भारतीय जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अमेरिका ने संगठित अपराध नेटवर्कों के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए लॉरेंस को आरोपित किया है और उसने संकेत दिया है कि वह बिश्नोई को प्रत्यर्पित करने का अनुरोध भारत के साथ कर सकता है।

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अमेरिका में केस दर्ज होने के बाद 2023 में कनाडा में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का मामला भी सुर्खियों में आ गया है। इस नए अभियोजन में कहा गया है कि लॉरेंस बिश्नोई और उसके करीबी सहयोगी सतींदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बरार ने कथित रूप से निज्जर की हत्या की साजिश रची। दरअसल, अमेरिका और कनाडा की कानूनी एजेंसियों ने मिलकर ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ नाम से एक बहुराष्ट्रीय जांच चलाया।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

कुल 37 लोगों को आरोपित किया गया

इस में अमेरिका का डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस, फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI), लॉस एंजेलिस पुलिस डिपार्टमेंट (LAPD) और कनाडा रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) शामिल हैं। बीत सात जुलाई को लॉस एंजेलिस में संघीय अभियोजकों ने तीन बड़े अभियोग की घोषणा की है और कहा कि ये तीन संगठित क्राइम सिंडिकेट का भारत से कनेक्शन है। कुल मिलाकर 37 लोगों को आरोपित किया गया। विदेश में भारत से जुड़े किसी अपराध गिरोह के खिलाफ यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। जिन लोगों पर अभियोजन लगा है उनमें सबसे बड़ा नाम लॉरेंस बिश्नोई का है। बिश्नोई के बारे में कहा गया है कि 22 साल का यह आरोपी भारत की जेल में बंद है। जेल में रहते हुए यह कथित रूप से देश से बाहर अपराध की गतिविधियां करता आ रहा है।

नागरा समेत कई अन्य लोगों पर भी आरोप

अमेरिका की ओर से दायर आरोप केवल लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ तक सीमित नहीं हैं। पंजाब पुलिस के थाना प्रभारी (SHO) गुरिंदरजीत सिंह नागरा समेत कई अन्य लोगों पर भी आरोप लगाए गए हैं। अमेरिकी जांच एजेंसियों का दावा है कि ये सभी भारत, कनाडा और अमेरिका में सक्रिय एक आपस में जुड़े संगठित आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा थे। जांच के बाद अभियोजकों ने तीन संगठित अपराध गिरोहों से जुड़े लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। इन गिरोहों पर हिंसक अपराध, बड़े पैमाने पर फिरौती और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल होने का आरोप है। अधिकारियों के मुताबिक, 37 आरोपियों में से 24 को आरोपपत्र सार्वजनिक होने तक गिरफ्तार किया जा चुका था या वे पहले से हिरासत में थे।

लॉरेंस बिश्नोई पर क्या-क्या आरोप हैं?

अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने लॉरेंस बिश्नोई पर भारत, कनाडा, अमेरिका और यूरोप के कुछ हिस्सों तक फैले एक बड़े आपराधिक नेटवर्क का संचालन करने और उसमें सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप लगाया है।

  • रैकेटीर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गनाइजेशन एक्ट के तहत रैकेटियरिंग (संगठित अपराध) की साजिश
  • हॉब्स एक्ट के तहत रंगदारी वसूली की साजिश
  • हत्या की साजिश
  • अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थों की तस्करी
  • सीमापार संचालित संगठित आपराधिक संगठन में भागीदारी

‘बिश्नोई अपने गिरोह पर नियंत्रण बनाए हुए था’

अभियोजकों का दावा है कि भारतीय जेल में बंद होने के बावजूद लॉरेंस बिश्नोई अपने गिरोह पर नियंत्रण बनाए हुए था। आरोपपत्र के अनुसार, वह तस्करी कर जेल में पहुंचाए गए स्मार्टफोन, व्हाट्सएप और एन्क्रिप्टेड VoIP (वॉयस ओवर आईपी) प्लेटफॉर्म के जरिए अपने साथियों को निर्देश देता था। अभियोजन पक्ष का कहना है कि यह सिलसिला दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 तक जारी रहा।अमेरिकी एजेंसियों का आरोप है कि यह संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध ड्रग्स की तस्करी करता था। जांच के दौरान 1,000 किलोग्राम से अधिक कोकीन की बरामदगी का भी उल्लेख किया गया है। आरोपपत्र में एक प्रमुख भारतीय फिल्म और टीवी हस्ती, जिसे केवल ‘एसके’ के नाम से पहचान दी गई है, को लंबे समय तक धमकाने और रंगदारी वसूलने की कोशिश का भी जिक्र है।

हालांकि अदालत के दस्तावेजों में केवल ‘एसके’लिखा गया है, लेकिन आरोपों का विवरण पहले अभिनेता सलमान खान को मिली धमकियों से मेल खाता है। अमेरिकी अभियोजकों का कहना है कि ये घटनाएं साबित करती हैं कि यह एक संगठित और लगातार सक्रिय आपराधिक नेटवर्क था, जो RICO एक्ट के तहत मुकदमा चलाने की अहम शर्त है।

क्या है RICO एक्ट?

इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका ने लॉरेंस बिश्नोई और उसके साथियों पर रैकेटीर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गनाइजेशन एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। यह कानून मूल रूप से अमेरिका में माफिया और संगठित अपराध सिंडिकेट्स पर कार्रवाई के लिए बनाया गया था। RICO एक्ट के तहत अभियोजन पक्ष केवल किसी एक अपराध के लिए नहीं, बल्कि यह भी साबित करने की कोशिश करता है कि आरोपी एक संगठित आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा था और लगातार गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल रहा। इस कानून के दायरे में हत्या, फिरौती, धोखाधड़ी, मादक पदार्थों की तस्करी समेत कई गंभीर अपराध आते हैं। RICO एक्ट के तहत प्रत्येक आरोप में अधिकतम 20 साल तक की जेल की सजा हो सकती है।

हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड का इस मामले से क्या संबंध है?

आरोपपत्र के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई ने भारत की जेल में रहते हुए तस्करी से पहुंचाए गए मोबाइल फोन के जरिए इस ऑपरेशन का समन्वय किया। अभियोजकों का आरोप है कि उसने अपने एक सहयोगी को हरदीप सिंह निज्जर की तस्वीर और उससे जुड़े कई पते उपलब्ध कराए, ताकि हत्या को अंजाम दिया जा सके। आरोपपत्र में गोल्डी बराड़ को लॉरेंस बिश्नोई का बचपन का दोस्त बताया गया है और उस पर उत्तर अमेरिका में गिरोह की गतिविधियों की निगरानी करने का आरोप लगाया गया है। हरदीप सिंह निज्जर कनाडाई नागरिक था और खालिस्तान की मांग का समर्थक था। भारत सरकार ने उसकी मौत से पहले उसे आतंकवादी घोषित किया था। निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा के बीच गंभीर कूटनीतिक विवाद पैदा हो गया था। बाद में तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने दावा किया था कि कनाडाई एजेंसियां भारतीय सरकारी एजेंटों की संभावित भूमिका की जांच कर रही हैं। भारत ने इन आरोपों को “बेतुका” बताते हुए खारिज कर दिया था। हालांकि, अमेरिकी आरोपपत्र में भारत सरकार या किसी भारतीय सरकारी एजेंसी पर हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में शामिल होने का कोई आरोप नहीं लगाया गया है।

क्या प्रत्यर्पण मांग सकता है अमेरिका?

आरोपपत्र दाखिल होने का मतलब यह नहीं है कि लॉरेंस बिश्नोई तुरंत अमेरिकी हिरासत में पहुंच जाएगा। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि यह कानूनी प्रक्रिया का पहला चरण है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में फर्स्ट असिस्टेंट यूएस अटॉर्नी बिल एसायली ने कहा कि भारत में जेल में बंद रहने के बावजूद बिश्नोई का कथित आपराधिक नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रहा। उन्होंने कहा, ‘जब वह अमेरिका की संघीय जेल में होगा, तो मुझे भरोसा है कि वह किसी और से रंगदारी नहीं वसूल पाएगा… हमें उम्मीद है कि लॉरेंस बिश्नोई का अमेरिका प्रत्यर्पण होगा।’ इस बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि के तहत लॉरेंस बिश्नोई को भारत से अमेरिका लाने की कोशिश करेगा। हालांकि, प्रत्यर्पण की इच्छा जताना और वास्तव में किसी आरोपी को दूसरे देश से अपने कब्जे में लेना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इसके लिए भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि और भारत के प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।

भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि कैसे काम करती है?

लॉरेंस बिश्नोई को भारत से अमेरिका भेजने की किसी भी कोशिश का कानूनी आधार भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि है। इस संधि पर 1997 में हस्ताक्षर हुए थे और 1999 में यह लागू हुई। इससे पहले 1931 की ब्रिटेन-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि ब्रिटिश भारत पर लागू होती थी। यह संधि उन लोगों के प्रत्यर्पण की व्यवस्था करती है जिन पर दूसरे देश में गंभीर अपराधों के आरोप हों या जिन्हें दोषी ठहराया जा चुका हो। इसमें आतंकवाद, संगठित अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। चूंकि लॉरेंस बिश्नोई पर हत्या, संगठित अपराध, रंगदारी और ड्रग्स तस्करी जैसे आरोप हैं, इसलिए ये अपराध इस संधि के दायरे में आते हैं।

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