

सनातन संस्कृति का आधार केवल ग्रंथों में संचित ज्ञान नहीं, अपितु अनुभूतियों, प्रतीकों और परम सत्य की खोज की अविरल परंपरा भी है। इस परंपरा में शिव, शंकर और शिवलिंग—तीनों उस परम सत्ता के विभिन्न आयाम हैं, जिन्हें समझने के लिए केवल बाह्य भक्ति नहीं, बल्कि भीतरी साधना और तत्वचिंतन आवश्यक है। शिव, शंकर और शिवलिंग—इन तीनों का संबंध केवल पूजा से नहीं, पूरे ब्रह्मांड की रचना, संचालन और संहार की दिव्य व्यवस्था से है।✍️ अवतार सिंह बिष्ट,
संवाददाता,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी!

शिव : अनंत, शाश्वत और परमतत्व
शिव कोई व्यक्ति नहीं हैं, वे परम चेतना, ब्रह्मांडीय ऊर्जा और शून्य की पूर्णता हैं। शिव वे हैं जो न आदि हैं न अंत, जो समाधि में भी पूर्ण हैं और विकराल रूप में भी। वे न केवल देवताओं के देव हैं, बल्कि ब्रह्मा और विष्णु भी जिनकी उपासना करते हैं।
वेदों में जिनको रुद्र कहा गया, उन्हीं की व्यापक व्याख्या “शिव” के रूप में मिलती है। वे ही नटराज हैं जो तांडव करते हैं, वे ही महाकाल हैं जो समय को लील जाते हैं, और वे ही विश्वेश्वर हैं जो पूरे ब्रह्मांड को धारण करते हैं।
शिवलिंग : ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक
शिव का निराकार रूप है शिवलिंग—एक ऐसा प्रतीक जो विज्ञान और धर्म के संगम को दर्शाता है। लिंग का अर्थ है “चिन्ह”, और शिवलिंग उस चिरशांत शक्ति का चिन्ह है जहाँ सृष्टि की उत्पत्ति और विसर्जन दोनों ही समाहित हैं।
लिंग पुराण, शिव महापुराण, और विज्ञान सभी इस बात पर सहमत हैं कि शिवलिंग केवल एक धार्मिक मूर्ति नहीं, बल्कि ऊर्जा का केन्द्रीय स्रोत है। आधुनिक शोध बताते हैं कि ज्योतिर्लिंगों के स्थानों पर अधिक रेडियेशन और ऊर्जा तरंगें पाई जाती हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि ये स्थान वैकल्पिक ऊर्जा केंद्र भी हैं।
ज्योतिर्लिंग : शिव के प्रकाश-स्तम्भ
भारतवर्ष में शिव के 12 ज्योतिर्लिंग—सोमनाथ से लेकर रामेश्वरम तक—उनकी ब्रह्मांडीय उपस्थिति के गवाह हैं। हर ज्योतिर्लिंग एक पृथ्वी के ऊर्जा केंद्र पर स्थित है:
- सोमनाथ (गुजरात) – आदि ज्योतिर्लिंग, जहां चंद्र ने तप किया
- मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश) – शिव-पार्वती की संयुक्त चेतना
- महाकालेश्वर (उज्जैन) – काल को नियंत्रित करने वाले
- ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश) – ओंकार स्वरूप शिव
- केदारनाथ (उत्तराखंड) – हिमालय की गोद में, जहाँ शंकर रूप शिव तपस्या में लीन हैं
- भीमाशंकर (महाराष्ट्र) – दैत्य त्रिपुरासुर का संहार करने वाले
- काशी विश्वनाथ (वाराणसी) – मोक्षदायिनी काशी के अधिपति
- त्र्यंबकेश्वर (नासिक) – गोदावरी तट पर ब्रह्म, विष्णु, महेश की त्रिमूर्ति
- वैद्यनाथ (झारखंड) – आरोग्य प्रदाता
- नागेश्वर (गुजरात) – विष के प्रभाव को साधने वाले
- रामेश्वरम (तमिलनाडु) – राम द्वारा स्थापित लिंग
- घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र) – अन्तिम ज्योतिर्लिंग जो प्रलय से पहले टिकेगा
ये सभी शिव के अलौकिक ऊर्जा केंद्र हैं, और इन स्थानों की तपस्या, साधना, और ध्यान की परंपरा अनंतकाल से चल रही है।
शंकर : शिव का साकार सौम्य रूप
जब यह चेतना मानव कल्याण के लिए साकार होती है, तो वह शंकर कहलाती है। शंकर केवल त्रिशूलधारी देव नहीं, वे योगी हैं, तपस्वी हैं, गुरु हैं, और सबसे बढ़कर समर्पण के प्रतीक हैं। वे दूसरों के दोषों को स्वीकार कर अमृत बनाने वाले हैं। वे ही शिव हैं जो गृहस्थ जीवन में उतरकर जगत कल्याण करते हैं।
शंकर के माध्यम से ही शिव हमारे जीवन में उपदेशक, संरक्षक और तप के आदर्श बनते हैं।
शिवभक्त संत : जिनके जीवन में शिव समाहित रहे
शिव केवल ग्रंथों में नहीं, उन संतों के जीवन में भी प्रकट होते हैं जो निज चेतना में शिव को अनुभव करते हैं। कुछ महान संत जिन्होंने शिव को अपने अस्तित्व में जिया:
- स्वामी करपात्री जी – शिवज्ञान के अद्वितीय व्याख्याता
- गोरखनाथ – नाथ संप्रदाय के प्रवर्तक, जिन्होंने योग और शिव को समर्पित जीवन जिया
- रवीन्द्रनाथ टैगोर – अपने गीतों में शिव के तांडव और सौंदर्य दोनों को पिरोया
- त्रैलंग स्वामी – काशी के अमर योगी, जिन्हें साक्षात शिव कहा गया
- रामकृष्ण परमहंस – जिन्होंने शिव और काली को एक रूप में देखा
- भैरवनाथ बाबा – नर्मदा तट के सिद्ध योगी, जो शिवलिंग को जीवंत मानते थे
इन संतों के जीवन में शिव भक्ति केवल पूजा नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण, तपस्या और आत्मविलयन की यात्रा
शिव एक सत्य, अनेक रूप
शिव, शंकर और शिवलिंग—इन तीनों के रहस्य को जानना आत्मा की सबसे ऊंची उड़ान है। शिव न केवल मंदिरों में हैं, वे हमारे भीतर की दिव्यता में, हमारे सत्य के अनुभव में, और हमारे अंतर्मन की शांति में बसे हैं।
ज्योतिर्लिंग केवल तीर्थ नहीं, उर्जा के स्तंभ हैं। शिवलिंग केवल पत्थर नहीं, जीवंत ब्रह्मांडीय ऊर्जा हैं। और शंकर केवल देव नहीं, मानवता के मार्गदर्शक हैं। शिव के प्रति समर्पण का अर्थ है—अपने भीतर की चेतना को परम से जोड़ना।
🙏 हर हर महादेव 🙏
— संपादकीय हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स




