सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के अपराधों के मामले में राज्य पुलिस प्राधिकरण केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ जांच कर सकते हैं और आरोप पत्र दाखिल कर सकते हैं।

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कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि राज्य पुलिस द्वारा केंद्र सरकार के किसी कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज करने से पहले सीबीआइ से पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

राज्य पुलिस केंद्रीय कर्मचारियों की कर सकती है जांच: SC

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सोमवार को कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों की जांच राज्य एजेंसी या केंद्रीय एजेंसी या किसी भी पुलिस एजेंसी द्वारा की जा सकती है, जैसा कि अधिनियम की धारा 17 से देखा जा सकता है, इस शर्त के साथ कि पुलिस अधिकारी एक विशेष रैंक का होना चाहिए।

धारा 17 राज्य पुलिस या राज्य की किसी विशेष एजेंसी को केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार और कदाचार से संबंधित मामलों को दर्ज करने या जांच करने से नहीं रोकती है।

जांच के लिए सीबीआई की पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं

पीठ ने कहा, ‘सुविधा के लिए और काम के दोहराव से बचने के लिए सीबीआइ को केंद्र सरकार और उसके उपक्रमों के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों की जांच का कार्य सौंपा गया है।

साथ ही, भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसीबी) को राज्य सरकार और उसके उपक्रमों के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों की जांच का कार्य सौंपा गया है।’

पीठ ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध भी संज्ञेय हैं और इसलिए राज्य पुलिस द्वारा इनकी जांच की जा सकती है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध संज्ञेय हैं

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखते हुए आया है जिसमें केंद्र सरकार के एक कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले को रद करने से इनकार कर दिया गया था।

हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था कि भले ही आरोपित केंद्रीय सरकारी कर्मचारी था, फिर भी राजस्थान एसीबी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रविधानों के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने का अधिकार था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हाईकोर्ट ने यह कहते हुए सही ²ष्टिकोण अपनाया है कि यह कहना गलत है कि केवल सीबीआइ ही अभियोजन शुरू कर सकती थी।


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