“हरियाणा-बिहार के बच्चों की फिर बल्ले-बल्ले… और उत्तराखंड के युवाओं की रोज वही टल्ली-टल्ली!”

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उत्तराखंड राजकीय महाविद्यालयों में योग प्रशिक्षकों के 117 अस्थाई पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू होना उत्तराखंड के युवाओं के लिए एक सकारात्मक संकेत जरूर है। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की मानें तो एक से आठ अगस्त के बीच साक्षात्कार होंगे और 11 अगस्त से चयनित अभ्यर्थियों को तैनाती मिल जाएगी। रोजगार प्रयाग पोर्टल पर आए 640 आवेदनों में से ही मेरिट सूची बनाई जाएगी।

संवाददाता,शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स /उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट

योग्यता के लिए तय अंक प्रणाली—हाईस्कूल और इंटरमीडिएट को 10-10 अंक, स्नातक को 20, पीजी डिप्लोमा या एम.ए. योगा को 30 और अनुभव को अधिकतम 30 अंक देना—निश्चित ही पारदर्शिता का संकेत देती है। साथ ही 50 अंकों का इंटरव्यू यह सुनिश्चित करेगा कि काबिल उम्मीदवार ही चुने जाएं।

लेकिन असली सवाल वही पुराना है—क्या इन नियुक्तियों में उत्तराखंड के युवाओं को वरीयता मिलेगी? या फिर एक बार फिर हरियाणा, बिहार, यूपी और गुजरात के उम्मीदवार “आउटसोर्स” होकर यहां की नौकरियों पर काबिज हो जाएंगे?

प्रदेश में बेरोजगारी की दर लगातार चिंता का विषय है। राज्य में योग जैसे क्षेत्र में भी बाहर के उम्मीदवारों का दबदबा कोई नई बात नहीं। प्रतीत विभाग से लेकर अन्य कई विभागों में बाहरी राज्यों के लोगों की भारी उपस्थिति दिखाई देती है। स्थानीय युवाओं की शिकायत है कि वे अपनी ही धरती पर रोजगार को तरस रहे हैं।

योग प्रशिक्षित बेरोज़गार महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष अमित नेगी का यह कहना बिल्कुल सटीक है कि तैनाती की प्रक्रिया जल्द पूरी होनी चाहिए, लेकिन इसमें स्थानीय युवाओं को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वरना यह भर्ती भी उत्तराखंड के युवाओं के लिए महज़ एक और हवाई सपना बनकर रह जाएगी।

सवाल सिर्फ यह है—उत्तराखंड के युवा कब तक ‘योग’ करेंगे और बाहरी लोग ‘रोजगार’ पाएंगे?

“हरियाणा-बिहार के बच्चों की फिर बल्ले-बल्ले… और उत्तराखंड के युवाओं की रोज वही टल्ली-टल्ली!”

योग प्रशिक्षकों के 117 अस्थायी पदों की भर्ती शुरू हुई तो उत्तराखंड के बेरोज़गार युवाओं की आंखों में एक बार फिर उम्मीद की चमक दिखी। लेकिन सच्चाई ये है कि यहां की भर्तियों में भी बाहरी राज्यों का दबदबा कम नहीं। यूपी, बिहार, गुजरात — सबको यहां रोज़गार चाहिए, और मिलता भी वही।

उत्तराखंड का युवा आज भी नौकरी की तलाश में दर-दर की ठोकरें खा रहा है। रोजगार प्रयाग पोर्टल पर 640 आवेदन तो आए, लेकिन असल में देखिएगा, नियुक्तियों की फेहरिस्त में कितने चेहरे उत्तराखंड के होंगे और कितने हरियाणा, बिहार या गुजरात से।

अगर यकीन नहीं होता तो खुद किसी भी विभाग—चाहे प्रतीत विभाग हो या कोई और—में जाकर आकलन कर लो। उत्तराखंड में अब सिर्फ पहाड़, नदियां और पलायन बचे हैं। बाकी तो सब बाहरी राज्यों का “आउटसोर्स” हो चुका है।



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