

देहरादून। उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष समारोह के उपलक्ष्य में वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून में इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (भारत), उत्तराखण्ड चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में “Changing Face of Technical Education: Past, Present and Future” विषय पर एक विशेष पैनल डिस्कशन का सफल आयोजन किया गया।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय कुलगीत और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिकारी, प्राध्यापकगण, छात्र-छात्राएं तथा तकनीकी क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की प्रारंभिक व्याख्यान प्रो. मनोज कुमार पांडा, निदेशक, महिला प्रौद्योगिकी संस्थान, देहरादून द्वारा प्रस्तुत की गई, जिन्होंने तकनीकी शिक्षा की ऐतिहासिक यात्रा, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर सारगर्भित विचार रखे।
इसके उपरांत इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (भारत), उत्तराखण्ड चैप्टर के चेयरमैन इंजी. चंद्र प्रकाश शर्मा ने अपने संबोधन में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में आ रहे तेज़ परिवर्तनों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज तकनीकी शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह उद्योग, नवाचार और स्टार्टअप कल्चर से सीधे जुड़ चुकी है।
पैनल चर्चा में प्रो. संजय जसोला, कुलपति, डीबीएस ग्लोबल विश्वविद्यालय, देहरादून, प्रो. विवेक कुमार, कुलपति, क्वांटम विश्वविद्यालय, रूड़की, डॉ. हरिंदर कुमार गर्ग, चेयरमैन, नैशनल काउंसिल एवं महनारी ग्रुप ऑफ कंपनी, हरिद्वार तथा इंजी. गंगा प्रसाद पंत, विशेषज्ञ समन्वयक, योजना आयोग, उत्तराखण्ड सरकार ने विषय पर अपने विस्तृत विचार प्रस्तुत किए।
सभी विशेषज्ञों ने तकनीकी शिक्षा के अतीत, वर्तमान और भविष्य के बीच सेतु बनाते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र तकनीकी शिक्षा के केंद्र में होंगे। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे केवल नौकरी पाने के बजाय रोजगार सृजन की दिशा में अग्रसर हों।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजेश उपाध्याय, वित्त नियंत्रक श्री बिक्रम सिंह जंतवाल, डॉ. आशीष बगवाड़ी, डॉ. अंकुर दुमका, डॉ. विशाल रमोला, हितांशु कटियार, अंशु सिंह, अदिति चंद, शिवानी धोनी, प्रियांशी जोशी, आद्या सिंह, निशा बिष्ट आदि शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स के सचिव इंजी. हिमांशु अवस्थी, डॉ. योगेश वर्मा तथा अन्य 8 सदस्यीय टीम ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
अंत में श्री के.सी. मिश्रा ने सभी आगंतुकों एवं विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की पैनल चर्चाएँ न केवल शिक्षण संस्थानों को नई दिशा देती हैं बल्कि राज्य में तकनीकी शिक्षा के भविष्य के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती हैं।
रजत जयंती वर्ष के इस अवसर पर आयोजित यह पैनल चर्चा तकनीकी शिक्षा में हो रहे तीव्र बदलावों को समझने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और उत्तराखण्ड को तकनीकी प्रगति की नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुई।




