विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड कांग्रेस में खींचतान!हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा पर हाईकमान की आपत्ति, चमोली में NSUI के 5 पदाधिकारी निष्कासित


देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस के अंदर सब कुछ ठीक चल रहा है या नहीं, यह सवाल एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में उठने लगा है। पिछले कुछ दिनों में सामने आए दो घटनाक्रमों ने प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत की ओर से निकाली जा रही धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा को लेकर पार्टी हाईकमान ने आपत्ति जताई है, वहीं दूसरी ओर चमोली में छात्रसंघ चुनाव को लेकर कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI ने अपने पांच अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


हरीश रावत की यात्रा पर कांग्रेस नेतृत्व नाराज
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पिछले कुछ समय से उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा कर रहे हैं। यात्रा की शुरुआत हरिद्वार से हुई थी। रावत की सभाओं और कार्यक्रमों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों की भागीदारी भी दिखाई दी। कई स्थानों पर उनका स्वागत किया गया। यात्रा के दौरान उनके समर्थकों की सक्रियता और राजनीतिक संदेशों ने भी इसे चर्चा में ला दिया।
लेकिन अब यही यात्रा कांग्रेस संगठन के लिए असहज स्थिति का कारण बनती दिखाई दे रही है। उत्तराखंड कांग्रेस की प्रभारी महासचिव कुमारी शैलजा ने हरीश रावत को पत्र लिखकर उनके यात्रा कार्यक्रम और अन्य समानांतर गतिविधियों को आगे नहीं बढ़ाने के लिए कहा है।
पार्टी नेतृत्व की आपत्ति मुख्य रूप से यात्रा के संगठनात्मक समन्वय को लेकर बताई जा रही है। शैलजा ने अपने पत्र में कहा कि यात्रा के संबंध में न तो उनसे और न ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से पहले चर्चा की गई। ऐसे समय में जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, कांग्रेस को एकजुट होकर जनता के बीच जाने की आवश्यकता है।
पार्टी नेतृत्व का तर्क है कि प्रदेश कांग्रेस के समानांतर कोई राजनीतिक कार्यक्रम संगठन के हित में नहीं है। चुनावी तैयारियों के बीच सभी बड़े कार्यक्रमों में प्रदेश संगठन की भागीदारी और समन्वय जरूरी है।
केसी वेणुगोपाल से चर्चा के बाद बढ़ा मामला
इस पूरे घटनाक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से चर्चा के बाद कुमारी शैलजा की ओर से रावत को पत्र भेजे जाने की बात सामने आई है। यानी मामला केवल प्रदेश स्तर पर संगठनात्मक असहमति तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसकी जानकारी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व तक भी पहुंच चुकी है।
रिपोर्टों के मुताबिक, हरीश रावत को दिल्ली बुलाया गया है। अब उनकी केंद्रीय नेतृत्व के साथ होने वाली बातचीत पर नजर है। बैठक में यात्रा को लेकर उनकी स्थिति और पार्टी संगठन के साथ भविष्य में समन्वय को लेकर चर्चा होने की संभावना है।
हालांकि, रावत की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि उनकी यात्रा का उद्देश्य कोई समानांतर संगठन खड़ा करना नहीं है। वह इसे जनता से सीधे संवाद और उनके प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम बताते रहे हैं। उनका तर्क है कि जनता के बीच जाना और कार्यकर्ताओं से संवाद करना पार्टी को मजबूत करने के उद्देश्य से ही है।
‘टाइगर इज बैक’ पोस्टरों ने बढ़ाई चर्चा
हरिद्वार में रावत की यात्रा के दौरान उनके समर्थकों की ओर से किए गए स्वागत और ‘टाइगर इज बैक’ जैसे पोस्टरों ने भी राजनीतिक चर्चा को हवा दी। इससे यह संदेश गया कि रावत एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी में हैं।
ऐसे में उनकी जनसंवाद यात्रा को केवल सामाजिक या जनसंपर्क कार्यक्रम के रूप में देखने के बजाय कांग्रेस की आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। यही वजह है कि पार्टी संगठन की ओर से यात्रा के स्वरूप और समन्वय को लेकर सवाल उठे हैं।
चमोली में NSUI की बड़ी कार्रवाई
दूसरी ओर चमोली छात्र महासंघ चुनाव को लेकर कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI ने भी कड़ा कदम उठाया है। NSUI उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष विकास नेगी ने पांच अधिकृत प्रत्याशियों को संगठन की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है।
कार्रवाई की जद में आने वालों में गोपेश्वर से ललित सिंह, कर्णप्रयाग से विशाल सिंह, जोशीमठ से सुमित सिंह, नारायणबगड़ से गौरव कुमार और नंदानगर-घाट से अजय सिंह शामिल हैं।
संगठन के मुताबिक, इन प्रत्याशियों के खिलाफ छात्र महासंघ चुनाव के दौरान संगठन के निर्देशों के विपरीत गतिविधियों में शामिल होने और ABVP के पक्ष में मतदान कराने से संबंधित शिकायतें प्राप्त हुई थीं। NSUI ने शिकायतों और उपलब्ध तथ्यों को संगठनात्मक अनुशासन के विरुद्ध मानते हुए पांचों के खिलाफ कार्रवाई की।
चुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता की चुनौती
हरीश रावत की यात्रा और चमोली में NSUI की कार्रवाई भले ही अलग-अलग घटनाएं हों, लेकिन दोनों घटनाक्रम चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने मौजूद संगठनात्मक चुनौती की ओर इशारा करते हैं। एक तरफ पार्टी नेतृत्व बड़े नेताओं और प्रदेश संगठन के बीच बेहतर समन्वय चाहता है, वहीं दूसरी तरफ छात्र संगठन भी अनुशासन को लेकर सख्त संदेश दे रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि हरीश रावत और कांग्रेस हाईकमान के बीच होने वाली बातचीत का परिणाम क्या निकलता है। क्या रावत अपनी यात्रा को पार्टी संगठन के साथ समन्वय बनाकर आगे बढ़ाएंगे या हाईकमान के निर्देश के बाद यात्रा पर विराम लगेगा?
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की कोशिश में है। लेकिन हरीश रावत जैसे वरिष्ठ नेता की सक्रियता और उस पर हाईकमान की आपत्ति ने प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले दिनों में रावत के रुख और केंद्रीय नेतृत्व के फैसले से उत्तराखंड कांग्रेस की चुनावी रणनीति की दिशा काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है।