ने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को आने वाली कठिनाइयों, संसाधनों की कमी, स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों और संगठनात्मक चुनौतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहा कि पार्टी का वास्तविक आधार उसके समर्पित कार्यकर्ता हैं और उनके हितों की रक्षा करना संगठन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने आश्वासन दिया कि कार्यकर्ताओं की समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से लिया जाएगा तथा संगठनात्मक स्तर पर उनका समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। शिंदे ने कहा कि आने वाले समय में पार्टी को विभिन्न राज्यों में नई ऊर्जा और नई ताकत मिलेगी तथा शिवसैनिकों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
पश्चिम उत्तर प्रदेश में ललित मोहन शर्मा की पुनर्नियुक्ति
बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक निर्णय लेते हुए ललित मोहन शर्मा को पश्चिम उत्तर प्रदेश का राज्य प्रमुख पुनः नियुक्त किया गया। उनकी पुनर्नियुक्ति की घोषणा के बाद उपस्थित पदाधिकारियों ने उनका स्वागत करते हुए बधाई दी। पार्टी नेतृत्व ने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा पार्टी की जनस्वीकृति में वृद्धि होगी।
देशभर से पहुंचे शिवसेना के वरिष्ठ पदाधिकारी
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की इस बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से शिवसेना के वरिष्ठ पदाधिकारियों और राज्य प्रमुखों ने भाग लिया। इनमें जम्मू-कश्मीर के राज्य प्रमुख अश्विनी गुप्ता, ओडिशा के राज्य प्रमुख रुद्रनारायण जितबाबू, झारखंड के राज्य प्रमुख दीपक सिंह, उत्तराखंड के राज्य प्रमुख कुलभूषण राणा, प्रभारी सागर रघुवंशी, हरियाणा के राज्य प्रमुख नीरज सेठी, पंजाब के राज्य प्रमुख हरीश सिंगला, मध्य प्रदेश के राज्य प्रमुख राजीव चतुर्वेदी, प्रभारी सुरेश गुज्जर, दिल्ली के राज्य प्रमुख संदीप चौधरी, पश्चिम बंगाल के राज्य प्रमुख शांति दत्त, मणिपुर के राज्य प्रमुख टॉम्बी सिंह, असम के राज्य प्रमुख परमिंदर सिंह, तमिलनाडु के राज्य प्रमुख मनी भारती, केरल के राज्य प्रमुख हरीश कुमार, अंडमान एवं निकोबार के राज्य प्रमुख टी. दीपक, गुजरात के राज्य प्रमुख जिम्मी अडवाणी, प्रभारी एस.आर. पाटील, प्रभारी सुरेश रावल, उत्तर उत्तर प्रदेश के राज्य प्रमुख अभय द्विवेदी, हिमाचल प्रदेश के राज्य प्रमुख नरेश कुमार शर्मा, छत्तीसगढ़ के राज्य प्रमुख धनंजय सिंह परिहार, त्रिपुरा के राज्य प्रमुख बिरेन देबनाथ, तेलंगाना के राज्य प्रमुख सिंकरु शिवाजी, बिहार के राज्य प्रमुख आशुतोष झा तथा कर्नाटक के राज्य प्रमुख सिधलिंगा स्वामी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
इन सभी पदाधिकारियों ने अपने-अपने राज्यों में संगठन की वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से विचार साझा किए।
उत्तराखंड के शिवसैनिकों ने किया स्वागत
दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक का उत्तराखंड के शिवसैनिकों ने स्वागत किया है। उत्तराखंड के कार्यकर्ताओं ने कहा कि शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे द्वारा संगठन विस्तार और कार्यकर्ता सशक्तिकरण पर दिया गया जोर सकारात्मक संकेत है। उनका मानना है कि यदि पार्टी जमीनी स्तर पर मजबूत संगठन खड़ा करती है तो राज्य में उसका जनाधार और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं।
उत्तराखंड के शिवसैनिकों ने बालासाहेब ठाकरे के उस सिद्धांत को भी याद किया जिसमें उन्होंने कहा था कि “पहले जनता की सेवा, फिर पद”। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यही विचारधारा शिवसेना की पहचान रही है और भविष्य में भी संगठन को इसी मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।
उत्तराखंड के प्रमुख मुद्दों पर ध्यान देने की मांग
उत्तराखंड के शिवसैनिकों ने पार्टी नेतृत्व से राज्य की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि देवभूमि उत्तराखंड आज भी पलायन, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और पहाड़ी अस्मिता जैसे गंभीर मुद्दों से जूझ रहा है।
कार्यकर्ताओं का मानना है कि राज्य में संगठन विस्तार केवल राजनीतिक गतिविधि तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जनता की वास्तविक समस्याओं से जुड़कर समाधान खोजने का प्रयास भी होना चाहिए। उनका कहना है कि यदि पार्टी इन मुद्दों पर गंभीरता से कार्य करती है तो उसे जनता का व्यापक समर्थन मिल सकता है।
बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने पर जोर
उत्तराखंड के शिवसैनिकों ने पार्टी नेतृत्व के समक्ष तीन महत्वपूर्ण सुझाव भी रखे। पहला सुझाव यह था कि किसी भी चुनावी तैयारी से पहले संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाए। उनका कहना है कि मजबूत संगठन ही किसी भी राजनीतिक दल की वास्तविक शक्ति होता है और जमीनी कार्यकर्ताओं के बिना चुनावी सफलता संभव नहीं है।
दूसरा सुझाव यह रखा गया कि राज्य में नेतृत्व तय करते समय उत्तराखंड की भौगोलिक और राजनीतिक परिस्थितियों का पूरा सम्मान किया जाए। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों की अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक आवश्यकताओं को समझते हुए निर्णय लिए जाने चाहिए।
तीसरे सुझाव के रूप में यह मांग रखी गई कि पार्टी के पुराने और नए सभी सक्रिय शिवसैनिकों से खुली राय ली जाए ताकि संगठन में लोकतांत्रिक वातावरण मजबूत हो और सभी कार्यकर्ताओं को सम्मानजनक भागीदारी मिल सके।
“पहले संगठन, फिर चुनाव” का संदेश
उत्तराखंड के शिवसैनिकों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं है, बल्कि वे शिवसेना की मूल विचारधारा और संगठनात्मक मजबूती के पक्षधर हैं। उनका कहना है कि पार्टी के सामने सबसे बड़ी आवश्यकता मजबूत संगठन निर्माण की है। इसी भावना के साथ उन्होंने “पहले संगठन, फिर चुनाव” और “पहले पहाड़, फिर पद” का संदेश दिया।
कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि पार्टी संगठनात्मक रूप से मजबूत होगी तो चुनावी सफलता स्वतः प्राप्त होगी। इसलिए व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर सामूहिक संगठन निर्माण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
राष्ट्रीय विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली में आयोजित यह बैठक शिवसेना के राष्ट्रीय विस्तार अभियान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है। महाराष्ट्र के बाहर कई राज्यों में संगठन को सक्रिय करने और स्थानीय नेतृत्व को मजबूत बनाने की रणनीति पार्टी के भविष्य के राजनीतिक विस्तार का संकेत देती है।
बैठक से यह संदेश भी सामने आया कि शिवसेना आने वाले समय में विभिन्न राज्यों में अपनी राजनीतिक उपस्थिति को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए संगठनात्मक स्तर पर व्यापक अभियान चलाने की तैयारी कर रही है।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी नेतृत्व कार्यकर्ताओं को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहता है और संगठन की जड़ों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि बैठक में लिए गए निर्णय और दिए गए आश्वासन आने वाले समय में किस प्रकार जमीनी स्तर पर दिखाई देते हैं।
