लोकसभा में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को पारित नहीं करा पाई। इस बिल को पारित कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी, लेकिन बिल के पक्ष में महज 298 वोट पड़े, जबकि विरोध में 230 वोट पड़े।

इस बिल के लोकसभा में गिरने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड) रही थी।



इस बीच, विपक्षी दलों के सांसदों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। साथ ही कहा कि महिला आरक्षण बिल नहीं गिरा है। सरकार महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन कराना चाहती थी और उस साजिश की हार हुई है।

‘बिल का पारित होना नामुमकिन था’

संविधान संशोधन(131वां संशोधन) बिल के लोकसभा में पारित न होने पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि महिला आरक्षण की बात नहीं थी ये लोकतंत्र की बात थी, देश की अखंडता की बात थी। हम कभी इससे सहमत नहीं हो सकते कि आप महिला आरक्षण को इस तरह परिसीमन से जोड़ें कि वो पुरानी जनगणना पर चले जिसमें ओबीसी शामिल भी नहीं है। ये मुमकिन नहीं था कि ये बिल पारित हो। देश के लोकतंत्र के लिए, देश की अखंडता के लिए ये बड़ी जीत है।

समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा, ”ये बिल जिस तरह से सरकार ने पेश किया, उस तरह से उसका पारित होना नामुमकिन था। उन्होंने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ा और पुरानी जनगणना से जोड़ा, जिस कारण से इसे पारित नहीं किया गया।”

‘हम महिला आरक्षण के हैं समर्थक’

इस कड़ी में, तिरुवनंतपुरम सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हमारा वोट महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि परिसीमन के खिलाफ है। उन्होंने कहा, “हमने कहा था कि हम महिला आरक्षण के समर्थक हैं। लेकिन इसका परिसीमन से कोई लेना देना नहीं है। इन्हें अलग-अलग करें। ये वोट महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है। ये वोट परिसीमन के खिलाफ है।”

मोदी सरकार पर बरसे मनीष तिवारी

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह महिला आरक्षण विधेयक नहीं था, बल्कि परिसीमन विधेयक था। उन्होंने कहा, “यह महिला आरक्षण विधेयक था ही नहीं, यह परिसीमन विधेयक था। हम लगातार सरकार से कहते रहे हैं कि आप 543 सीटों पर 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दें… लेकिन सरकार की मंशा साफ नहीं थी… यह मूल रूप से परिसीमन का विधेयक था।”

‘फिर गाड़ी थमी रह गई, लगता है कोशिश में कमी रह गई’

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि फिर गाड़ी थमी रह गई, लगता है कोशिश में कमी रह गई। उन्होंने कहा, “हमने अपना पक्ष साफ रखा है… हम महिला आरक्षण के पक्ष में है, महिलाओं को आरक्षण मिले, उन्हें सुरक्षा मिले, उनका सम्मान बढ़े, लोकतंत्र में जो उनको स्थान मिलना चाहिए, हम उसके पक्ष में हैं। समाजवादी पार्टी या विपक्ष ने महिला आरक्षण को लेकर विरोध नहीं किया, लेकिन उसके साथ ये जो महिलाओं के अधिकारों का हरण करना चाहते थे, विपक्ष ने ऐसी लक्ष्मण रेखा खींची कि वे उस लक्ष्मण रेखा के पार नहीं आ पाए।”

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि हमने महिला आरक्षण बिल का पूरी तरह समर्थन दिया था, जो 2023 में पारित हुआ था, जो बिल हारा है वह परिसीमन बिल है। महिला आरक्षण के लिए हमारा समर्थन आज भी है।

‘BJP के अंत की शुरुआत’

कांग्रेस सांसद प्रणिती शिंदे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने देश की महिलाओं के साथ जो अन्याय किया है, उसे भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा, ”इन्होंने (केंद्र सरकार) बहुत बड़ा पाप किया है। 2023 में महिला आरक्षण बिल पारित हुआ था इन्हें 2024 में उसे लागू करना चाहिए था। इन्होंने महिला आरक्षण और परिसीमन को जोड़कर पाप किया है। देश की महिलाओं पर अन्याय किया है। ये भाजपा के अंत की शुरुआत है।”

‘सरकारी साजिश की हुई हार’

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी केंद्र सरकार पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल नहीं गिरा है, परिसीमन बिल गिरा है। इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा, “महिला आरक्षण की आड़ लेकर सरकार जो परिसीमन करना चाहती थी, यह उस साजिश की हार हुई है… महिला आरक्षण बिल 2023 में पास हो चुका था। महिलाओं के पीछे छुपना भाजपा बंद करे। आपकी मंशा महिलाओं को आरक्षण देने की नहीं है, वर्ना आप वर्तमान समय में आप महिला आरक्षण लागू करें लेकिन उन्हें यह नहीं करना और महिलाओं को धोखे में रखना है।”